क्रिकेट से दोबारा जुड़ने की उम्मीद कर रही अनाया बांगर के लिए ऑस्ट्रेलिया से अच्छी खबर सामने आई है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगर की संतान अनाया को ऑस्ट्रेलिया में महिला सामुदायिक क्रिकेट खेलने की अनुमति मिल गई है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की ओर से मिली मंजूरी के बाद वह तत्काल प्रभाव से सामुदायिक स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकती हैं।
अनाया ने मार्च 2026 में लिंग-पुष्टिकरण से जुड़ी शल्य चिकित्सा कराई थी। इसके बाद उनके लिए क्रिकेट में वापसी का रास्ता आसान नहीं था। अनाया ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि एक समय उन्हें लगा था कि वह शायद दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगी, लेकिन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें फिर से मैदान पर उतरने का मौका दिया है। उन्होंने इस फैसले को अपने लिए बेहद खास दिन बताया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अनाया पहले मुंबई की आयु वर्ग की क्रिकेट टीम में खेल चुकी हैं। उस दौरान उन्होंने सरफराज खान और उनके भाई मुशीर खान के साथ भी क्रिकेट खेला था। क्रिकेट से उनका जुड़ाव नया नहीं है और यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया में सामुदायिक क्रिकेट खेलने की अनुमति उनके लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि, अनाया के लिए शीर्ष स्तर की महिला क्रिकेट में खेलने की राह फिलहाल अलग नियमों से जुड़ी हुई है। महिला बिग बैश लीग जैसी विशिष्ट प्रतियोगिताओं में खेलने के लिए उन्हें क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की लिंग-पार और लिंग-विविध खिलाड़ियों से संबंधित विशिष्ट क्रिकेट नीति के तहत खिलाड़ी के रक्त में सीरम टेस्टोस्टेरोन का स्तर लगातार कम से कम 12 महीने तक 10 नैनोमोल प्रति लीटर से नीचे रहना जरूरी है। अनाया की विशिष्ट क्रिकेट में पात्रता मार्च 2027 से इस शर्त के पूरा होने पर निर्भर करेगी।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की अखंडता प्रमुख जैकी पार्ट्रिज ने अनाया को भेजे पत्र में कहा है कि मार्च 2027 में विशिष्ट क्रिकेट के लिए पात्रता का आकलन उनके ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर कराए जाने वाले रक्त परीक्षण और नीति की अन्य शर्तों के आधार पर होगा। जांच में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उनका टेस्टोस्टेरोन स्तर निर्धारित सीमा के भीतर है।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने 2023 में महिला वर्ग की विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को लेकर ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की पात्रता संबंधी नीति में बदलाव किया था। इसके तहत पुरुष यौवन की अवस्था से गुजर चुके ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को महिला वर्ग की विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने से बाहर रखा गया था।
वहीं, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के फैसले में सामुदायिक और विशिष्ट क्रिकेट के बीच स्पष्ट अंतर रखा गया है। जैकी पार्ट्रिज के अनुसार, मार्च 2027 तक अनाया ऑस्ट्रेलिया के किसी भी राज्य या क्षेत्र की प्रीमियर क्रिकेट प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकती हैं, क्योंकि इन्हें सामुदायिक क्रिकेट की श्रेणी में रखा गया है।
इस फैसले के साथ अनाया के लिए क्रिकेट में वापसी का तत्काल रास्ता खुल गया है। अब उनकी नजर मैदान पर वापसी और सामुदायिक क्रिकेट में अपने प्रदर्शन के जरिए आगे बढ़ने पर है।
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भारत के पूर्व हेड कोच राहुल द्रविड़ का मानना है कि भले ही भारत वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फ़ाइनल की रेस में पीछे छूट गया हो, लेकिन टीम की क्वालिटी को देखते हुए दो बार फ़ाइनल खेल चुकी यह टीम अभी भी रेस से बाहर नहीं हुई है। भारत अभी WTC 2025-27 पॉइंट्स टेबल में पांचवें नंबर पर है और टॉप दो में जगह बनाकर अगले साल होने वाले फाइनल में पहुंचने के लिए उसे कड़ी चुनौती का सामना करना होगा। अभी कई अहम टेस्ट मैच खेले जाने बाकी हैं, इसलिए तीसरी बार WTC फ़ाइनल में पहुंचने की उम्मीदों को ज़िंदा रखने के लिए भारत को अपने बचे हुए ज़्यादातर मैच जीतने होंगे।
जब द्रविड़ से पूछा गया कि क्या भारत अभी भी WTC फ़ाइनल में जगह बना सकता है, तो उन्होंने JioStar से कहा कि मुझे उम्मीद है कि वे ऐसा करेंगे। अगर भारत यहाँ से WTC फ़ाइनल के लिए क्वालिफ़ाई कर पाता है, तो यह एक शानदार सफ़र होगा। उन्होंने कहा कि वे थोड़े पीछे रह गए हैं, लेकिन भारतीय टीम में जिस तरह की काबिलियत है, उसे किसी भी स्टेज पर कम नहीं आंका जा सकता। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ अच्छी शुरुआत की है, जो एक अच्छा पहला कदम है।
भारत अभी श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की सीरीज़ में 1-0 से आगे है और शानदार बल्लेबाज़ी के दम पर दूसरे टेस्ट में भी मज़बूत स्थिति में है। सीरीज़ जीतने से भारत को अहम पॉइंट्स और मोमेंटम मिलेगा, लेकिन आगे की राह काफी मुश्किल है। WTC साइकल में भारत के लिए अगली बड़ी चुनौती अक्टूबर में आएगी, जब टीम दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए न्यूजीलैंड जाएगी। द्रविड़ का मानना है कि यह दौरा काफ़ी मुश्किल हो सकता है, खासकर युवा भारतीय टीम के लिए, जिन्हें उन हालात में टेस्ट क्रिकेट खेलने का ज़्यादा अनुभव नहीं है।
द्रविड़ ने कहा कि न्यूज़ीलैंड में खेलना हमेशा एक चुनौती होती है। घर से बाहर उनके ख़िलाफ़ खेलना मुश्किल होता है। भारतीय टीम के कई युवा खिलाड़ियों ने उन हालात में नहीं खेला है, इसलिए यह एक बड़ी चुनौती होगी। भारत के पूर्व कप्तान ने विराट कोहली, रोहित शर्मा, अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा के जाने से भारत को हुए अनुभव के नुकसान का भी ज़िक्र किया। उनकी गैर-मौजूदगी में अब युवा खिलाड़ियों के कंधों पर न्यूज़ीलैंड में चुनौती का सामना करने की ज़िम्मेदारी होगी।
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