Suji Potato Bites: सूजी पोटैटो बाइट्स बच्चे खूब पसंद करेंगे, चाय के साथ लें क्रिस्पी और टेस्टी स्नैक का मज़ा
Suji Potato Bites: शाम की चाय के साथ कुछ ऐसा खाने का मन हो जो स्वादिष्ट भी हो और बनाने में ज्यादा मेहनत भी न लगे, तो सूजी पोटैटो बाइट्स एक बढ़िया विकल्प हो सकता है। सूजी और आलू से तैयार होने वाला यह स्नैक बाहर से क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट रहता है। खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती। घर में मौजूद कुछ बेसिक चीजों से ही इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है।
अगर रोज-रोज पकौड़े, समोसे या नमकीन खाकर बोर हो चुके हैं, तो सूजी पोटैटो बाइट्स ट्राई किए जा सकते हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक को इनका स्वाद पसंद आ सकता है। इसे शाम की चाय के साथ सर्व करने के अलावा पार्टी या छोटे गेट-टुगेदर में भी स्नैक के तौर पर परोसा जा सकता है। तो आइए जानते हैं सूजी पोटैटो बाइट्स बनाने की आसान रेसिपी।
सूजी पोटैटो बाइट्स बनाने के लिए सामग्री
- सूजी - 1 कप
- उबले हुए आलू - 2
- दही - 2 बड़े चम्मच
- प्याज - 1 बारीक कटा हुआ
- हरी मिर्च - 1-2 बारीक कटी हुई
- हरा धनिया - 2 बड़े चम्मच
- लाल मिर्च पाउडर - 1/2 छोटा चम्मच
- चाट मसाला - 1/2 छोटा चम्मच
- नमक - स्वादानुसार
- पानी - जरूरत के अनुसार
- तेल - तलने के लिए
सूजी पोटैटो बाइट्स बनाने का तरीका
पहला स्टेप: बैटर तैयार करें
सबसे पहले एक बड़े बाउल में सूजी और दही डालें। इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए गाढ़ा बैटर तैयार करें। बैटर को करीब 10 मिनट के लिए ढककर रख दें, ताकि सूजी अच्छी तरह फूल जाए। इसके बाद इसमें उबले और मैश किए हुए आलू डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
दूसरा स्टेप: मसाले मिलाएं
अब मिश्रण में बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च और हरा धनिया डालें। इसके बाद लाल मिर्च पाउडर, चाट मसाला और नमक मिलाएं। सभी चीजों को अच्छी तरह मिक्स करके ऐसा मिश्रण तैयार करें, जिसे आसानी से आकार दिया जा सके। अगर मिश्रण बहुत पतला लगे तो इसमें थोड़ी सूजी मिलाई जा सकती है।
तीसरा स्टेप: बाइट्स का आकार दें
हाथों पर हल्का तेल लगाएं और मिश्रण का थोड़ा हिस्सा लेकर छोटी-छोटी बॉल या बाइट्स का आकार दें। सभी बाइट्स को लगभग एक जैसा रखें, ताकि वे पकाते समय समान रूप से तैयार हों। अगर चाहें तो इन्हें हल्का चपटा आकार भी दिया जा सकता है।
चौथा स्टेप: सुनहरा और क्रिस्पी होने तक पकाएं
कड़ाही में तेल गर्म करें। तेल मध्यम गर्म होने पर तैयार बाइट्स को सावधानी से डालें। इन्हें मध्यम आंच पर पलट-पलटकर सुनहरा और क्रिस्पी होने तक तलें। बहुत तेज आंच पर तलने से बाहर की परत जल्दी ब्राउन हो सकती है, जबकि अंदर का हिस्सा अच्छी तरह पक नहीं पाएगा। तैयार बाइट्स को पेपर टॉवल पर निकाल लें।
चटनी के साथ करें सर्व
गरमा-गरम सूजी पोटैटो बाइट्स को हरी धनिया-पुदीना चटनी, टोमैटो सॉस या अपनी पसंद की डिप के साथ सर्व करें। ज्यादा स्वाद के लिए ऊपर से थोड़ा चाट मसाला भी छिड़का जा सकता है। यह रेसिपी बच्चों के टिफिन या छोटी घरेलू पार्टी के लिए भी एक आसान स्नैक विकल्प बन सकती है।
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लेखक: (कीर्ति)
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Saunf Mishri: लंच-डिनर के बाद जरूर खाएं सौंफ-मिश्री! पाचन से लेकर मुंह की ताजगी तक मिलेंगे ये 6 फायदे
Saunf Mishri Ke Fayde: खाना खाने के बाद सौंफ-मिश्री का सेवन भारतीय घरों में काफी आम है। भोजन के बाद थोड़ी-सी सौंफ और मिश्री मुंह का स्वाद बदलने के साथ ताजगी का अहसास कराती है। यही वजह है कि इसे कई लोग माउथ फ्रेशनर के तौर पर खाते हैं। लेकिन सौंफ में मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिकों के कारण इसका पारंपरिक रूप से पाचन और पेट से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियों में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है।
सौंफ और मिश्री का कॉम्बिनेशन स्वाद में भी अच्छा लगता है, लेकिन इसे किसी बीमारी का इलाज समझना सही नहीं है। खासकर मिश्री में शुगर होती है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर है। आइए जानते हैं सौंफ-मिश्री के सेवन से जुड़े 6 संभावित फायदे और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
सौंफ मिश्री खाने के 6 बड़े लाभ
पाचन को बेहतर रखने में मदद
भोजन के बाद थोड़ी सौंफ खाने की परंपरा काफी पुरानी है। सौंफ में मौजूद वाष्पशील तेल पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इससे खाना खाने के बाद होने वाली भारीपन या असहजता में कुछ लोगों को राहत महसूस हो सकती है। हालांकि, लगातार अपच, पेट दर्द या एसिडिटी रहती है तो केवल सौंफ-मिश्री पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
मुंह की दुर्गंध से राहत
सौंफ की खुशबू और उसका स्वाद मुंह को फ्रेश महसूस करा सकता है। भोजन के बाद सौंफ चबाने से कुछ समय के लिए सांसों की दुर्गंध कम करने में मदद मिल सकती है। मिश्री इसका स्वाद हल्का मीठा कर देती है। हालांकि, अगर मुंह से लगातार दुर्गंध आती है तो दांतों और मसूड़ों की सफाई के साथ डेंटल चेकअप भी जरूरी हो सकता है।
पेट फूलने की समस्या में उपयोगी
कुछ लोगों को खाना खाने के बाद गैस या पेट फूलने की शिकायत होती है। सौंफ का पारंपरिक रूप से गैस और पेट की असहजता कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। भोजन के बाद थोड़ी मात्रा में सौंफ चबाना ऐसे लोगों को आराम दे सकता है। अगर पेट फूलने की समस्या बार-बार होती है, तो इसके पीछे खान-पान या कोई अन्य कारण हो सकता है।
मुंह का स्वाद बदलने में मददगार
लंबे समय तक एक जैसा स्वाद रहने या भोजन के बाद मुंह में मसालों की गंध महसूस होने पर सौंफ-मिश्री अच्छा विकल्प हो सकता है। सौंफ की प्राकृतिक सुगंध और मिश्री की मिठास मुंह का स्वाद बदल देती है। यही कारण है कि कई भारतीय रेस्तरां में भोजन के बाद सौंफ परोसी जाती है।
ताजगी का अहसास देती है
सौंफ को चबाने से मुंह में ताजगी और ठंडक जैसा अनुभव हो सकता है। खासकर मसालेदार या भारी भोजन के बाद इसका सेवन कई लोगों को अच्छा लगता है। हालांकि, यह शरीर को वास्तविक रूप से ठंडा करने या किसी बीमारी से बचाने का प्रमाणित उपचार नहीं है।
एंटी-ऑक्सीडेंट यौगिकों का स्रोत
सौंफ में विभिन्न पौधों से मिलने वाले जैव-सक्रिय यौगिक और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव से निपटने में भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन इसके लिए केवल सौंफ-मिश्री को पर्याप्त नहीं माना जा सकता। संतुलित आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी शामिल करना जरूरी है।
मिश्री खाते समय रखें खास ध्यान
सौंफ अपेक्षाकृत कम कैलोरी वाला मसाला है, लेकिन मिश्री मूल रूप से चीनी ही है। इसलिए ज्यादा मात्रा में सौंफ-मिश्री खाना उचित नहीं है। खासकर डायबिटीज या ब्लड शुगर की समस्या वाले लोगों को मिश्री का सेवन सीमित रखना चाहिए। इसे पाचन संबंधी समस्याओं का इलाज मानने के बजाय एक पारंपरिक माउथ फ्रेशनर के रूप में लेना ज्यादा उचित है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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