Delhi में 1918 के Influenza ने ली थीं 7,044 जानें, ऐसे घोषित हुआ था संक्रामक रोग
शिमला से 1918 में दिल्ली आए एक बीमार यूरोपीय व्यक्ति को इन्फ्लुएंजा के शुरुआती मामलों में दर्ज किया गया था, जब यह बीमारी शहर में फैलने लगी थी। अभिलेखों के अनुसार, कुछ ही महीनों में इस बीमारी ने दिल्ली शहर में 7,044 लोगों की जान ले ली थी। ‘पीटीआई’ को दिल्ली अभिलेखागार से मिले दस्तावेजों के अनुसार, दो साल बाद, सितंबर 1920 में ब्रिटिश भारत प्रशासन ने दिल्ली में सामान्य इन्फ्लुएंजा को आधिकारिक रूप से संक्रामक रोग घोषित कर दिया।
इस अधिसूचना के बाद इन्फ्लुएंजा को पंजाब नगरपालिका अधिनियम के तहत संक्रामक रोगों से जुड़े प्रावधानों में शामिल कर लिया गया। उस समय दिल्ली का नगर प्रशासन इसी अधिनियम के तहत संचालित होता था। इसके साथ ही बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली नगरपालिका को अधिकार मिल गए।
अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल, दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार (आंतरिक चिकित्सा) डॉ. संचयन रॉय ने कहा कि आज एच1एन1 को दिल्ली के संक्रमण नियंत्रण दिशानिर्देशों के तहत रिपोर्ट किए जाने वाले संक्रमण के रूप में शामिल किया गया है, लेकिन मौसमी इन्फ्लुएंजा के हर मामले की अलग-अलग सूचना देना जरूरी नहीं है। दिल्ली अभिलेखागार में सुरक्षित 1918 की एक चिकित्सा रिपोर्ट के अनुसार, प्रांत के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के ध्यान में आया पहला मामला एक ऐसे यूरोपीय व्यक्ति का था, जो हाल ही में शिमला (तत्कालीन सिमला) से आया था, जहां उसके परिवार के सदस्य उसी बीमारी से पीड़ित थे। एक हफ्ते बाद, उसी घर में रहने वाला एक और यूरोपीय व्यक्ति “साफ तौर पर पहले मामले से संक्रमित” पाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर भर “चिंता या घबराहट” की कोई खास वजह नहीं थी। मरीजों को बुखार, गले में खराश और खांसी की शिकायत थी, लेकिन अक्टूबर तक मामले ज्यादा बार सामने आने लगे और वे ज्यादा गंभीर एवं जानलेवा हो गए। दिल्ली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी की 1918 की एक आधिकारिक सूचना के अनुसार, अक्टूबर और नवंबर के महीनों में दिल्ली प्रांत में इन्फ्लुएंजा से 23,175 लोगों की मौत हुई थी।
‘पीटीआई’ को दिल्ली अभिलेखागार से मिले दस्तावेजों के मुताबिक, इनमें से 7,044 मौत दिल्ली शहर में और 16,131 मौत ग्रामीण इलाकों में हुई थीं। वर्ष 1918-19 की इन्फ्लुएंजा महामारी भारत के आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदाओं में से एक थी।
Gorakhpur: छात्रा से दुष्कर्म के आरोपी स्कूल प्रबंधक के बेटे पर FIR दर्ज
गोरखपुर जिले के गोला थाना क्षेत्र में एक निजी बालिका माध्यमिक विद्यालय की दसवीं कक्षा की छात्रा (15) का चार महीने तक यौन शोषण करने के आरोप में एक स्कूल प्रबंधक के बेटे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि प्रबंधक उसी स्कूल में शिक्षक भी हैं और उनके आरोपी बेटे की तलाश शुरू कर दी गई है।
गोला के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) दरवेश कुमार ने बताया, शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। टीम उसे गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही है और जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने छात्रा को परीक्षा में फेल करने की धमकी दी और गोरखपुर शहर में भविष्य की पढ़ाई का खर्च उठाने का लालच देकर कथित तौर पर लगातार दुष्कर्म किया।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार, छात्रा अपने दादा, मां और छोटी बहन के साथ गांव में रहती है, जबकि उसके पिता मुंबई में काम करते हैं। करीब चार महीने पहले 29 वर्षीय आरोपी प्रतीक त्रिपाठी ने स्कूल समय के बाद छात्रा को अपने कार्यालय के कक्ष में बुलाया और उसके साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की।
आरोपी ने विरोध करने पर उसे परीक्षा में फेल करने और बदनाम करने की धमकी दी। इसके बाद छात्रा के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया। आरोप है कि छात्रा के मिलने से इनकार करने पर आरोपी ने फोन पर हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग ऑनलाइन लीक कर दी, जिससे परेशान होकर उसने आत्महत्या का प्रयास किया।
पुलिस के अनुसार, छात्रा के दादा शुक्रवार को उसके साथ गोला थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद आरोपी फरार हो गया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की डेढ़ साल पहले शादी हुई थी और उसकी ढाई महीने की बेटी है।
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