लद्दाख को मिलने वाला है खास दर्जा? Article 371 को लेकर रिजिजू ने बताया सरकार का प्लान
लद्दाख को जल्द ही संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत विशेष दर्जा मिलने की उम्मीद है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने केंद्र सरकार के लद्दाख प्लान पर विस्तार से जानकारी दी है. यह कदम लद्दाख के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण नींव रखेगा.
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Reliance ने Subhash Chandra के आरोपों को नकारा, कहा मीडिया का गलत इस्तेमाल नहीं किया
मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह ने मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा की तरफ से समूह की मीडिया इकाइयों पर लगाए गए आरोपों को शुक्रवार को ‘निराधार’ बताते हुए खारिज कर दिया। रिलायंस समूह ने एक बयान में एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की ‘निराधार टिप्पणियों’ पर निराशा जताई। रिलायंस के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम रिलायंस समूह से जुड़े मीडिया संस्थानों के खिलाफ आरोपों और इशारों में लगाए गए आरोपों का पुरजोर खंडन करते हैं।” विभिन्न मीडिया प्रतिष्ठानों का स्वामित्व रखने वाले समूह ने कहा कि उसके मीडिया ब्रांडों का इस्तेमाल ‘कभी किसी पर हमला करने के लिए नहीं किया गया और न ही कभी किया जाएगा।’ प्रवक्ता ने कहा कि समूह कारोबारी और उद्यमी के तौर पर सुभाष चंद्रा का सम्मान करता है और उनके अच्छे भविष्य की कामना करता है।
रिलायंस की यह प्रतिक्रिया राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की उस हाल की कार्यवाही के बीच आई है, जिसमें चंद्रा व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। मंगलवार को एनसीएलटी के न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा ने तीसरे सदस्य के तौर पर फैसला देते हुए समाधान योजना को मंजूरी दी थी, जिसके तहत चंद्रा स्वीकृत ऋणदाताओं के दावों के निपटान के लिए सिर्फ 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे। इससे पहले एनसीएलटी की पीठ के दो सदस्यों ने अलग-अलग राय दी थी।
इसके बाद एनसीएलटी अध्यक्ष ने मतभेद के निपटारे के लिए शर्मा को तीसरा सदस्य नियुक्त किया था। शर्मा ने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के नेतृत्व में असहमति जताने वाले ऋणदाताओं के दावों को खारिज कर दिया था। इन ऋणदाताओं ने भुगतान योजना को ‘अव्यावहारिक और गैरकानूनी’ बताया था।
ऋणदाताओं का कहना था कि करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले प्रस्तावित योजना में ऋणदाताओं को केवल 6.25 करोड़ रुपये और प्रक्रिया लागत के लिए 25 लाख रुपये देने की पेशकश की गई है। इस आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया में चंद्रा ने बृहस्पतिवार को कहा था कि व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही में उनके खिलाफ कुल दावा केवल 3,992 करोड़ रुपये है और वह इसमें कर्ज लेने वाले न होकर सिर्फ व्यक्तिगत गारंटर हैं। चंद्रा ने कहा कि उन्होंने किसी भी ऋणदाता से कोई पैसा उधार नहीं लिया है।
उन्होंने बताया कि 620 करोड़ रुपये का दावा पहले ही निपटाया जा चुका है, जबकि कर्ज लेने वाली कंपनियों ने 1,063 करोड़ रुपये और चुकाने की पेशकश की है। उनका कहना है कि जिन कर्ज लेने वाली कंपनियों के लिए उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी, वे अब तक 43,000 करोड़ रुपये चुका चुकी हैं और उन्होंने किसी भी अन्य बकाया राशि के निपटान का आश्वासन दिया है। मामला अब औपचारिक आदेश के लिए मूल दो-सदस्यीय पीठ के पास जाएगा।
यह प्रक्रिया कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 419(5) के तहत बहुमत की राय के अनुरूप होगी।
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