बिहार सरकार ने मौजूदा शैक्षणिक सत्र से 10वीं और 12वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षाओं के विद्यार्थियों के अंकपत्र में ‘अनुर्तीण’ शब्द की जगह ‘कौशल प्रशिक्षण के लिए योग्य’ वाक्यांश का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि इस कदम का मकसद विद्यार्थियों को बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड द्वारा चलाए जा रहे व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम करने में मदद करना है।
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘शिक्षा विभाग इस बदलाव को लागू करने के लिए नियमों में संशोधन करेगा। विभाग जल्द ही बीएसईबी को जरूरी निर्देश जारी करेगा। प्रमाणपत्र पर ‘अनुर्तीण’ के बजाय ‘कौशल विकास के लिए योग्य’ लिखा होगा।’’
तिवारी ने कहा कि सिर्फ इसलिए विद्यार्थियों का हुनर खत्म नहीं हो जाता कि वे परीक्षा में उम्मीद के मुताबिक नंबर नहीं ला पाते।
उन्होंने कहा,‘‘10वीं कक्षा की बोर्ड पूरक परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को तैयारी करने और उनके सफल होने की संभावनाओं को बेहतर बनाने में मदद के लिए एक महीने का विशेष सत्र दिया जाएगा।’’
तिवारी ने कहा कि यह पहल उन व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, जिनका मकसद परीक्षा में असफल रहने के बाद विद्यार्थियों को सुधारात्मक सहायता देना और उन्हें पिछड़ने से बचाना है। अधिकारियों ने बताया कि बिहार सरकार विद्यार्थियों को पारंपरिक पाठ्यपुस्तक-आधारित पढ़ाई से हटकर अन्य गतिविधियों से भी परिचित कराने के लिए कदम उठा रही है। हाल में उठाए गए कदमों में से एक है सरकारी स्कूलों में शनिवार को नो-बैग डे लागू करना।
छह अगस्त को घोषित इस व्यवस्था के तहत, सरकारी स्कूल शनिवार को सुबह 9.30 बजे से दोपहर एक बजे तक चलेंगे, जबकि सोमवार से शुक्रवार तक वे सुबह 9.30 बजे से शाम 4 बजे तक चलेंगे।
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अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में शनिवार को समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने 'PDA' का ज़िक्र किया। PDA यानी पिछड़े (backward), दलित और अल्पसंख्यक समाजवादी पार्टी का राजनीतिक आधार रहे हैं। अखिलेश ने X पर एक पोस्ट में इसे धैर्य, अनुशासन और कार्रवाई (Patience, Discipline, Action) के तौर पर नए सिरे से परिभाषित किया और सामाजिक एकता का आह्वान किया।
X पर शेयर किए गए एक ग्राफ़िक में, अखिलेश ने धैर्य, अनुशासन और कार्रवाई को सफलता की तीन कुंजियाँ बताया। उन्होंने लिखा कि PDA की सकारात्मक राजनीति का सुखद परिणाम यह है कि लोग खुद PDA को अलग-अलग सकारात्मक रूपों में परिभाषित कर रहे हैं। सकारात्मकता से सद्भाव पैदा होता है और सद्भाव से सामाजिक एकता आती है, जो देश को 'प्यार, करुणा और अपनापन' के भाव से जोड़ती है और प्रगति व समृद्धि का नया रास्ता बनाती है।
अखिलेश यादव ने कई मौकों पर PDA आंदोलन का आह्वान किया है और BJP सरकार पर पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। 22 अगस्त को एक सभा में समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा कि हमारा लक्ष्य समाजवादी विचारधारा और PDA आंदोलन के ज़रिए सामाजिक न्याय स्थापित करने वाली सरकार बनाना है। हालांकि, ऊंची जाति के वोटरों को लुभाने की कोशिश में अखिलेश ने हाल ही में कहा कि PDA में नाराज़ पंडित भी शामिल हैं।
5 अगस्त को समाजवादी पार्टी के दिवंगत नेता जनेश्वर मिश्र की जयंती पर अखिलेश ने कहा कि जब से BJP लोकसभा चुनाव में PDA से हारी है, वे PDA की तरह-तरह की परिभाषाएं बना रहे हैं। लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि PDA का मतलब 'पीड़ित पंडित' है। BJP जितना ज़्यादा दर्द देगी और जितनी ज़्यादा तकलीफ़ बढ़ाएगी, PDA उतना ही मज़बूत होगा। अगले साल उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं, जिसमें समाजवादी पार्टी लगातार दो हार के बाद वापसी की उम्मीद कर रही है। 2022 में, SP ने 403 में से 111 सीटें जीती थीं, जबकि BJP ने 255 सीटें जीतकर चुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी। हालांकि, पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों को दोहराने की कोशिश करेगी, जिसमें उसने 80 में से 37 सीटें जीती थीं - जो BJP से चार ज़्यादा थीं।
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