UPPSC GIC Lecturer Mains Admit Card 2026: जीआईसी लेक्चरर मुख्य परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, ऐसे करें डाउनलोड
UPPSC GIC Lecturer Mains Admit Card 2026 का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने जीआईसी लेक्चरर मुख्य परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाकर अपना हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं। एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर, पासवर्ड और कैप्चा कोड की जरूरत होगी।
इन स्टेप्स से डाउनलोड करें UPPSC GIC Lecturer Admit Card
उम्मीदवार नीचे दिए आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
- सबसे पहले UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाएं।
- होमपेज पर दिए गए Admit Card सेक्शन पर क्लिक करें।
- अब UPPSC GIC Lecturer Mains Admit Card 2026 लिंक पर क्लिक करें।
- स्क्रीन पर मांगी गई लॉगिन डिटेल जैसे रजिस्ट्रेशन नंबर, पासवर्ड और कैप्चा कोड दर्ज करें।
- लॉगिन डिटेल सबमिट करते ही आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा।
- एडमिट कार्ड डाउनलोड करें और भविष्य के लिए इसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।
30 अगस्त को होगी GIC Lecturer Mains परीक्षा
UPPSC GIC Lecturer की मुख्य परीक्षा 30 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। परीक्षा कुल 300 अंकों की होगी। पेपर में सभी प्रश्न बहुविकल्पीय प्रकार के होंगे।
उम्मीदवारों को सलाह है कि परीक्षा केंद्र पर जाने से पहले एडमिट कार्ड में दर्ज परीक्षा केंद्र, तारीख, समय और जरूरी दिशा-निर्देश अच्छी तरह पढ़ लें। परीक्षा के दिन एडमिट कार्ड के बिना केंद्र पर प्रवेश में परेशानी हो सकती है।
उम्मीदवारों के लिए जरूरी सलाह
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद उसमें अपना नाम, रोल नंबर, फोटो, परीक्षा केंद्र और अन्य विवरण जरूर जांच लें। किसी तरह की गलती नजर आने पर उम्मीदवारों को समय रहते आयोग से संपर्क करना चाहिए। परीक्षा से जुड़े किसी भी नए अपडेट के लिए UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें।
नेपाल में बाढ़, अब तक 157 मौतें, सैकड़ों लापता:मानसरोवर यात्रा पर निकले 133 भारतीयों का भी सुराग नहीं; 9 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, 19 पुल बहे
नेपाल में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा 157 पहुंच गया है। सैकड़ों लोग लापता हैं। इनमें नेपाल सहित 25 देशों के 403 लोग हैं। सबसे ज्यादा 133 भारतीय लापता हैं। सभी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे, जिनका अब तक कुछ पता नहीं चला है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक, अलग-अलग इलाकों में 80 सुरक्षा कर्मी भी लापता हैं। इनमें 44 नेपाल आर्मी के जवान शामिल हैं। बाढ़ से रसुवा और धादिंग के अलावा नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी ईस्ट तक के इलाके प्रभावित हुए हैं। बाढ़ इतनी तेजी से आई कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पानी और मलबे ने रास्ते में आने वाले लोगों, घरों, गाड़ियों और सरकारी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। देश के 9 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, 19 मोटरेबल पुल तबाह हो गए। नेपाल-चीन को जोड़ने वाले 42 किलोमीटर लंबा बेट्रावती-रासुवागढ़ी हाईवे भी बह गया। चीन सीमा के कस्टम चेकपोस्ट पर खड़े 300 से ज्यादा वाहन और ट्रक भी पानी के साथ बह गए। तिब्बत से नेपाल में घुसा बाढ़ का पानी- 3 तस्वीरें चीन-नेपाल को जोड़ने वाला पुल तबाह- 2 तस्वीरें पहाड़ से उतर रही नदी ने तबाही मचाई- 3 तस्वीरें भास्कर नॉलेजः कैसे आई बाढ़, कितना असर और भारत पर इम्पैक्ट बाढ़ की वजह को लेकर 3 संभावनाएं 1. लैंडस्लाइड से नदी का रास्ता रुका: यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) की जांच में पता चला कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर चीन की ल्हेंदे नदी में पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसककर गिरा। इससे नदी का बहाव रुका और पानी-मलबा जमा होने के बाद अचानक तेज बहाव आया। इस घटना से 5.2 तीव्रता के भूकंप जितनी ऊर्जा पैदा हुई थी। ल्हेंदे का पानी भोटेकोशी नदी में पहुंच गया, जिससे बाढ़ आ गई। 2. भूकंप से ग्लेशियल फटने की आशंका: नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में बताया कि सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया और करीब तीन मिनट बाद फ्लैश फ्लड की सूचना मिली। इससे आशंका जताई जा रही है कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियल आउटबर्स्ट हुआ होगा। 3. ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट: एक संभावना यह भी है कि बर्फ और मलबे से नदी का रास्ता रुकने के बाद अस्थायी झील बनी और उसका पानी अचानक बाहर निकला। विशेषज्ञ अभी यह जांच रहे हैं कि क्या इस घटना में ग्लेशियल झील भी फूटी थी। बारिश को फिलहाल वजह नहीं माना जा रहा है, क्योंकि नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विभाग के मुताबिक बाढ़ से पहले रसुवा में भारी बारिश नहीं हुई थी। नदी किनारे रहने वालों को खतरा बरकरार नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन ने चेतावनी दी है कि भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के इलाकों में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। चीन की ओर नदी के रास्ते में बनी झील अभी पूरी तरह खाली नहीं हुई है। लोगों से नदी के आसपास जाने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है। नेपाल में पिछले साल भी भोटेकोशी नदी में विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई थी। नेपाल-चीन को जोड़ने वाला मितेरी पुल भी बह गया था। भारत में कहां-कितना असर होगा भारत में इसका असर मुख्य रूप से बिहार की गंडक नदी और उससे जुड़ी छोटी-बड़ी नदियों में दिखने की आशंका है। नेपाल से करीब 3 मीटर ऊंची फ्लड वेव आने का अलर्ट है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में खास सतर्कता बरती जा रही है। सीतामढ़ी और शिवहर पर भी नजर है। नेपाल का पानी त्रिशूली नदी से होते हुए गंडक तक पहुंचेगा। इसके बाद बिहार के निचले इलाकों में पानी बढ़ सकता है। यूपी के महाराजगंज और कुशीनगर में भी अलर्ट जारी किया गया है। खबर से जुड़े पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…
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