ई20 पेट्रोल को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने स्थिति साफ कर दी है। कंपनी ने गुरुवार को कहा कि मौजूदा ई20 मिश्रित पेट्रोल को हटाकर ई10 पेट्रोल लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। कंपनी के मुताबिक, उसके अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजय खन्ना की बात को गलत तरीके से पेश किया गया है।
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बयान जारी कर कहा कि संजय खन्ना ने कंपनी की वार्षिक आम बैठक के बाद स्पष्ट रूप से बताया था कि मौजूदा ई20 पेट्रोल को ई10 से बदलने की कोई योजना नहीं है। कंपनी ने कहा कि उनके बयान को इस तरह पेश किया जा रहा है, जैसे ई10 को ई20 के विकल्प के रूप में लाने पर विचार हो रहा है, जबकि ऐसा नहीं है।
कंपनी ने ई20 के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों से देश में लाखों वाहन इस ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के बावजूद वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचने या किसी अन्य गंभीर समस्या का प्रमाण सामने नहीं आया है। कंपनी के मुताबिक, ई20 से प्रदूषण कम करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और देश के विदेशी मुद्रा खर्च को घटाने में मदद मिलती है।
मौजूदा विवाद की शुरुआत उन खबरों के बाद हुई, जिनमें कहा गया था कि पेट्रोलियम मंत्रालय पुराने वाहनों के मालिकों की चिंताओं को देखते हुए कम मात्रा में इथेनॉल मिले पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है। बताया गया था कि इस संबंध में सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के साथ चर्चा हुई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, प्रस्ताव के तहत 95 ऑक्टेन वाले प्रीमियम पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिलाकर ई10 विकल्प उपलब्ध कराने की संभावना पर चर्चा हुई थी। इसका उद्देश्य पुराने वाहनों के मालिकों को अलग से ई10 वितरण व्यवस्था बनाए बिना कम इथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध कराना था। हालांकि, भारत पेट्रोलियम ने स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा ई20 को ई10 से बदलने की कोई योजना नहीं है।
गौरतलब है कि देश के पेट्रोल पंपों पर ई20 पेट्रोल अब सामान्य ईंधन बन चुका है। इसमें पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है। इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में कम होती है, इसलिए अधिक मात्रा में इथेनॉल मिलाने से ईंधन की खपत और वाहन के औसत पर कुछ असर पड़ सकता है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले कह चुके हैं कि ई20 से वाहन या इंजन को नुकसान नहीं होता, हालांकि ईंधन की क्षमता में मामूली कमी आ सकती है। मंत्रालय के अनुसार, ई10 के लिए बनाए गए वाहनों में ई20 इस्तेमाल करने पर ईंधन क्षमता में करीब 3 से 5 प्रतिशत की कमी देखी जा सकती है।
इसी मुद्दे पर मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भी कहा था कि पुराने वाहनों के मालिकों की चिंताओं को दूर करने के लिए ई20 के साथ कम इथेनॉल वाला विकल्प उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसी वजह से ई10 को लेकर चर्चा फिर तेज हुई थी।
बता दें कि प्रीमियम पेट्रोल के मौजूदा ढांचे के इस्तेमाल से ई10 विकल्प उपलब्ध कराने का विचार इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि इसके लिए अलग भंडारण टैंक और वितरण व्यवस्था बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इंडियन ऑयल का एक्सपी95, भारत पेट्रोलियम का स्पीड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का पावर95 जैसे प्रीमियम पेट्रोल पहले से बाजार में मौजूद हैं।
देश में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 में प्रायोगिक तौर पर हुई थी। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाना, प्रदूषण कम करना और घरेलू स्तर पर इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। फिलहाल सरकार ई20 व्यवस्था को आगे बढ़ाने पर कायम है और भारत पेट्रोलियम ने भी राष्ट्रीय इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
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रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सेवा इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स लि. को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने के लिए बाजार नियामक सेबी की मंजूरी मिल गई है। कंपनी इस आईपीओ के जरिये करीब चार अरब डॉलर (लगभग 37,700 करोड़ रुपये) जुटाने की उम्मीद कर रही है। इस लिहाज से यह देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम हो सकता है।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम के लिए जून में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास मसौदा दस्तावेज दाखिल किए थे। सेबी के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी को 28 अगस्त को नियामक की अंतिम टिप्पणियां मिल गईं। आईपीओ प्रक्रिया में सेबी की टिप्पणियां एक महत्वपूर्ण चरण होती हैं।
इसके बाद कंपनी नियामकीय प्रावधानों का पालन करते हुए सार्वजनिक निर्गम लाने की तैयारियां आगे बढ़ा सकती है। जियो प्लेटफॉर्म्स की विवरण पुस्तिका (डीआरएचपी) के अनुसार, कंपनी 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी करेगी। निर्गम के बाद ये शेयर कंपनी की कुल इक्विटी शेयर पूंजी का करीब 2.9 प्रतिशत होंगे।
सूत्रों के अनुसार, कंपनी करीब 137 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर आईपीओ के जरिये लगभग 37,700 करोड़ रुपये जुटा सकती है। ऐसा होने पर यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। इससे पहले 2024 में हुंदै मोटर इंडिया का आईपीओ 3.3 अरब डॉलर रहा था।
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ एनएसई के करीब 30,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित आईपीओ से भी बड़ा होगा। आईपीओ से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के अलावा जियो प्लेटफॉर्म्स की महत्वपूर्ण अनुषंगी कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम लि. (आरजेआईएल) के कुछ बकाया कर्ज के पूर्ण या आंशिक भुगतान के लिए किया जाएगा। जियो प्लेटफॉर्म्स के तहत रिलायंस के डिजिटल कारोबार आते हैं, जिनमें दूरसंचार सेवाएं भी शामिल हैं।
जून के अंत तक रिलायंस जियो इन्फोकॉम के ग्राहकों की संख्या 53.3 करोड़ से अधिक थी। ग्राहकों की संख्या के लिहाज से यह चाइना मोबाइल के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल ऑपरेटर कंपनी है। कंपनी ने क्लाउड, कृत्रिम मेधा (एआई) और उद्यम नेटवर्क सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार किया है।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने इससे पहले दुनिया के कुछ सबसे बड़े प्रौद्योगिकी और निजी इक्विटी निवेशकों को आकर्षित किया है। वर्ष 2020 में, कंपनी ने फेसबुक के प्रवर्तक मेटा से 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 43,574 करोड़ रुपये जुटाए थे। गूगल ने 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 33,737 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
कंपनी ने सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, जनरल अटलांटिक, केकेआर, मुबाडाला, एडीआईए, टीपीजी, एल कैटरटन, पीआईएफ, इंटेल कैपिटल और क्वालकॉम वेंचर्स सहित वैश्विक वित्तीय और रणनीतिक निवेशकों के एक समूह से लगभग 15.2 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए करीब 74,745 करोड़ रुपये भी जुटाए थे। वर्तमान में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स की चुकता इक्विटी शेयर पूंजी की 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मेटा और गूगल की कुल हिस्सेदारी 17.71 प्रतिशत है, जबकि शेष हिस्सेदारी अन्य निवेशकों के पास है।
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