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Hemp Hearts: छोटे बीजों में छिपा बड़ा पोषण, जानें वजन घटाने और हेल्थ के लिए कैसे है ये फायदेमंद

आजकल लोग ऐसी चीजों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहते हैं, जो कम मात्रा में भी शरीर को अच्छा पोषण दे सकें। हेम्प हार्ट्स भी ऐसा ही एक खाद्य पदार्थ है। यह हेम्प सीड्स (भांग के बीज) का अंदरूनी नरम हिस्सा होता है, जिसे बाहर का सख्त छिलका हटाने के बाद खाया जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में पौधों से मिलने वाला प्रोटीन, अच्छे फैट, मैग्नीशियम और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। हार्मोन हेल्थ और वेट लॉस स्पेशलिस्ट लीमा महाजन ने भी हेम्प हार्ट्स के पोषण और इसके फायदों के बारे में जानकारी साझा की है।

हेम्प हार्ट्स क्या होते हैं?

हेम्प हार्ट्स दरअसल भांग के बीज के अंदर का नरम हिस्सा होते हैं। बीज के ऊपर मौजूद सख्त छिलके को हटाने के बाद जो अंदर का हिस्सा बचता है, उसे हेम्प हार्ट्स कहा जाता है। इनका स्वाद हल्का मेवे जैसा होता है। इन्हें दही, स्मूदी, दलिया, जूस, सलाद, दाल, चीले के घोल या आटे में मिलाकर खाया जा सकता है। छिलका हटने के बाद इन्हें खाना भी आसान हो जाता है।

थोड़ी सी मात्रा में मिलता है भरपूर पोषण

करीब 25 ग्राम यानी लगभग 2 बड़े चम्मच हेम्प हार्ट्स में लगभग 8.4 ग्राम पौधों से मिलने वाला प्रोटीन, शरीर के लिए जरूरी सभी 9 अमीनो अम्ल, 175 मिलीग्राम मैग्नीशियम, 2.5 ग्राम एएलए ओमेगा-3, आर्जिनिन की अच्छी मात्रा, जीएलए और ओमेगा-6 और ओमेगा-3 का अनुपात करीब 2.5 से 3:1 है। इससे पता चलता है कि कम मात्रा में लेने पर भी यह शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व दे सकता है।

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दिल और रक्तचाप के लिए क्यों खास है?

हेम्प हार्ट्स में आर्जिनिन पाया जाता है। शरीर आर्जिनिन की मदद से नाइट्रिक ऑक्साइड बनाता है। यह रक्त वाहिकाओं को ढीला करने और शरीर में रक्त के सामान्य प्रवाह को बनाए रखने में मदद करता है।

इस वजह से हेम्प हार्ट्स को दिल की सेहत और सामान्य रक्तचाप को बनाए रखने वाली संतुलित डाइट का हिस्सा माना जा सकता है। हालांकि, इसे उच्च रक्तचाप या दिल से जुड़ी किसी बीमारी की दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

इसमें पाए जाते हैं अच्छे फैट

हेम्प हार्ट्स में कई तरह के अच्छे फैट पाए जाते हैं। इनमें एएलए ओमेगा-3, एलए ओमेगा-6 और जीएलए शामिल हैं। जीएलए शरीर में सूजन से जुड़े कुछ कामों में भूमिका निभाता है। वहीं, अच्छे फैट शरीर की सामान्य सेहत, त्वचा और दिल की सेहत के लिए संतुलित भोजन का हिस्सा हो सकते हैं।

वजन घटाने और मांसपेशियों के लिए कितना फायदेमंद?

वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए हेम्प हार्ट्स को सीमित मात्रा में भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। इसमें प्रोटीन और अच्छे फैट होते हैं, जो संतुलित भोजन का हिस्सा बन सकते हैं।

इसमें मौजूद मैग्नीशियम मांसपेशियों के सामान्य काम, नसों और शरीर में ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया के लिए जरूरी होता है। इसलिए नियमित व्यायाम करने वाले लोग भी इसे अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं। हालांकि, केवल हेम्प हार्ट्स खाने से वजन कम नहीं होता। वजन घटाने के लिए सही मात्रा में भोजन, नियमित व्यायाम और अच्छी जीवनशैली भी जरूरी है।

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हेम्प हार्ट्स और दूसरे बीजों में क्या अंतर है?

अलग-अलग बीज और मेवों में ओमेगा-6 और ओमेगा-3 का अनुपात अलग होता है। हेम्प हार्ट्स में यह अनुपात करीब 3:1 बताया जाता है। वहीं अखरोट में यह करीब 4:1, चिया में करीब 1:3 और अलसी में करीब 1:4 होता है। कद्दू, तिल और सूरजमुखी के बीजों में ओमेगा-6 की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। हेम्प हार्ट्स की खासियत सिर्फ अच्छे फैट नहीं हैं। इसमें प्रोटीन, मैग्नीशियम, ओमेगा-3, जीएलए और आर्जिनिन एक साथ मिलते हैं।

हेम्प हार्ट्स को कैसे खाएं?

अगर आप पहली बार हेम्प हार्ट्स को अपने भोजन में शामिल कर रहे हैं, तो करीब 1 बड़ा चम्मच यानी 12 से 13 ग्राम से शुरुआत कर सकते हैं। इसे आप दही में मिलाकर, दलिया के साथ, फलों के जूस में, सलाद के ऊपर डालकर, दाल में मिलाकर, चीले के घोल में और आटे में मिलाकर खा सकते हैं।

क्या हेम्प हार्ट्स और भांग एक ही चीज हैं?

हेम्प हार्ट्स और भांग को एक ही चीज समझना सही नहीं है। हेम्प हार्ट्स बीज का खाने योग्य अंदरूनी हिस्सा है, जिसे मुख्य रूप से पोषण के लिए खाया जाता है। इसे नशे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली भांग से अलग समझना जरूरी है।

समुद्र मंथन की कथा में भगवान शिव ने संसार को बचाने के लिए हलाहल विष पिया और उसे अपने गले में रोक लिया। इसी कारण उन्हें नीलकंठ कहा गया। बाद की कुछ लोक परंपराओं में भांग का संबंध भगवान शिव से जोड़ा गया और इसे विष के बाद ठंडक और राहत से जुड़ी मान्यताओं के साथ देखा गया। हालांकि, यह धार्मिक और लोक परंपरा का हिस्सा है और हेम्प हार्ट्स के पोषण से अलग विषय है।

हेम्प हार्ट्स खाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

हेम्प हार्ट्स पोषक तत्वों से भरपूर हो सकते हैं, लेकिन इन्हें संतुलित भोजन का हिस्सा बनाकर ही खाना चाहिए। पहली बार लेने पर कम मात्रा से शुरुआत करना बेहतर है। अगर आपको किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी है, कोई बीमारी है या आप किसी खास तरह का भोजन लेते हैं, तो इसे नियमित रूप से खाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

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Women Health: Pregnancy Planning कर रही महिलाओं के लिए वरदान है यह Yoga Pose, पेल्विक फ्लोर को मिलेगी मजबूती

आज के समय में महिलाओं को पीरियड्स और फर्टिलिटी से जुड़ी समस्या काफी आम हो गई है। खानपान सही न होना, अनहेल्दी लाइफस्टाइल, तनाव के कारण पीरियड्स और ओव्युलेशन अनियमित हो जाता है। जिस कारण कंसीव करने में मुश्किल होती है। लेकिन डाइट और लाइफस्टाइल को सही करके इन समस्याओं से बचा जा सकता है।

पीरियड्स को नियमित करने और फर्टिलिटी को सुधारने में कई योगासन मदद कर सकते हैं। सुप्त बद्ध कोणासन इस आसन में से एक है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस आसन को कैसे करना है और किस तरह से यह पीरियड्स से जुड़ी समस्या को दूर करके आपके पेल्विक फ्लोर को मजबूत बनाता है।

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सुप्त बद्ध कोणासन

सुप्त बद्ध कोणासन करना ज्यादा मुश्किल नहीं है। लेकिन अगर आप रूटीन में योगा नहीं करती हैं, तो आपको शुरूआत में थोड़ा मुश्किल हो सकती है। आप शुरूआत में इसको किसी योगा ट्रेनर की निगरानी में भी कर सकती हैं।

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर बैठ जाएं।

आप चाहें तो इस आसन को सोने से पहले बिस्तर पर भी कर सकती हैं।

आपको सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़ें और एड़ी को पेल्विक फ्लोर की ओर ले जाएं।

दोनों पैरों के तलवों को आपस में मिलाएं, फिर घुटनों को तितली तरह दोनों तरफ से खोलें।

इस दौरान ध्यान रहे कि तलवे एकदम जुड़े होने चाहिए।

एड़ियों को जितना हो सके, पेल्विक फ्लोर के पास ले जाएं।

रीढ़ की हड्डी को एकदम सीधा रखें और शरीर से हाथों को दूर रखें। वहीं अपनी हथेलियों को ऊपर की तरफ रखें।

इसके बाद सांस लेते हुए घुटनों के ऊपर की ओर ले जाएं।

इस दौरान आपको पेल्विक फ्लोर पर खिंचाव लगना चाहिए।

फिर पैरों को वापस अपनी पोजीशन में ले आएं।

सुप्त बद्ध कोणासन फायदे

सुप्त बद्ध कोणासन को करने से शरीर को कई फायदे मिल सकते हैं। खासकर यह आसन उन महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद है। जो कंसीव करने की प्लानिंग कर रही हैं, या फिर जिनको पीरियड्स से जुड़ी समस्या है।

इस आसन को करने से पीरियड्स में होने वाली समस्याएं दूर होती हैं।

इस आसन को करने से महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ को सुधारने में मदद करता है।

इस आसन को करने से पेल्विक फ्लोर का तनाव कम होता है।

सुप्त बद्ध कोणासन पेल्विक फ्लोर में ब्लड सर्कुलेशन में सुधारता है। वहीं इससे रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स तक सही मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है।

इस आसन को करने से हार्मोनल इंबैलेंस दूर होती है और ओव्युलेशन को हेल्दी बना सकता है।

सोने से पहले इस आसन को करने से स्ट्रेस कम होता है।

सुप्त बद्ध कोणासन करने से शरीर रिलैक्स होता है और मेंटल हेल्थ बेहतर होती है।

अगर आप भी कंसीव करने का प्लान कर रही हैं, तो इसको रूटीन में जरूर शामिल करें।

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