पेंशनर्स के लिए काम की गाइड:पेंशन रुकने पर न हों परेशान; जानें 5 समस्याएं और उनका समाधान
रिटायरमेंट के बाद पेंशन सिर्फ हर महीने मिलने वाली राशि नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक सुरक्षा होती है। लेकिन पेंशन रुक जाए, जीवन प्रमाण-पत्र जमा न हो पाए, फैमिली पेंशन शुरू न हो, बैंक बार-बार दौड़ाए या राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) और एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को लेकर भ्रम हो जाए, तो अधिकांश पेंशनर्स समझ नहीं पाते कि किस कार्यालय या सरकारी व्यवस्था में जाएं। यहां जानिए पेंशन से जुड़ी 5 सबसे बड़ी परेशानियां और उनका कैसे समाधान मिलेगा। 1. सबसे पहले जानिए किस समस्या के लिए कहां जाएं गलत कार्यालय पहुंचना पेंशनधारकों की सबसे आम गलती होती है। सही जगह जाने से समय और परेशानी दोनों से बचते हैं। पेंशन रुकी: →बैंक और CPENGRAMS में जाएं। जीवन प्रमाण पत्र: →सीएससी/बैंक या डाकघर। एनपीएस: पेंशन निधि विनियामक विकास प्राधिकरण। ईपीएस-95: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन। रक्षा पेंशन: → स्पर्श (SPARSH) में संपर्क करें। बैंक की शिकायत: →पहले बैंक फिर आरबीआई की एकीकृत लोकपाल व्यवस्था में जा सकते हैं। 2. पेंशन रुकी, देर से आई या गलत कटौती हुई तो... यदि आपकी मासिक पेंशन रुक गई है, देर से आ रही है या बैंक ने गलत कटौती कर दी है, तो सबसे पहले संबंधित बैंक शाखा या पेंशन वितरण कार्यालय में लिखित शिकायत करें। अधिकांश मामलों का समाधान यहीं हो जाता है। क्या करें - समाधान नहीं मिलने पर केंद्रीकृत पेंशन शिकायत निवारण व निगरानी प्रणाली (CPENGRAMS) में ऑनलाइन शिकायत करें। यहां पर अपना पीपीओ नंबर, बैंक विवरण और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। 3. जीवन प्रमाण-पत्र जमा करने के लिए कहां जाएं अधिक उम्र, बीमारी या चलने-फिरने में परेशानी होने पर अब बैंक जाने की जरूरत नहीं है। सरकार ने डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई है। आप अपने घर पर बैठकर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। क्या करें: मोबाइल पर जीवन प्रमाण एप और फेस अथेंटिकेशन की मदद से यह सर्टिफिकेट ऑनलाइन तैयार कर जमा किया जा सकता है। यदि स्मार्टफोन चलाना कठिन लगता है तो सीएससी या बैंक मित्र की मदद ले सकते हैं। 4. फैमिली पेंशन शुरू नहीं हो रही या बैंक बदलना है... मृत्यु, विवाह प्रमाण-पत्र, आश्रित का आधार, पैन नंबर व बैंक खाता विवरण, मृतक का पीपीओ नंबर,नामांकन फॉर्म आदि दस्तावेज तैयार रखें। फिर संबंधित विभाग या बैंक में आवेदन दें। देरी होने पर निर्धारित शिकायत व्यवस्था का उपयोग करें। क्या करें? : दोनों तरह के मामले में पीपीओ नंबर व आधार सबसे महत्वपूर्ण हैं। देरी होने पर एल्डर 14567 या संबंधित विभाग या बैंक की हेल्पलाइन पर कॉल करें। पीपीओ नंबर सहित अन्य जानकारी के साथ शिकायत दर्ज कराएं। 5. NPS, UPS या APY समझ में नहीं आ रही... राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली, एकीकृत पेंशन योजना या अटल पेंशन योजना (एपीवाय) से जुड़े मामलों में पेंशन निधि विनियामक-विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के एआई चैटबॉट PFRDA पेंशन सहायक से सवाल पूछ सकते हैं। क्या करें? : PFRDA हेल्पलाइन 1800110708 पर सोमवार से शुक्रवार सुबह 9.30 से शाम 5.30 बजे के बीच बात कर सकते हैं। ईमेल: complaints@pfrda.org.in या वेबसाइट: www.pfrda.org.in →पर परेशानी बताएं। (एक्सपर्ट- डॉ. मनजीत सिंह पटेल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलाइज फेडरेशन ∙ एससी जैन, जनरल सेक्रेटरी, एआईबीआरए)
इलेक्ट्रिक की जगह हाइब्रिड प्लेन का दौर क्यों शुरू:विमानों की भारी बैटरियां बनीं अड़चन; कम लागत और लंबी दूरी के लिए हाइब्रिड तकनीक बेहतर
वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 2.5% की हिस्सेदारी रखने वाला एविएशन सेक्टर बड़े बदलाव से गुजर रहा है। पायलट ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल हो रहे पिपिस्ट्रेल के इलेक्ट्रिक प्लेन ‘वेलिस इलेक्ट्रो’ ने कम मेंटेनेंस लागत और जीरो कार्बन उत्सर्जन से उम्मीदें तो जगाई हैं, लेकिन सीमित रेंज और भारी बैटरियों की चुनौती के कारण अब इस इंडस्ट्री का मुख्य फोकस ‘हाइब्रिड टेक्नोलॉजी’ पर शिफ्ट हो रहा है। लंदन के फार्नबोरो एयर शो में आई एविएशन कंपनियों का इस नए ट्रेंड पर फोकस रहा। अमेरिकी समूह ‘टेक्स्ट्रॉन’ के स्वामित्व वाली पिपिस्ट्रेल का यह विमान आपातकालीन समय को छोड़कर अधिकतम 50 मिनट ही उड़ सकता है। सीमित रेंज के बावजूद फ्लाइंग स्कूलों के बीच इसकी मांग बढ़ रही है। ‘नेबोएयर’ जैसी कंपनियां चार्जिंग स्टेशन का नेटवर्क विकसित कर रही हैं। ऑटो इंडस्ट्री में हो रहे सुधारों से भविष्य में रेंज बढ़ाने के लिए इसकी बैटरियों को नए वर्जन से बदला जा सकेगा। हालांकि, बड़ी संख्या में यात्रियों को लंबी दूरी तक ले जाने के लिए बैटरियों का पर्याप्त शक्तिशाली या हल्का होना असंभव है। ऐसे में इंडस्ट्री का फोकस हाइब्रिड प्लेन की तरफ झुक रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक पूरी तरह इलेक्ट्रिक प्लेन के मुकाबले हाइब्रिड मॉडल कमर्शियल एविएशन के लिए अधिक व्यावहारिक हैं। हार्ट एयरोस्पेस और जीई-नासा जैसे दिग्गज अब टर्बोप्रॉप और इलेक्ट्रिक मोटर के संयोजन पर काम कर रहे हैं। इससे क्षेत्रीय उड़ानों में ईंधन खपत व परिचालन लागत 40% तक घट सकती है। कैलिफोर्नियाई कंपनी ने बनाया 30 सीटों वाला हाइब्रिड प्लेन - हार्ट एयरोस्पेस - कैलिफोर्निया की यह कंपनी 30 सीटों वाला हाइब्रिड विमान बना रही है। यह बैटरी पर 200 किमी और हाइब्रिड मोड में 800 किमी उड़ सकता है। इसमें सीरीज हाइब्रिड सेटअप है, जहां प्रोपेलर हमेशा इलेक्ट्रिक मोटर से घूमते हैं और गैस टर्बाइन जनरेटर के रूप में बिजली देता है। ईंधन की खपत 50% तक घट सकती है। - जीई एयरोस्पेस और नासा - नासा और जीई एयरोस्पेस ने ‘फार्नबोरो इंटरनेशनल एयर शो’ के दौरान हाइब्रिड इंजन साब 340बी उड़ान का सफल प्रदर्शन किया। हालिया परीक्षणों के दौरान यह 30,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर उड़ान भरने वाला दुनिया का पहला हाइब्रिड इलेक्ट्रिक-पावर्ड विमान बन चुका है। वर्टिकल टेक- ऑफ और लैंडिंग करने वाले इलेक्ट्रिक क्राफ्ट अब एयर टैक्सी और हेलीकॉप्टर के विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। वर्टिकल एयरोस्पेस ने इनकी रेंज बढ़ाने के लिए हाइब्रिड मॉडल पर काम शुरू कर दिया। इलेक्ट्रिक प्लेन आपात स्थिति में ज्यादा देर नहीं उड़ सकते पारंपरिक विमान उड़ते समय ईंधन जलने से हल्के होते जाते हैं, जबकि बैटरी का वजन हमेशा एक समान बना रहता है। साथ ही, हवाई नियमों के तहत रनवे उपलब्ध न होने या डायवर्जन की स्थिति के लिए अतिरिक्त ईंधन रखना अनिवार्य है। यदि किसी छोटे पैसेंजर विमान को भी कई घंटों के लिए उड़ाना हो, तो आवश्यक बैटरी इतनी भारी होगी कि यात्रियों या सामान के लिए जगह ही नहीं बचेगी। यही इलेक्ट्रिक विमानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में उद्योग अब हाइब्रिड विमानों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसमें इलेक्ट्रिक मोटर और गैस टर्बाइन इंजन दोनों का उपयोग होता है।
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