ईरान का अमेरिकी डॉलर पर बड़ा फैसला, सुप्रीम लीडर मोजतबा ने बनाया ‘रेजिस्टेंस इकोनॉमी’ का खास प्लान
Iran on US dollar: अमेरिका से संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिकी डॉलर पर बड़ा फैसला लिया है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया है.
मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरान को ऐसी अर्थव्यवस्था तैयार करनी चाहिए जो बाहरी दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद मजबूती से चल सके. इसके लिए देश में उत्पादन बढ़ाना और आर्थिक विकास पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है. खामेनेई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में अमेरिकी डॉलर की भूमिका को धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए. उन्होंने इसे ‘रेजिस्टेंस इकोनॉमी’ यानी ऐसी आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का हिस्सा बताया, जो विदेशी दबाव का सामना कर सके और लंबे समय तक स्थिर बनी रहे.
Equally vital is giving special attention to economic growth, boosting production, gradually phasing out the US #dollar from playing a pivotal role, and ultimately, making Resistance Economy the central focus – all of which are among the goals of the service-oriented government.
— Ayatollah Mojtaba Khamenei (@MKhamenei_ir) August 28, 2026
घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर
सर्वोच्च नेता मोजतबा ने देश की आर्थिक समस्याओं से निपटने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि जहां तक संभव हो, ईरान को अपनी जरूरतों के लिए देश के अंदर होने वाले उत्पादन पर निर्भर रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि जिन चीजों का उत्पादन देश में पर्याप्त नहीं है, उन्हें जरूरत के हिसाब से समझदारी से आयात किया जाना चाहिए.
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खामेनेई ने महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती कीमतों जैसी समस्याओं पर भी ध्यान देने की बात कही. साथ ही उन्होंने निवेश बढ़ाने और उसे जरूरी क्षेत्रों में लगाने पर जोर दिया, ताकि उत्पादन और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके. उन्होंने अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता धीरे-धीरे कम करने और ‘प्रतिरोध अर्थव्यवस्था’ को देश की आर्थिक नीति का मुख्य आधार बनाने की बात भी कही.
बिना नाम लिए अमेरिका-इजरायल पर साधा निशाना
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि ईरान के विरोधी यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी शर्तें मानने से ही देश आर्थिक रूप से आगे बढ़ सकता है.
खामेनेई ने कहा कि ऐसा सोचना गलत है. उनके मुताबिक, ईरान के संसाधनों के साथ पहले भी विदेशी ताकतों ने गलत व्यवहार किया है, इसलिए उनकी मांगों के आगे झुकना देश की तरक्की का रास्ता नहीं हो सकता. उनका यह बयान अमेरिका के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के बीच आया है. अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए यह अभियान शुरू किया है.
क्यों बोला अमेरिका?
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि ईरान के खिलाफ उसका अभियान लगातार जारी है. अमेरिका ने बैंक मेली की दुबई शाखा के मैनेजर रजा मोहम्मद ताएदी और हांगकांग की एक कंपनी पर प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिका का आरोप है कि इन लोगों और कंपनी ने ईरान से जुड़े लोगों और संस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था का इस्तेमाल करने में मदद की.
ईरानी बैंक और कंपनियों पर कार्रवाई
अमेरिका ने ईरान की वित्तीय व्यवस्था पर दबाव बढ़ाते हुए कुछ बैंकों और कंपनियों पर कार्रवाई की है. अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, बैंक मेल्ली ईरान की सेना, IRGC-कुद्स फोर्स और रक्षा मंत्रालय से जुड़ी प्रतिबंधित संस्थाओं के लिए एक अहम वित्तीय केंद्र रहा है. अमेरिका ने हांगकांग की एक कंपनी पर भी प्रतिबंध लगाया है. आरोप है कि इस कंपनी ने ईरान से जुड़े कुछ लोगों और संस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच बनाने में मदद की. इसके अलावा, अमेरिकी वित्त विभाग की संस्था FinCEN ने बैंक मिस्र यूएई की अमेरिकी वित्तीय संस्थानों तक पहुंच रोकने का प्रस्ताव रखा है. अमेरिका का कहना है कि यह बैंक ईरानी सरकार को अमेरिकी डॉलर तक पहुंच दिलाने में अहम भूमिका निभाता है.
अमेरिका का ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा कि ईरान पर दबाव बढ़ाने के अभियान के तहत ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. अमेरिका उन लोगों और संस्थाओं को निशाना बनाएगा, जो ईरानी सरकार के लिए कथित तौर पर गैरकानूनी वित्तीय गतिविधियों में शामिल हैं. 24 अगस्त को अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू करने का ऐलान किया था. इसका मकसद दुनिया भर में ईरान के वित्तीय नेटवर्क को कमजोर करना और उसकी सरकार तक पहुंचने वाले पैसों के स्रोतों को रोकना है.
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