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Mala Jaap Rules: माला जप करते समय तर्जनी उंगली का इस्तेमाल क्यों है वर्जित? जानें धार्मिक मान्यता

Mala Jaap Rules: हिंदू धर्म में भगवान का नाम स्मरण और मंत्र जाप को साधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मंत्रों का जाप करने के लिए अक्सर माला का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि धार्मिक परंपराओं में माला जप करने के लिए भी कुछ खास नियम बताए गए हैं। माला को किस उंगली पर रखना चाहिए, किन उंगलियों से मनके फेरने चाहिए और जप करते समय किन बातों से बचना चाहिए, इसका विशेष ध्यान रखने की मान्यता है। खास तौर पर तर्जनी उंगली से माला फेरना वर्जित माना जाता है। आखिर इसके पीछे क्या वजह बताई गई है? आइए जानते हैं।

तर्जनी उंगली से माला फेरना क्यों माना जाता है गलत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माला जप करते समय तर्जनी उंगली यानी इंडेक्स फिंगर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसे अहंकार और सांसारिक अधिकार भाव से जोड़कर देखा जाता है।

आमतौर पर तर्जनी उंगली का इस्तेमाल किसी को निर्देश देने, चेतावनी देने या किसी व्यक्ति की ओर इशारा करने के लिए किया जाता है। आध्यात्मिक साधना में अहंकार और अभिमान से दूर रहने को महत्वपूर्ण माना गया है। इसी वजह से जप के दौरान तर्जनी उंगली को माला से अलग रखने की परंपरा बताई गई है।

किन उंगलियों से करनी चाहिए माला?
मान्यता के अनुसार माला को अनामिका (रिंग फिंगर) पर रखकर मध्यमा (मिडिल फिंगर) और अंगूठे की मदद से मनके फेरने चाहिए। तर्जनी उंगली को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाता।

कुछ धार्मिक परंपराओं में यह भी कहा गया है कि माला जप करते समय माला का जमीन से स्पर्श नहीं होना चाहिए और उसे सम्मानपूर्वक रखना चाहिए।

क्या गरुड़ पुराण में भी मिलता है इसका उल्लेख?
कुछ धार्मिक स्रोतों में गरुड़ पुराण और वशिष्ठ संहिता जैसे ग्रंथों से जोड़कर तर्जनी उंगली से किए गए जप को निष्फल बताए जाने की मान्यता मिलती है। परंपरा में तर्जनी से माला का स्पर्श करना ईश्वर की ओर उंगली उठाने के समान माना गया है। हालांकि ऐसे धार्मिक संदर्भों को आस्था और परंपरा के संदर्भ में ही समझना उचित है।

माला जप के 4 जरूरी नियम
1. सुमेरु मनके को न लांघें
माला में सामान्यतः 108 मनके होते हैं और इनके साथ एक बड़ा मनका होता है, जिसे सुमेरु कहा जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार जप करते समय सुमेरु तक पहुंचने के बाद उसे पार नहीं करना चाहिए।

2. सुमेरु के बाद दिशा बदलें
जब एक चक्र का जप पूरा हो जाए और सुमेरु मनका आ जाए तो माला को वहीं से पलटकर दूसरी दिशा में जप शुरू करने की परंपरा है। सुमेरु को क्रॉस करके आगे बढ़ना उचित नहीं माना जाता।

3. गोमुखी का इस्तेमाल

मंत्र जप के दौरान माला को गोमुखी यानी कपड़े की विशेष थैली में रखकर जप करने की परंपरा भी है। मान्यता है कि इससे साधना की गोपनीयता बनी रहती है और माला को बार-बार खुला रखने की जरूरत नहीं पड़ती।

4. आसन और शुद्धता का ध्यान
जप से पहले हाथ-पैर धोकर स्वच्छ होकर पवित्र आसन पर बैठने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जप के दौरान माला को नाभि से ऊपर और हृदय के समीप रखकर मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।

माला जप का सही समय और दिशा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त को मंत्र जाप के लिए विशेष शुभ माना जाता है। सामान्यतः सुबह सूर्योदय से पहले का समय साधना के लिए उपयुक्त माना जाता है।

जप करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठने की भी परंपरा है। हालांकि अलग-अलग साधना पद्धतियों और मंत्रों के अनुसार नियम अलग हो सकते हैं।

ध्यान रखें
माला जप से जुड़े नियम धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग संप्रदायों और साधना पद्धतियों में इनके नियमों में अंतर भी मिल सकता है। इसलिए किसी विशेष मंत्र की साधना शुरू करने से पहले संबंधित परंपरा या योग्य गुरु के निर्देशों का पालन करना बेहतर माना जाता है।

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तानों की परवाह नहीं की, सीखे घरेलू काम और मिथिला पेंटिंग, आज विदेशों तक डिमांड

Madhubani artist success story: बिहार के मधुबनी निवासी रमेश मंडल ने समाज के तानों और विरोध को अपनी राह की रुकावट नहीं बनने दिया. जिन कामों को कभी लोग महिलाओं से जोड़कर देखते थे, रमेश ने उन्हीं घरेलू हुनर, मिथिला पेंटिंग, लोककला, लोक नृत्य और गायिकी को सीखा और अपनी पहचान बना ली. आज उनकी बनाई पेंटिंग की कीमत ₹30-35 हजार तक है, विदेशों से भी ऑर्डर मिलते हैं और वह अब तक 5 हजार से ज्यादा लोगों को घरेलू काम व चित्रकारी का प्रशिक्षण दे चुके हैं.

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  Sports

Shreyas Iyer के विकल्प की तलाश, Middle Order में संतुलन के लिए Tilak Varma पर Team India की नजर

अगले साल होने वाले एकदिवसीय विश्व कप को ध्यान में रखते हुए भारतीय टीम प्रबंधन और चयनकर्ता अभी से मध्यक्रम के विकल्प तैयार करने में जुट गए हैं। इसी योजना के तहत तिलक वर्मा का नाम श्रेयस अय्यर के संभावित विकल्प के तौर पर सामने आया है। टीम प्रबंधन तिलक को शीर्ष छह में एक उपयोगी विकल्प मान रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि वह बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और मौजूदा क्रम में दाएं हाथ के बल्लेबाजों की अधिकता को संतुलित कर सकते हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, तिलक वर्मा को अपनी गेंदबाजी पर भी विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया है। उनके ऑफ स्पिन को टीम प्रबंधन संभावनाओं से भरा मानता है। भारतीय टीम में शीर्ष क्रम से पर्याप्त गेंदबाजी विकल्प नहीं होने की समस्या भी महसूस की जा रही है। इसी वजह से कई बार निचले क्रम के बल्लेबाजों और मुख्य गेंदबाजों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है।

भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल का मानना है कि मध्यक्रम में अभी ऐसा मजबूत विकल्प तैयार नहीं है जो मुख्य खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में जिम्मेदारी संभाल सके। हार्दिक पांड्या और नितीश कुमार रेड्डी की फिटनेस को लेकर लगातार सवाल बने रहते हैं। ऐसे में टीम प्रबंधन चाहता है कि शीर्ष क्रम में ऐसा खिलाड़ी मौजूद हो जो एकदिवसीय मुकाबले में जरूरत पड़ने पर चार ओवर भी कर सके।

पिछले करीब एक साल में टीम को संतुलन बनाने के लिए वॉशिंगटन सुंदर या अक्षर पटेल को पांचवें या छठे क्रम पर उतारना पड़ा है। इंग्लैंड के पिछले दौरे में तो उपकप्तान श्रेयस अय्यर से पहले ईशान किशन को बल्लेबाजी के लिए भेजा गया था। चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन को इस तरह खिलाड़ियों को उनके नियमित स्थान से अलग भूमिका देने का विकल्प बहुत पसंद नहीं है।

गौरतलब है कि पिछले साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रायपुर में रुतुराज गायकवाड़ को चौथे क्रम पर उतारा गया था और उन्होंने शतक भी लगाया था। हालांकि, इसके बाद उन्हें एकदिवसीय टीम में जगह नहीं मिली। टीम प्रबंधन का मानना है कि गायकवाड़ को मुख्य रूप से शुभमन गिल की अनुपस्थिति में सलामी बल्लेबाज के विकल्प के तौर पर चुना गया था। यही वजह है कि देवदत्त पडिक्कल को भी जल्दबाजी में एकदिवसीय ढांचे में शामिल करने से चयनकर्ता बचना चाहते हैं, क्योंकि सफेद गेंद के क्रिकेट में उन्हें सलामी बल्लेबाजी में अधिक सफलता मिली है।

हालांकि, 27 सितंबर से वेस्टइंडीज के खिलाफ शुरू होने वाली घरेलू एकदिवसीय श्रृंखला में स्थिति अलग होगी। श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा, ईशान किशन और अक्षर पटेल उपलब्ध नहीं रहेंगे। इसी कारण चयनकर्ताओं का ध्यान इस श्रृंखला के लिए एक और विकेटकीपर विकल्प तलाशने पर अधिक है।

विश्व कप की वास्तविक तैयारी अक्टूबर में न्यूजीलैंड पहुंचने के बाद शुरू होने की उम्मीद है। इससे पहले अधिकांश प्रमुख खिलाड़ी वेस्टइंडीज श्रृंखला से बाहर रहेंगे, जबकि उसी समय पूरी ताकत वाली टी20 टीम एशियाई खेलों के लिए जापान जाएगी।

बता दें कि अफगानिस्तान के खिलाफ दिल्ली में 13 सितंबर से होने वाली तीन टी20 मुकाबलों की श्रृंखला के लिए चयन समिति की बैठक तीन सितंबर तक होने की संभावना है। माना जा रहा है कि एशियाई खेलों के लिए चुनी गई टीम को ही काफी हद तक बरकरार रखा जाएगा। हार्दिक पांड्या, नितीश कुमार रेड्डी और जसप्रीत बुमराह की आधिकारिक फिटनेस रिपोर्ट का इंतजार है, जबकि वरुण चक्रवर्ती के पूरी तरह फिट होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में अगले विश्व कप को देखते हुए युवा और बहुआयामी खिलाड़ियों को तैयार करना टीम प्रबंधन की प्राथमिकता बनी हुई है।
Sun, 30 Aug 2026 21:24:00 +0530

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