ISRO में निकली 176 पदों पर भर्ती, इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए मौका; जानें योग्यता
नोटिफिकेशन के मुताबिक, भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की है। इस भर्ती अभियान के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल और कंप्यूटर साइंस विषयों में कुल 176 पद भरे जाएंगे।
Explainer: आखिर कब पटरी पर लौटेगा नेपाल? अर्थव्यवस्था पर बाढ़ की बड़ी मार, पुनर्निर्माण में इकोनॉमी के 10वें हिस्से जितना खर्च
Nepal Floods: ग्लेशियर टूटने के बाद नेपाल में आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े इलाके में भारी तबाही मचाई है. नेपाल में लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है. अब भारत समेत 4 देशों को नेपाल में रेस्क्यू ऑपरेशन और शवों की पहचान के लिए बुलाया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि नेपाल में हालात कब सामान्य होंगे और बाढ़ से हुए नुकसान को कवर में कितना खर्चा आएगा.
नेपाल में गत 26 अगस्त की सुबह एक भीषण और विनाशकारी अचानक आई बाढ़ (Flash Flood) ने भारी तबाही मचाई है. इस आपदा में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में पानी का स्तर अचानक कई मीटर ऊपर उठ गया, जिससे रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जैसे कई जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. इस आपदा में अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,400 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. सबसे ज्यादा असर नेपाल-चीन सीमा के आसपास के इलाकों में हुआ है. लापता लोगों में 178 भारतीय नागरिकों समेत कई विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं.
VIDEO | Devighat, Nuwakot: The District Ayurveda Health Centre in Devighat is serving as a relief and treatment centre for flood-affected residents following devastating flash floods in Nepal.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 29, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/d8jp61yd2p) pic.twitter.com/wK2LVLwGfh
कई सड़कें और पुल बहे
बाढ़ के तेज बहाव में कई सड़कें और पुल बह गए हैं. कई स्कूलों को भी नुकसान पहुंचा है. रसुवा को काठमांडू से जोड़ने वाला एक प्रमुख पुल टूट जाने से राजधानी से संपर्क भी प्रभावित हुआ है. इससे राहत और बचाव टीमों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है. बड़ी संख्या में शव मिलने के बाद अस्पतालों और मुर्दाघरों पर भी दबाव बढ़ गया है. भरतपुर अस्पताल समेत कई जगहों पर शव रखने की जगह कम पड़ने की स्थिति बन गई है. फिलहाल राहत और बचाव टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं. प्रभावित इलाकों में सड़क और पुल संपर्क बहाल करना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है.
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पुनर्निर्माण में लगेंगे 4-5 अरब डॉलर
नेपाल में इस सप्ताह आई भयंकर बाढ़ ने देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अब सरकार का शुरुआती अनुमान है कि सड़कों, पुलों, बिजली परियोजनाओं और दूसरे बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने में 4 से 5 अरब डॉलर खर्च हो सकते हैं. यह रकम नेपाल की पूरी अर्थव्यवस्था के करीब 10 फीसदी के बराबर है. नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने बताया कि यह अभी शुरुआती अनुमान है. नुकसान और आर्थिक प्रभाव का पूरा आकलन अभी किया जा रहा है.
बुधवार को ग्लेशियर टूटने के बाद पहाड़ी नदियों में अचानक भारी मात्रा में पानी, पत्थर, बर्फ और मलबा आ गया. इससे नेपाल के साथ-साथ चीन के तिब्बत के कुछ इलाकों में भी भारी तबाही हुई. 600 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि 2,000 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं.
बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान
बाढ़ से सीमावर्ती इलाकों के कई कस्बे प्रभावित हुए हैं. बड़ी संख्या में सड़कें और पुल बह गए हैं, जिससे कई इलाकों का संपर्क टूट गया है. इसके अलावा कई बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है. यह नुकसान नेपाल के लिए इसलिए भी गंभीर है क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था में पर्यटन, रेमिटेंस और जलविद्युत की बड़ी भूमिका है. बाढ़ से प्रभावित बिजली परियोजनाएं देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता के 12 फीसदी से ज्यादा हिस्से से जुड़ी हैं.
2015 के भूकंप से कम होगा खर्च
सरकार का अनुमान है कि इस बार पुनर्निर्माण पर 4-5 अरब डॉलर खर्च हो सकते हैं. यह रकम 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद हुए करीब 9 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण खर्च से कम है. साल 2015 के 7.8 तीव्रता वाले भूकंप में करीब 9,000 लोगों की मौत हुई थी और 5 लाख से ज्यादा घर तबाह हो गए थे. उस आपदा से नेपाल की अर्थव्यवस्था का करीब एक-तिहाई हिस्सा प्रभावित हुआ था.
हालांकि, इस बार नुकसान का पूरा आंकड़ा सामने आने में अभी समय लगेगा. सरकार अलग-अलग इलाकों में हुए नुकसान का आकलन कर रही है. इसके बाद ही यह साफ होगा कि नेपाल को पुनर्निर्माण के लिए वास्तव में कितनी रकम की जरूरत पड़ेगी. फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने के साथ-साथ पर्यटन, बिजली और दूसरे आर्थिक क्षेत्रों को जल्द से जल्द पटरी पर लाना है.
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कब तक पटरी पर लौटेगी जीवन?
जनजीवन की बात करें तो कुछ ही हफ्तों में मलबा साफ होने के बाद जनजीवन सामान्य हो सकता है लेकिन नुकसान की भरपाई नेपाल के लिए आसान नहीं होगी. नेपाल में हालिया बाढ़ और भूस्खलन ने सड़क, पुल, संचार और जलविद्युत जैसी जरूरी सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है. शुरुआती राहत और जरूरी सेवाओं को बहाल करने में हफ्ते या कुछ महीने लग सकते हैं. हालांकि, जिन इलाकों में सबसे ज्यादा तबाही हुई है, वहां पूरी तरह से पुनर्निर्माण और सामान्य स्थिति लौटने में कई साल लग सकते हैं. कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक, बेहद प्रभावित पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों को दोबारा व्यवस्थित करने में 20 से 25 साल तक का समय लग सकता है.
2015 की आपदा से उभरने में थे 5 साल
इतिहास की बात करें तो साल 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद नेपाल को पूरी तरह संभलने में कई साल लगे थे. देश की अर्थव्यवस्था को सामान्य स्थिति में आने में करीब 3 साल लगे, जबकि ज्यादातर पुनर्निर्माण कार्य लगभग 5 साल तक चले. करीब 4 साल में 90% लोग अपने घरों में लौट आए थे. वहीं सड़क, सरकारी भवन और दूसरे बुनियादी ढांचे की मरम्मत और पुनर्निर्माण में करीब 5 साल लगे. हालांकि, भूकंप के 10 साल बाद भी कुछ दूरदराज और संवेदनशील इलाकों में उसके असर बने रहे. ऐसे में मौजूदा बाढ़ के बाद नेपाल के सामने एक बार फिर लंबे पुनर्निर्माण की चुनौती खड़ी हो गई है.
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