मुंबई हाई कोर्ट में दिशा साल्यान मामले की जांच से जुड़ी याचिका पर अहम सुनवाई हुई। जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस भोसले की बेंच ने मामले से जुड़े कई सवालों पर सरकारी पक्ष से जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान अदालत ने दिशा के शव की स्थिति, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटना स्थल से जुड़े सबूतों पर गंभीर सवाल उठा दिए। लोक अभियोजक शिशिर इहरे ने अदालत को बताया कि अस्पताल में तैयार किए गए पंचनामा में दिशा के शव पर कपड़े नहीं होने का जिक्र था। जिस पर अदालत ने पूछा कि कपड़े किसने हटाए और उससे जुड़े डॉक्टर का बयान क्यों दर्ज नहीं किया गया। हालांकि सरकारी पक्ष ने साफ किया कि यह घटना स्थल नहीं बल्कि अस्पताल का पंचनामा था। अदालत ने साफ कहा कि वह फिलहाल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहते। कोर्ट के मुताबिक इस स्तर पर मर्डर या रेप की पुष्टि करना जरूरी नहीं बल्कि यह देखना महत्वपूर्ण है क्या जांच में संदेह पैदा करने वाली कोई परिस्थिति मौजूद है। सरकारी अभियोजकों ने अस्पताल से ली गई तस्वीरें भी पेश कर दी। तस्वीरों को देखकर अदालत ने चोटों को लेकर सवाल कर दिया। सरकारी पक्ष ने बताया कि ऊंचाई से गिरने के कारण दिशा के चेहरे, खोपड़ी और जबड़े में गंभीर चोटें आई थी। वहीं जांच में यौन उत्पीड़न के कोई संकेत नहीं मिलने का दावा किया गया। सरकारी पक्ष ने दिशा के पिता सतीश साल्यान, मां बसंती साल्यान और प्रेमी रोहन राय के बयानों का भी हवाला दिया।
आदित्य ठाकरे की ओर से सुदीप पसबोला ने रखा पक्ष
आदित्य ठाकरे के वकील सुदीप पसबोला ने याचिका के पीछे राजनीतिक मकसद होने का आरोप लगाया और कहा कि बेटी की जान के मामले पर राजनीति बंद होनी चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद मुंबई हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। लेकिन दिशा के मामले में जिस तरह से जज ने सवाल उठाए उससे साफ है कि आदित्य ठाकरे की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कोर्ट ने आदित्य के खिलाफ कोर्ट में हाजिर होने तक का नोटिस जारी करने की बात कही है। यानी अदालत अभी इस पूरे मामले में जो जांच हुई है और जो सबूत पेश किए गए हैं उससे सेटिस्फाइड नहीं है। जिससे साफ़ है कि दिशा साल्यान के मामले में कोर्ट अब एक और बड़ा यहां पर कह सकते हैं इस मामले में चौंकाने वाला खुलासा हो सकता है या इस मामले में नया मोड़ आ सकता है।
दिशा के पिता और परिवार से पूरी सहानुभूति है, लेकिन…
बहस के दौरान आदित्य ठाकरे की ओर से उनके वकील ने दिशा सालियन के परिवार को लेकर भी अपनी बात रखी। पसबोला ने कहा कि दिशा के पिता और उनके परिवार के प्रति उन्हें पूरी सहानुभूति और संवेदना है। उन्होंने अदालत से कहा कि परिवार को इस मामले को खत्म करने का अधिकार मिलना चाहिए। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी दलील दी कि एक युवा लड़की की दुर्भाग्यपूर्ण मौत को लेकर जिस तरह की राजनीति की जा रही है, उस पर अब कहीं न कहीं विराम लगना चाहिए। यानी आदित्य ठाकरे की ओर से अदालत में एक तरफ दिशा सालियन के परिवार के प्रति संवेदना जताई गई, तो दूसरी तरफ इस मामले को लेकर हो रही कथित राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाया गया।
हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार
दिशा सालियन की मौत की जांच से संबंधित याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। ऐसे में अब इस मामले में अदालत के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। फिलहाल, सुनवाई के दौरान आदित्य ठाकरे की ओर से मुख्य जोर इस बात पर रहा कि याचिका कानूनी और तथ्यात्मक आधार पर टिकाऊ नहीं है और दिशा सालियन की मौत को राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।
Continue reading on the app
पंजाबी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मंजीत कौर की यहां एक सरकारी अस्पताल में मौत हो गई। करीब दो महीने पहले कथित तौर पर मारपीट करने के बाद उन्हें आग के हवाले कर दिया गया था। पुलिस ने शनिवार को बताया कि 28 वर्षीय कौर की 26 अगस्त को यहां स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) में इलाज के दौरान मौत हो गई।
उनकी मां की शिकायत के अनुसार, मंजीत कौर को तीन जुलाई को उनके दो परिचितों - शुभी और पिंडा - ने सेक्टर-34 में शराब की एक दुकान के पास बुलाया और कथित तौर पर उनका अपहरण कर लिया। शिकायत में कहा गया है कि मंजीत को पंजाब के मोरिंडा ले जाया गया, जहां उनके साथ मारपीट की गई, पेड़ से बांधा गया और आग लगा दी गई। मंजीत के एक दोस्त ने मौके पर पहुंचकर कंबल की मदद से आग बुझाई और उन्हें मोरिंडा के एक अस्पताल ले गया।
बाद में उन्हें मोहाली के एक निजी अस्पताल और फिर चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर ले जाया गया। पीड़िता की मां ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी पांच अगस्त को होश में आ गई थी, लेकिन मोहाली की खरड़ पुलिस को बयान दर्ज करने के लिए सूचना देने के बावजूद पुलिस वहां नहीं पहुंची। हालांकि, पुलिस ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उसने परिवार को पूरा सहयोग दिया था।
पुलिस ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) (हत्या) और 140 (1) (अपहरण) समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। चंडीगढ़ के दक्षिणी क्षेत्र की पुलिस उपाधीक्षक गुरजीत कौर ने कहा कि मामले की जांच जारी है और हमलावरों का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस घटना के पीछे के लोगों का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।
साथ ही, कथित अपहरण से जुड़ी परिस्थितियों का भी पता लगाया जा रहा है। हत्या के पीछे का कारण अभी पता नहीं चल पाया है। मंजीत कौर के इंस्टाग्राम पर करीब 1.46 लाख फॉलोअर थे।
वह पंजाबी और हरियाणवी गानों पर वीडियो पोस्ट करती थीं।
Continue reading on the app