बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर हुए शनिवार को यहां प्रदर्शन के दौरान भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने अपनी कई मांगों को लेकर यहां गांधी मैदान से एक मार्च निकाला।
इन मांगों में 70वीं बीपीएससी परीक्षा की न्यायिक जांच और बिहार सरकार की भर्तियों में राज्य के अभ्यर्थियों के लिए 85 प्रतिशत आरक्षण की नीति लागू करना शामिल था। नगर पुलिस अधीक्षक (मध्य) ममता कल्याणी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि प्रदर्शनकारियों ने जेपी गोलंबर के निकट लगाए गए बैरिकेड को तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। कल्याणी ने कहा, ‘‘प्रदर्शनकारी गांधी मैदान के पास एकत्र हुए और उन्होंने यातायात को बाधित करने की कोशिश की।
हमारे बार-बार अनुरोध करने के बावजूद, उन्होंने सड़कें खाली करने से इनकार कर दिया। बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया और वाहनों की आवाजाही सामान्य हो गई।
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द्वारका कोर्ट के स्पेशल जज ने शनिवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने से जुड़े मामले पर एक रिविज़न याचिका पर फैसला टाल दिया। अब कोर्ट 21 सितंबर को इस पर अपना आदेश सुनाएगी। कोर्ट ने उस रिविज़न याचिका पर आदेश सुनाना टाल दिया है जिसमें कांग्रेस नेता के भारतीय नागरिक बनने से पहले ही वोटर लिस्ट में उनका नाम कथित तौर पर शामिल किए जाने को लेकर FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। यह रिविज़न याचिका विकास त्रिपाठी ने दायर की थी। उनका आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया गया था। वह इस मामले में FIR दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
त्रिपाठी की FIR दर्ज करने की अर्ज़ी को पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने इस आदेश को चुनौती देते हुए सेशन कोर्ट में एक रिविज़न याचिका दायर की। स्पेशल जज विशाल गोगने, जिनका तबादला हो चुका है, उन्हें 29 अगस्त को आदेश सुनाना था। उन्होंने 25 जुलाई को ही आदेश सुरक्षित रख लिया था। बहस के दौरान, सोनिया गांधी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट आर एस चीमा और एडवोकेट तरन्नुम चीमा ने कहा कि रिविज़न याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेज़ असली नहीं थे। दूसरी ओर, रिविज़न याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अजय बर्मन और एडवोकेट नीरज ने तर्क दिया कि प्रतिवादी यह नहीं बता पाए कि भारतीय नागरिक बनने से पहले ही सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट में कैसे शामिल हो गया।
यह मामला 1983 में भारतीय नागरिक बनने से पहले ही सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जाने के आरोपों से जुड़ा है। 4 जुलाई को, सोनिया गांधी ने इस मामले में अतिरिक्त दस्तावेज़ रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति मांगने वाली अर्ज़ी के जवाब में अपना पक्ष रखा। इससे पहले, 16 मई को त्रिपाठी ने एक अतिरिक्त दस्तावेज़ रिकॉर्ड पर लाने के लिए अर्ज़ी दाखिल की थी। 18 अप्रैल को, जवाबी दलीलें पूरी होने के बाद, याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग की 1980 की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति मांगी। इसके बाद, अतिरिक्त दस्तावेज़ जमा करने की अनुमति के लिए एक अर्ज़ी दाखिल की गई।
30 मार्च को, अदालत ने सोनिया गांधी के खिलाफ शिकायतकर्ता की दलीलें और उनके वकील का पक्ष सुना।
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