Saunf Mishri: लंच-डिनर के बाद जरूर खाएं सौंफ-मिश्री! पाचन से लेकर मुंह की ताजगी तक मिलेंगे ये 6 फायदे
Saunf Mishri Ke Fayde: खाना खाने के बाद सौंफ-मिश्री का सेवन भारतीय घरों में काफी आम है। भोजन के बाद थोड़ी-सी सौंफ और मिश्री मुंह का स्वाद बदलने के साथ ताजगी का अहसास कराती है। यही वजह है कि इसे कई लोग माउथ फ्रेशनर के तौर पर खाते हैं। लेकिन सौंफ में मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिकों के कारण इसका पारंपरिक रूप से पाचन और पेट से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियों में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है।
सौंफ और मिश्री का कॉम्बिनेशन स्वाद में भी अच्छा लगता है, लेकिन इसे किसी बीमारी का इलाज समझना सही नहीं है। खासकर मिश्री में शुगर होती है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर है। आइए जानते हैं सौंफ-मिश्री के सेवन से जुड़े 6 संभावित फायदे और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
सौंफ मिश्री खाने के 6 बड़े लाभ
पाचन को बेहतर रखने में मदद
भोजन के बाद थोड़ी सौंफ खाने की परंपरा काफी पुरानी है। सौंफ में मौजूद वाष्पशील तेल पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इससे खाना खाने के बाद होने वाली भारीपन या असहजता में कुछ लोगों को राहत महसूस हो सकती है। हालांकि, लगातार अपच, पेट दर्द या एसिडिटी रहती है तो केवल सौंफ-मिश्री पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
मुंह की दुर्गंध से राहत
सौंफ की खुशबू और उसका स्वाद मुंह को फ्रेश महसूस करा सकता है। भोजन के बाद सौंफ चबाने से कुछ समय के लिए सांसों की दुर्गंध कम करने में मदद मिल सकती है। मिश्री इसका स्वाद हल्का मीठा कर देती है। हालांकि, अगर मुंह से लगातार दुर्गंध आती है तो दांतों और मसूड़ों की सफाई के साथ डेंटल चेकअप भी जरूरी हो सकता है।
पेट फूलने की समस्या में उपयोगी
कुछ लोगों को खाना खाने के बाद गैस या पेट फूलने की शिकायत होती है। सौंफ का पारंपरिक रूप से गैस और पेट की असहजता कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। भोजन के बाद थोड़ी मात्रा में सौंफ चबाना ऐसे लोगों को आराम दे सकता है। अगर पेट फूलने की समस्या बार-बार होती है, तो इसके पीछे खान-पान या कोई अन्य कारण हो सकता है।
मुंह का स्वाद बदलने में मददगार
लंबे समय तक एक जैसा स्वाद रहने या भोजन के बाद मुंह में मसालों की गंध महसूस होने पर सौंफ-मिश्री अच्छा विकल्प हो सकता है। सौंफ की प्राकृतिक सुगंध और मिश्री की मिठास मुंह का स्वाद बदल देती है। यही कारण है कि कई भारतीय रेस्तरां में भोजन के बाद सौंफ परोसी जाती है।
ताजगी का अहसास देती है
सौंफ को चबाने से मुंह में ताजगी और ठंडक जैसा अनुभव हो सकता है। खासकर मसालेदार या भारी भोजन के बाद इसका सेवन कई लोगों को अच्छा लगता है। हालांकि, यह शरीर को वास्तविक रूप से ठंडा करने या किसी बीमारी से बचाने का प्रमाणित उपचार नहीं है।
एंटी-ऑक्सीडेंट यौगिकों का स्रोत
सौंफ में विभिन्न पौधों से मिलने वाले जैव-सक्रिय यौगिक और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव से निपटने में भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन इसके लिए केवल सौंफ-मिश्री को पर्याप्त नहीं माना जा सकता। संतुलित आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी शामिल करना जरूरी है।
मिश्री खाते समय रखें खास ध्यान
सौंफ अपेक्षाकृत कम कैलोरी वाला मसाला है, लेकिन मिश्री मूल रूप से चीनी ही है। इसलिए ज्यादा मात्रा में सौंफ-मिश्री खाना उचित नहीं है। खासकर डायबिटीज या ब्लड शुगर की समस्या वाले लोगों को मिश्री का सेवन सीमित रखना चाहिए। इसे पाचन संबंधी समस्याओं का इलाज मानने के बजाय एक पारंपरिक माउथ फ्रेशनर के रूप में लेना ज्यादा उचित है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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एथेनॉल ब्लेंडिंग पर सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को सुनवाई:याचिका में मांग- पंपों पर बताया जाए पेट्रोल में कितना एथेनॉल मिला रहे
सुप्रीम कोर्ट 31 अगस्त को उस जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें देश के सभी पेट्रोल पंपों के नोजल और पेट्रोल बिल पर एथेनॉल की सटीक मात्रा यानी प्रतिशत लिखे होने की मांग की गई है। PTI के मुताबिक न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। यह याचिका नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से दायर की गई है। पंप के नोजल और पेट्रोल बिल पर लिखनी होगी एथेनॉल की मात्रा याचिका में केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया है कि पेट्रोल पंपों की हर डिस्पेंसिंग नोजल पर एथेनॉल ब्लेंडिंग का प्रतिशत स्पष्ट रूप से लिखा जाए। इसके साथ ही, जब भी कोई ग्राहक पेट्रोल खरीदे, तो उसको मिलने वाली रसीद पर भी यह अनिवार्य रूप से लिखा हो कि उस ईंधन में कितने प्रतिशत एथेनॉल मिला हुआ है। गाड़ियों के लिए ऑनलाइन कंपैटिबिलिटी डेटाबेस बनाने की मांग याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि सरकार एक आधिकारिक और सार्वजनिक ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करे। इस डेटाबेस में वाहन निर्माता, मॉडल, इंजन के प्रकार और निर्माण के वर्ष के हिसाब से सर्च करने की सुविधा हो। इससे आम नागरिक यह आसानी से जान सकेंगे कि उनकी गाड़ी E20 या अन्य एथेनॉल मिश्रण के अनुकूल है या नहीं। E20 पेट्रोल के असर की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी का सुझाव याचिका में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की भी मांग की गई है। इस कमेटी में: शामिल होने चाहिए। यह समिति सड़कों पर चल रहे वाहनों पर E20 ईंधन के वास्तविक प्रभाव की जांच करके सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करेगी। माइलेज, इंजन लाइफ और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर का होगा आकलन याचिका में कहा गया है कि यह एक्सपर्ट कमेटी निम्नलिखित पहलुओं का अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे:
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