सिडा एक्यूटा: खरपतवार समझा जाने वाला यह पौधा आयुर्वेद में है चमत्कारी, जानें इसके औषधीय गुण और उपयोग
गांवों में खेतों की मेड़, बगीचों और खाली पड़ी जमीन पर एक छोटा हरा पौधा अक्सर दिखाई देता है. ज्यादातर लोग इसे साधारण खरपतवार समझकर उखाड़ देते हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसे सिडा एक्यूटा (Sida acuta) के नाम से जाना जाता है. ग्रामीण इलाकों में इसे कई जगह बला या जंगली बला भी कहा जाता है. यह पौधा लंबे समय से पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग होता आ रहा है और इसकी पत्तियां, जड़ व तना औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध माने जाते हैं. सिडा एक्यूटा, जिसे बला या जंगली बला भी कहते हैं, एक औषधीय पौधा है. वैद्य जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, यह सूजन कम करने, घाव भरने और त्वचा समस्याओं में उपयोगी है.
India Weather Alert: देश के 26 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट; पहाड़ों पर फिर बढ़ा बाढ़ और भूस्खलन का संकट
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, देश भर में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदल गया है। रविवार को 26 राज्यों में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है। खासकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में अगले चार दिन अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा जम्मू-कश्मीर, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश का अनुमान है। मध्य प्रदेश के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज कर दिए गए हैं, जबकि राजस्थान में फिलहाल मानसूनी गतिविधियां सुस्त बनी हुई हैं।
उत्तराखंड और हिमाचल में चार दिन आफत का खतरा
देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सीएस तोमर के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-उत्तरी ओडिशा तट पर निम्न दबाव का क्षेत्र बना है, जो अगले 48 घंटों में और मजबूत होगा। इसके साथ ही अमृतसर से इस मौसम प्रणाली तक मानसून टर्फ फैली हुई है और उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है।
इन तीनों मौसम प्रणालियों के एक साथ सक्रिय होने से उत्तराखंड में अगले चार दिन भारी बारिश होगी। निचले इलाकों में जलभराव और नदियों तथा गदेरों में अचानक बाढ़ आने की आशंका के चलते भूस्खलन वाले क्षेत्रों में सतर्क रहने को कहा गया है।
वैष्णो देवी मार्ग प्रभावित और अन्य राज्यों का हाल
जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार देर रात से शुरू हुई बारिश शनिवार को भी जारी रही। इस दौरान हिमकोटि में पत्थर गिरने के कारण वैष्णो देवी श्रद्धालुओं के लिए बैटरी मार्ग कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा। बिहार के भोजपुर, गोपालगंज, पटना, बक्सर और लखीसराय में 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और तूफान का अनुमान है।
झारखंड में 70 किमी प्रति घंटे की आंधी का अलर्ट है। ओडिशा के क्योंझर, मयूरभंज, बालासोर और पश्चिम बंगाल के तटीय जिलों में 31 अगस्त तक अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी है।
मध्य प्रदेश में बाढ़ की स्थिति और रेस्क्यू ऑपरेशन
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सतना और रीवा में जलभराव तथा बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों और चित्रकूट में ठहरे श्रद्धालुओं के लिए भोजन, कपड़े और साफ पीने के पानी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। सतना जिले के छह गांवों में बचाव अभियान चलाकर लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
नयागांव बांध को पहुंचे नुकसान का आकलन किया जा रहा है। कम प्रभावित जिलों के बचाव उपकरण बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजे जा रहे हैं और एनडीआरएफ की टीमों को बचाव कार्य में लगाया गया है।
राजस्थान में कमजोर पड़ा मानसून
राजस्थान में मानसून की गतिविधियां फिलहाल कमजोर हो गई हैं और अगले एक सप्ताह राज्य के ज्यादातर हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है। बीकानेर, जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, जयपुर, भरतपुर और कोटा संभागों में कमजोर मानसूनी स्थिति रहेगी, हालांकि पूर्वी राजस्थान में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है।
3-4 सितंबर से पूर्वी और उत्तरी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां एक बार फिर बढ़ सकती हैं। शुक्रवार को श्रीगंगानगर में अधिकतम तापमान 39.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
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