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MBBS : कटऑफ में उछाल, NEET में 462 अंकों पर मिली एमबीबीए सीट, ओपन में 60 रैंक का फर्क

तमिलनाडु में 85 फीसदी स्टेट कोटा एमबीबीएस और बीडीएस सीटों पर दाखिले के लिए नीट यूजी स्टेट काउंसलिंग जारी है। पहले राउंड की नीट यूजी स्टेट काउंसलिंग में एमबीबीएस सीटों के कटऑफ अंक ज्यादातर आरक्षण श्रेणियों में बढ़ गए हैं।

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Backward Walking: क्या Backward Walking से घुटने का दर्द सच में होता है कम? जानें इसके बड़े फायदे

आजकल घुटनों का दर्द लाइफस्टाइल में एक आम समस्या बन चुका है। पहले यह समस्या बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवा भी लंबे समय तक बैठे रहने, फिजिकल एक्टिविटी कम होने, गलत तरीके से चलने-फिरने और मोटापे की वजह से घुटने के दर्द की वजह से परेशान रहते हैं। ऐसे में घुटनों के दर्द से राहत पाने के लिए लोह कई तरह की एक्सरसाइज करते हैं और घरेलू उपाय अपनाते हैं।

जिसमें हाल के समय में बैकवर्ड वॉकिंग यानी पीछे की तरफ चलना काफी चलन में है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या सच में पीछे की तरफ चलना घुटनों के दर्द में फायदा देता है, या सिर्फ एक ट्रेंड है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इसके पीछे की सच्चाई के बारे में बताने जा रहे हैं।

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उल्टा चलने से घुटने का दर्द ठीक होता है क्या

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक पीछे की तरफ चलने से घुटने के जोड़ पर लगने वाले दबाव का तरीका बदल जाता है। इससे घुटने के आगे वाले हिस्से पर पड़ने वाला जो लोड कम हो सकता है। यह प्रोसेस घुटने की स्थिरता और संतुलन को बेहतर बनाने में सहायता करता है। वहीं यह अलग-अलग मसल्स ग्रुप को एक्टिव करता है। जोकि सामान्य चलने के दौरान इतना उपयोग में नहीं आते।

कुछ लोगों में, या खासकर उन लोगों में ऑस्टियोअर्थराइटिस या घुटने के आगे के हिस्से से जुड़ी समस्या है। उनमें यह अभ्यास धीरे-धीरे असहजता और दर्द को कम करने में मदद करता है। घुटने के दर्द वाले हर एक व्यक्ति के लिए पीछे चलना सेफ नहीं हो सकता है। वहीं सबसे बड़ी चिंता की बात सुरक्षा होती है, क्योंकि पीछे चलते समय सामने का दिखता है। जिससे फिसलन या गिरने का खतरा बढ़ जाता है।

इसलिए इसको सीढ़ियों, सड़क या असमान सतह पर करना सुरक्षित नहीं माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति इसको करना चाहता है, तो इसको एक्सपर्ट की देखरेख में किसी सुरक्षित, सपाट जगह या ट्रे़डमिल पर शुरुआत करनी चाहिए। शुरूआत सिर्फ कुछ मिनटों से करना चाहिए और धीरे-धीरे समय बढ़ाना चाहिए। अगर इसको शरीर आराम से सहन करे।

बैकवर्ड वॉकिंग को सिर्फ एक सपोर्टिव एक्सरसाइज के रूप में समझना चाहिए। न कि इसको घुटने के दर्द का पूरा इलाज मानना चाहिए। घुटने के दर्द की कई वजह बन सकती है। जैसे वेट ज्यादा होना, मसल्स की कमजोरी, जोड़ में घिसाव या उम्र से जुड़ी समस्या होना आदि। इसलिए इसका इलाज सिर्फ एक्सरसाइज से नहीं हो सकता है। बेहतर रिजल्ट पाने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, वेट कंट्रोल, फ्लेक्सिबिलिटी और सही लाइफस्टाइल में बदलाव होना जरूरी है।

एक स्टडी से पता चलता है कि घुटने के गठिया और घुटने के दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए पीछे की तरफ चलना या दौड़ना काफी फायदेमंद होता है। सीधे चलने की तुलना में उल्टा चलना घुटने के जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जिससे दर्द में आराम मिलता है। इसके अलावा यह एक्सरसाइज घुटने को सहारा देने वाली वाली क्वाड्रिसेप्स मांसपेशियों को भी मजबूत करती है। साथ ही इससे घुटनों की कार्यक्षमता में सुधार होता है। इसलिए यह घुटनों की सेहत के लिए एक बेहतरीन एक्सरसाइज है।

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  Sports

विराट कोहली का कवर ड्राइव, रोहित शर्मा का पुल... टीम इंडिया को मिल गया अगला नंबर-3? कौन हैं 21 साल के शेख रशीद?

Who is Shaik Rasheed: भारतीय क्रिकेट टीम इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है. खासतौर पर रेड बॉल क्रिकेट में विराट कोहली और रोहित शर्मा के संन्यास के बाद उनकी जगह की तलाश की जा रही है. ऐसे में 21 साल के शेख रशीद ने दावा किया है कि वह टीम इंडिया में विराट और रोहित की जगह लेने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं और उन्हें बस एक मौके का इंतजार है. इसके साथ रशीद को टीम इंडिया में नंबर-3 का दावेदार भी कहा जा रहा है. Sun, 30 Aug 2026 09:28:09 +0530

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