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ज्यादा चीनी, नमक या फैट वाले खाने-पीने के सामान के पैकेट पर लाल रंग की चेतावनी दें; एफएसएसएआई का प्रस्ताव

नई दिल्ली, 28 अगस्त (आईएएनएस)। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने प्रोसेस किए गए खाने-पीने की उन चीजों के पैकेट के सामने लाल रंग का वॉर्निंग लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिनमें चीनी, नमक या फैट की मात्रा ज्यादा होती है। यह कदम इसलिए जरूरी है ताकि ग्राहक सोच-समझकर सही चुनाव कर सकें।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एफएसएसएआई ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि चेतावनी लेबल पर साफ-साफ लिखा होगा- जैसे ज्यादा वसा वाला, ज्यादा चीनी वाला, ज्यादा नमक वाला या बहुत ज्यादा मीठा पेय... ताकि लोग आसानी से समझ सकें कि किस प्रोडक्ट में कौन सी चीज ज्यादा मात्रा में है।

सुप्रीम कोर्ट में यह दलील इसलिए दी गई क्योंकि वह पश्चिमी देशों की तर्ज पर चेतावनी लेबल लगाने की मांग करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में एक सुनवाई में एफएसएसएआई से कहा था कि वह इन लेबलों को लागू करने में तेजी लाए।

नेस्ले, पेप्सिको और कोका-कोला जैसी बड़ी खाद्य कंपनियां इस कदम का विरोध कर रही हैं क्योंकि इससे बिक्री प्रभावित होने की आशंका है।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान अनिवार्य पैकेज्ड फूड अलर्ट लेबल को लागू करने में लंबी देरी पर एफएसएसएआई की खिंचाई की थी। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों, विशेषकर छोटे बच्चों को मोटापे जैसी बीमारियों के खतरे से बचाने के लिए पारदर्शी पोषण संबंधी खुलासे महत्वपूर्ण हैं।

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने वैधानिक नियामक की धीमी गति पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। न्यायाधीशों ने सवाल किया कि क्या रेगुलेटरी अथॉरिटी वास्तव में भारतीय आबादी के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हैं। नतीजतन, अदालत ने चेतावनी दी कि यदि कार्यकारी शाखा स्वतंत्र रूप से कार्य करने में विफल रही तो न्यायिक आदेशों का पालन किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने उन तर्कों को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि पैकेज के सामने चेतावनी लेबल पारंपरिक भारतीय पैक किए गए स्नैक्स पर गलत तरीके से जुर्माना लगा सकते हैं। पीठ ने कहा कि व्यावसायिक हित सार्वजनिक स्वास्थ्य अनिवार्यताओं पर हावी नहीं हो सकते। इसने नियामक संस्था को एक निश्चित रूपरेखा स्थापित करने के लिए दो सप्ताह की सख्त अवधि प्रदान की। न्यायाधीशों ने इस बात पर जोर दिया कि युवा उपभोक्ताओं को अल्टा-प्रोसेस्ड वस्तुओं के एग्रेसिव मार्केटिंग का सामना करना पड़ता है।

--आईएएनएस

एससीएच/डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Ground Report: China के ‘Water Bomb’ नेपाल की महातबाही का क्या Connection है?

Ground Report: नेपाल और तिब्बत सीमा पर कुदरत का कहर एक बार फिर देखने को मिल रहा है. नेपाल के रसुआ जिले में तिब्बत सीमा के पास स्थित एक ग्लेशियर झील अचानक फट गई है. इसके चलते आसपास की छोटी झीलों में भी भारी दबाव बना और वे भी टूट गईं. इस घटना के बाद सीमावर्ती इलाकों में बहने वाली त्रिशूली नदी का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ने लगा है. नदी में आते तेज उफान और पानी के भारी बहाव को देखते हुए दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में हड़कंप मच गया है. खतरे की गंभीरता को समझते हुए राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों को फौरन पीछे हटने को कहा गया है. दोनों देशों के प्रशासन ने राहत कार्य को रोकते हुए आम लोगों के साथ सुरक्षाकर्मियों को भी तुरंत सुरक्षित और ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने का निर्देश जारी किया है.

चीन और नेपाल में रेस्क्यू रुका, हाई अलर्ट जारी

झील फटने के बाद पैदा हुए नए खतरे के कारण नेपाल में चल रहे बचाव अभियान को रोक दिया गया है. दूसरी तरफ चीन ने भी तिब्बत के प्रभावित इलाकों में अपने राहत दल को पीछे खींचते हुए लेवल चार का अलर्ट जारी कर दिया है. बुधवार को आई भीषण बाढ़ और जमीन धंसने की घटना के बाद से ही दोनों देशों के सैकड़ों लोग लापता हैं और उनकी तलाश की जा रही थी. अब इस नई आफत के आने से लापता लोगों की तलाश का काम भी प्रभावित हो गया है. प्रशासन का कहना है कि पहली प्राथमिकता लोगों और बचाव दल की जान बचाना है, क्योंकि पानी का दूसरा तेज बहाव कभी भी इन इलाकों को तबाह कर सकता है.देखिये सैयद आमिर की ये ग्राउंड रिपोर्ट....

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