जुलाई में व्यापारियों को किया जाने वाला डिजिटल भुगतान 19.6 प्रतिशत बढ़कर 11.73 लाख करोड़ रुपए पर पहुंचा: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 28 अगस्त (आईएएनएस)। शुक्रवार को जारी एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) आधारित भुगतान और क्रेडिट कार्ड खर्च में बढ़ोतरी के चलते जुलाई 2026 में व्यापारियों को किए गए डिजिटल भुगतान का कुल मूल्य 19.6 प्रतिशत बढ़कर 11.73 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया।
इक्विरस सिक्योरिटीज द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 में व्यापारियों को किए गए डिजिटल भुगतान का मूल्य 9.80 लाख करोड़ रुपए था। वहीं जून 2026 के 11.17 लाख करोड़ रुपए की तुलना में भी जुलाई में लगभग 5 प्रतिशत की मासिक वृद्धि दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई-व्यापारी भुगतान (पी2एम) और क्रेडिट कार्ड लेनदेन डिजिटल भुगतान प्रणाली के प्रमुख वृद्धि चालक बने रहे। जुलाई में यूपीआई-आधारित व्यापारी भुगतान में सालाना आधार पर 23.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि क्रेडिट कार्ड खर्च में 7.4 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया।
जुलाई के दौरान यूपीआई-पी2एम लेनदेन का कुल मूल्य 9.066 लाख करोड़ रुपए रहा, जो कुल डिजिटल व्यापारी भुगतान का 77.3 प्रतिशत हिस्सा था। जून की तुलना में इसकी हिस्सेदारी 22 आधार अंक और पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 243 आधार अंक बढ़ी है। यह दर्शाता है कि भारत में व्यापारियों के बीच यूपीआई भुगतान का उपयोग लगातार मजबूत हो रहा है।
क्रेडिट कार्ड के जरिए खर्च की गई राशि जुलाई में 2.081 लाख करोड़ रुपए रही। यह जून की तुलना में 3.4 प्रतिशत अधिक है। कुल डिजिटल व्यापारी भुगतान में क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी 17.7 प्रतिशत रही।
वहीं डेबिट कार्ड के माध्यम से किए गए खर्च में सालाना आधार पर 0.8 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई। हालांकि मासिक आधार पर इसमें 7.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई और कुल खर्च बढ़कर 37,700 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रीपेड कार्ड के जरिए लगभग 6,600 करोड़ रुपए और डिजिटल वॉलेट्स के माध्यम से करीब 13,700 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। इस प्रकार दोनों माध्यमों से कुल 20,300 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में 41.1 प्रतिशत और जून के मुकाबले 4.3 प्रतिशत अधिक है।
इस दौरान, क्रेडिट कार्ड बाजार का विस्तार भी जारी रहा। जुलाई में प्रचलन में मौजूद क्रेडिट कार्डों की संख्या बढ़कर 12.29 करोड़ हो गई, जो पिछले महीने की तुलना में 12.67 लाख अधिक है।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म क्रेडिट कार्ड उपयोग का सबसे बड़ा माध्यम बने हुए हैं। जुलाई में कुल क्रेडिट कार्ड खर्च का 63.6 प्रतिशत हिस्सा ई-कॉमर्स के माध्यम से हुआ, जबकि जून में यह आंकड़ा 63.1 प्रतिशत था। प्रति क्रेडिट कार्ड औसत मासिक ई-कॉमर्स खर्च 10,772 रुपए रहा, जबकि पॉइंट-ऑफ-सेल मशीनों पर औसत खर्च 6,165 रुपए दर्ज किया गया।
लेनदेन के औसत आकार की बात करें तो ई-कॉमर्स पर एक क्रेडिट कार्ड लेनदेन का औसत मूल्य 4,301 रुपए रहा, जबकि दुकानों पर पॉइंट-ऑफ-सेल लेनदेन का औसत मूल्य 2,579 रुपए था।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रति क्रेडिट कार्ड औसत मासिक लेनदेन संख्या भी बढ़कर 4.90 हो गई, जो जून में 4.75 थी। यह उपभोक्ताओं द्वारा डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग और नकदी रहित लेनदेन की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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मुख्यमंत्री सेहत योजना: इलाज के बाद भी मरीजों से जुड़ी रहती है सरकार, 104 हेल्पलाइन से लिया जा रहा हालचाल
पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद भी जारी रखने की कोशिश की जा रही है. योजना के लाभार्थियों से 104 हेल्थ हेल्पलाइन के जरिए संपर्क कर उनके स्वास्थ्य, इलाज के अनुभव और डिस्चार्ज के बाद मिली दवाइयों की जानकारी ली जा रही है. सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य मरीजों को केवल कैशलेस इलाज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उपचार के बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़े रखना है.
कैशलेस इलाज के बाद आया फोन
मानसा के रहने वाले हरदेव सिंह ने बठिंडा के जिला अस्पताल में ऑर्थोपेडिक उपचार कराया. मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत उनका इलाज कैशलेस हुआ. अस्पताल से घर पहुंचने के बाद उन्हें 104 हेल्थ हेल्पलाइन से फोन आया और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली गई.
हरदेव सिंह के मुताबिक, फोन पर उनसे इलाज, तबीयत, दवाइयों और अस्पताल में मिले अनुभव को लेकर सवाल पूछे गए. उनका कहना है कि सरकार की ओर से डिस्चार्ज के बाद भी संपर्क किए जाने से उन्हें यह महसूस हुआ कि स्वास्थ्य व्यवस्था अभी भी उनकी स्थिति पर नजर रख रही है.
बलदेव सिंह ने भी साझा किया अनुभव
होशियारपुर के बलदेव सिंह ने दसूहा के एसडीएच में ऑर्थोपेडिक उपचार कराया. उन्होंने बताया कि योजना के तहत उन्हें बिना भुगतान किए इलाज मिला और डिस्चार्ज के बाद जरूरी दवाइयां भी उपलब्ध कराई गईं.
इसके बाद 104 टीम ने फोन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली. बलदेव सिंह ने कहा कि अस्पताल से घर लौटने के बाद सरकार की ओर से हालचाल पूछना अच्छा अनुभव रहा. उनके अनुसार, इससे मरीज को यह भरोसा मिलता है कि इलाज के बाद भी उसकी चिंता की जा रही है.
डिस्चार्ज के बाद भी फॉलो-अप
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना में मरीजों के उपचार के बाद फॉलो-अप को महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है. 104 हेल्पलाइन के जरिए लाभार्थियों से उनके इलाज, अस्पताल में रहने के अनुभव, डिस्चार्ज के बाद मिली दवाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर संतुष्टि के बारे में जानकारी ली जाती है.
सरकार का उद्देश्य मरीज को इलाज उपलब्ध कराने के साथ-साथ उसकी प्रतिक्रिया को भी स्वास्थ्य व्यवस्था तक पहुंचाना है.
मरीजों की प्रतिक्रिया से सेवाओं में सुधार
फॉलो-अप कॉल का एक अहम उद्देश्य मरीजों की वास्तविक समस्याओं और अनुभवों को समझना भी है. अस्पताल से लौटने के बाद यदि किसी लाभार्थी को दवा, उपचार या स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कोई परेशानी हुई है, तो उसकी जानकारी हेल्पलाइन के माध्यम से सामने आ सकती है.
इस तरह मरीजों की प्रतिक्रिया केवल औपचारिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं रहती, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
104 हेल्पलाइन पर कई स्वास्थ्य सेवाएं
104 हेल्थ हेल्पलाइन केवल मुख्यमंत्री सेहत योजना के लाभार्थियों के फॉलो-अप तक सीमित नहीं है. इसके माध्यम से मुफ्त चिकित्सा परामर्श और स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाता है. इसके अलावा मनोवैज्ञानिक एवं नशामुक्ति परामर्श, शिकायत निवारण और विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी भी दी जाती है.
लाभार्थियों को मुख्यमंत्री सेहत योजना की पात्रता और इसके तहत मिलने वाली सुविधाओं के बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है.
इलाज से आगे बढ़ी स्वास्थ्य सेवा की सोच
डॉ. बलबीर सिंह के मुताबिक, मरीज के अस्पताल से डिस्चार्ज होने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होनी चाहिए. फॉलो-अप के जरिए मरीज की बात सुनना और उसकी प्रतिक्रिया को संबंधित व्यवस्था तक पहुंचाना इस मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
पंजाब सरकार का दावा है कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया जा रहा है. कैशलेस उपचार के साथ डिस्चार्ज के बाद संपर्क की यह व्यवस्था मरीजों को यह भरोसा देने की कोशिश है कि स्वास्थ्य व्यवस्था उनके अस्पताल से घर लौटने के बाद भी उनके साथ जुड़ी हुई है.
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