Jio Platforms IPO को SEBI से मिली मंजूरी, जुटाएगी 37700 करोड़ रुपये
रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सेवा इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स लि. को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने के लिए बाजार नियामक सेबी की मंजूरी मिल गई है। कंपनी इस आईपीओ के जरिये करीब चार अरब डॉलर (लगभग 37,700 करोड़ रुपये) जुटाने की उम्मीद कर रही है। इस लिहाज से यह देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम हो सकता है।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम के लिए जून में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास मसौदा दस्तावेज दाखिल किए थे। सेबी के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी को 28 अगस्त को नियामक की अंतिम टिप्पणियां मिल गईं। आईपीओ प्रक्रिया में सेबी की टिप्पणियां एक महत्वपूर्ण चरण होती हैं।
इसके बाद कंपनी नियामकीय प्रावधानों का पालन करते हुए सार्वजनिक निर्गम लाने की तैयारियां आगे बढ़ा सकती है। जियो प्लेटफॉर्म्स की विवरण पुस्तिका (डीआरएचपी) के अनुसार, कंपनी 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी करेगी। निर्गम के बाद ये शेयर कंपनी की कुल इक्विटी शेयर पूंजी का करीब 2.9 प्रतिशत होंगे।
सूत्रों के अनुसार, कंपनी करीब 137 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर आईपीओ के जरिये लगभग 37,700 करोड़ रुपये जुटा सकती है। ऐसा होने पर यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। इससे पहले 2024 में हुंदै मोटर इंडिया का आईपीओ 3.3 अरब डॉलर रहा था।
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ एनएसई के करीब 30,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित आईपीओ से भी बड़ा होगा। आईपीओ से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के अलावा जियो प्लेटफॉर्म्स की महत्वपूर्ण अनुषंगी कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम लि. (आरजेआईएल) के कुछ बकाया कर्ज के पूर्ण या आंशिक भुगतान के लिए किया जाएगा। जियो प्लेटफॉर्म्स के तहत रिलायंस के डिजिटल कारोबार आते हैं, जिनमें दूरसंचार सेवाएं भी शामिल हैं।
जून के अंत तक रिलायंस जियो इन्फोकॉम के ग्राहकों की संख्या 53.3 करोड़ से अधिक थी। ग्राहकों की संख्या के लिहाज से यह चाइना मोबाइल के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल ऑपरेटर कंपनी है। कंपनी ने क्लाउड, कृत्रिम मेधा (एआई) और उद्यम नेटवर्क सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार किया है।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने इससे पहले दुनिया के कुछ सबसे बड़े प्रौद्योगिकी और निजी इक्विटी निवेशकों को आकर्षित किया है। वर्ष 2020 में, कंपनी ने फेसबुक के प्रवर्तक मेटा से 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 43,574 करोड़ रुपये जुटाए थे। गूगल ने 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 33,737 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
कंपनी ने सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, जनरल अटलांटिक, केकेआर, मुबाडाला, एडीआईए, टीपीजी, एल कैटरटन, पीआईएफ, इंटेल कैपिटल और क्वालकॉम वेंचर्स सहित वैश्विक वित्तीय और रणनीतिक निवेशकों के एक समूह से लगभग 15.2 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए करीब 74,745 करोड़ रुपये भी जुटाए थे। वर्तमान में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स की चुकता इक्विटी शेयर पूंजी की 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मेटा और गूगल की कुल हिस्सेदारी 17.71 प्रतिशत है, जबकि शेष हिस्सेदारी अन्य निवेशकों के पास है।
Nepal Flood से भारत-नेपाल व्यापार प्रभावित, Sonauli Border पर 16 किमी तक ट्रकों की कतार
नेपाल में बाढ़ का असर भारत-नेपाल सीमा के बीच व्यापार पर पड़ने लगा है। सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से काठमांडू समेत नेपाल के अन्य हिस्सों में मालवाहक वाहनों की आवाजाही बाधित हुई है। सोनौली बॉर्डर पर भारतीय सीमा में करीब 16 किलोमीटर लंबी मालवाहक ट्रकों की कतार लग गई है, जो नेपाल में प्रवेश का इंतजार कर रहे हैं।
लंबे समय से आवाजाही बाधित होने से ट्रक चालकों और व्यापारियों की परेशानी बढ़ रही है, वहीं वाहनों की बढ़ती संख्या से सीमावर्ती क्षेत्र में यातायात प्रबंधन पर दबाव बढ़ गया है। काठमांडू के अलावा नेपाल के अन्य हिस्सों में जाने वाले मालवाहक ट्रक भी देरी का सामना कर रहे हैं, क्योंकि पड़ोसी देश में कई मार्गों पर यातायात प्रभावित है। वाहनों की कतार नौतनवा क्षेत्र तक बढ़ गई है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात को लेकर चिंता बढ़ी है।
सीमा क्षेत्र में तैनात सुरक्षा एजेंसियां और पुलिसकर्मी स्थिति पर नजर रख रहे हैं और वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने में जुटे हैं। अधिकारियों ने कहा कि यदि नेपाल में सड़क संपर्क जल्द बहाल नहीं हुआ तो स्थिति और बिगड़ सकती है, जिससे दोनों देशों के बीच माल की आवाजाही और आपूर्ति में देरी हो सकती है। क्षेत्राधिकारी बसंत सिंह ने बताया कि सोनौली बॉर्डर पर निगरानी बढ़ा दी गई है और सीमावर्ती थानों के प्रभारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि बाढ़ की स्थिति के बीच नेपाल से बहकर भारतीय क्षेत्र में आने के बाद महराजगंज जिले में नदी से चार शव बरामद किए गए। बुरी तरह से सड़ी-गली हालत में मिले इन शवों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा, अब तक चार शव बरामद किए गए हैं और उन्हें मुर्दाघर में रखा गया है।
हम इस मामले को लेकर नेपाल प्रशासन के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ का खतरा कम हो गया है क्योंकि नदी में पानी का बहाव कम हो गया है। डीएम ने कहा, फिलहाल इलाके में स्थिति सामान्य है।
नेपाल में बाढ़ ने वहां काम करने वाले महराजगंज के निवासियों को भी प्रभावित किया है। सोनौली थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर गांव निवासी राज कुमार गौतम करीब एक साल से काठमांडू में फर्नीचर का काम कर रहे थे और बाढ़ के हालात से बचकर घर लौट रहे हैं। गौतम ने फोन पर परिवार को बताया कि स्थिति भयावह है, कई परिवार बर्बाद हो गए हैं और लोग घबराहट में सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं।
उनकी बेटी अंकिता ने बताया कि बृहस्पतिवार शाम करीब चार बजे पिता से बात हुई थी। उन्होंने बताया कि वह बिहार के रास्ते बस से घर लौट रहे हैं। गौतम परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं।
उधर, पड़ोसी जिले कुशीनगर में अधिकारियों ने नरवाजोत और अहिरौली के बीच 17.5 किलोमीटर लंबे तटबंध पर निगरानी बढ़ा दी है। राजस्व, पुलिस और बाढ़ नियंत्रण टीम संवेदनशील हिस्सों पर नजर रख रही हैं। अपर जिलाधिकारी वैभव मिश्रा ने कहा कि नदी किनारे बसे गांवों में चौकसी बढ़ा दी गई है।
छितौनी और वाल्मीकिनगर के पास रहने वाले लोगों ने बताया कि उन्होंने गैस सिलेंडर, बिस्तर और रेफ्रिजरेटर जैसे घरेलू सामान को तेज बहाव में बहते देखा, जिसे कुछ स्थानीय लोगों ने बाहर निकाला। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम गांवों में तैनात हैं, जबकि पीएसी और जल पुलिस (पुलिस की विशेष इकाई) को भी अलर्ट पर रखा गया है। अन्य छोटी मौसमी नदियों और नालों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।
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