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70 भेड़ों को बनाया शिकार, आखिर पिंजरे में कैद हुआ खूंखार तेंदुआ; गांववालों ने ली राहत की सांस

वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए इलाके में पिंजरा लगाया था और उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी. आखिरकार तेंदुआ इसी पिंजरे में फंस गया.

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Rani Laxmibai Scooty Yojana: छात्राओं को मिलेगी स्कूटी, 4 लीटर पेट्रोल भी फ्री; जानें कौन ले सकता है लाभ

Rani Laxmibai Scooty Yojana: उत्तर प्रदेश सरकार ने छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने और कॉलेज व विश्वविद्यालय तक उनकी आवाजाही आसान बनाने के उद्देश्य से रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना लागू की है. योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण करने वाली मेधावी छात्राओं में से निर्धारित मानकों के आधार पर चयन किया जाएगा. खास बात यह है कि चयनित छात्राओं को केवल स्कूटी ही नहीं मिलेगी, बल्कि इसके साथ चार लीटर पेट्रोल और कई जरूरी सुविधाएं भी पैकेज में शामिल होंगी.

टॉप 5 फीसदी छात्राओं का होगा चयन

योजना का लाभ उच्च शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले पात्र संस्थानों की मेधावी छात्राओं को दिया जाएगा. इसमें राज्य विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय, उनसे संबद्ध राजकीय और सहायता प्राप्त कॉलेज तथा अन्य पात्र संस्थान शामिल हैं.

शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं में से टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं को योजना के लिए चयनित किया जाएगा. संबंधित विश्वविद्यालय पात्र छात्राओं का रिकॉर्ड तैयार कर पोर्टल पर अपलोड करेंगे. इसके बाद निर्धारित मानकों के अनुसार अंतिम चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

स्कूटी के साथ मिलेंगी ये सुविधाएं

रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना की खासियत इसका पूरा पैकेज है. चयनित छात्राओं को स्कूटी के साथ चार लीटर पेट्रोल दिया जाएगा. इसके अलावा स्कूटी के पैकेज में पंजीकरण शुल्क, व्यापक वाहन बीमा, आईएसआई मार्क हेलमेट और आवश्यक एक्सेसरीज भी शामिल रहेंगी. इससे छात्राओं को स्कूटी मिलने के बाद शुरुआती खर्च को लेकर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा.

कौन-कौन छात्राएं होंगी पात्र?

योजना का लाभ लेने के लिए छात्रा का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना जरूरी है. इसके अलावा परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए.

सामान्य मेधावी छात्राओं के अलावा बलिदानी परिवारों की छात्राएं, दिव्यांग छात्राएं और निराश्रित छात्राएं भी योजना के दायरे में हैं. इन विशेष श्रेणियों के लिए निर्धारित मेरिट से 10 प्रतिशत कम अंक वाली छात्राओं को भी पात्रता देने का प्रावधान किया गया है.

यदि किसी पाठ्यक्रम में अंक की जगह CGPA प्रणाली लागू है, तो पात्रता संबंधित विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार प्राप्त CGPA के आधार पर तय की जाएगी.

विश्वविद्यालय बनाएंगे पात्र छात्राओं की सूची

शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं का विवरण संबंधित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से जुटाया जा रहा है. विश्वविद्यालय स्तर पर पात्रता सूची तैयार कर उसे पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा.

सूची पर संबंधित कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक के संयुक्त हस्ताक्षर होंगे. इसके बाद जिलाधिकारी पात्र छात्राओं की सूची सार्वजनिक कराएंगे. चयनित छात्राओं को स्कूटी आवंटित करने की जिम्मेदारी भी जिला स्तर पर होगी.

जिलों में समारोह आयोजित कर बांटी जाएगी स्कूटी

सरकार की योजना के अनुसार प्रत्येक जनपद में समारोह आयोजित कर चयनित छात्राओं को स्कूटी वितरित की जाएगी. इसके लिए जिलों को बजट प्रावधान के अनुसार आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी.

स्कूटी मिलने के बाद छात्राओं से प्राप्ति प्रमाण पत्र लिया जाएगा और संबंधित रिकॉर्ड को पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, जिससे वितरण प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार रहेगा.

अंतिम फैसला शासन स्तर पर होगा

हालांकि विश्वविद्यालय और जिला स्तर पर पात्रता से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जाएगी, लेकिन छात्राओं का अंतिम चयन शासन स्तर पर किया जाएगा. विश्वविद्यालयों को पात्र छात्राओं की सूची और संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी सूची में ऐसी छात्रा का नाम शामिल है, जिसके परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये से अधिक है, तो इसकी जानकारी तत्काल संबंधित विश्वविद्यालय को देनी होगी.

उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश

रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना का उद्देश्य केवल वाहन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि छात्राओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने और उनके आवागमन की समस्या कम करना भी है. खासकर उन छात्राओं के लिए यह सुविधा महत्वपूर्ण हो सकती है जिन्हें कॉलेज या विश्वविद्यालय तक पहुंचने में परिवहन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

योजना के तहत मेरिट, पात्रता और दस्तावेजों की जांच के बाद चयन पूरा किया जाएगा. ऐसे में पात्र छात्राओं को अपने विश्वविद्यालय और संबंधित कॉलेज की ओर से जारी सूचनाओं पर नजर रखना जरूरी होगा.

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  Sports

Rishabh Pant के 50 Test के बाद Ravichandran Ashwin की दो टूक सलाह: अब टीम की जरूरत के हिसाब से खेलें

रिषभ पंत ने श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 168 रन बनाकर दो अर्धशतक जरूर लगाए, लेकिन उनके प्रदर्शन को लेकर रविचंद्रन अश्विन पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर का मानना है कि पंत को अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के साथ-साथ मैच की स्थिति को समझने और टीम की जरूरत के मुताबिक फैसले लेने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अश्विन ने अपने कार्यक्रम ‘अश की बात’ में पंत की बल्लेबाजी पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों के आधार पर पंत के प्रदर्शन का आकलन करना सही नहीं होगा। उनके मुताबिक, पंत जिस तरह के जोखिम लेते हैं, उसमें यह समझना जरूरी है कि कब आक्रमण करना है और कब विकेट बचाकर खेलना है।

पंत की आक्रामक शैली पिछले कुछ महीनों से चर्चा का विषय रही है। उनके प्रशंसक अक्सर उनकी इसी बेखौफ बल्लेबाजी को उनकी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं, क्योंकि वह मुश्किल परिस्थितियों में भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, अश्विन का कहना है कि टेस्ट क्रिकेट में हर परिस्थिति में एक ही अंदाज से बल्लेबाजी करना टीम के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

उन्होंने पिछले साल गुवाहाटी में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पंत के आउट होने का उदाहरण भी दिया। उस मुकाबले में शुभमन गिल की गैरमौजूदगी में पंत भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे थे। उन्होंने मार्को यानसन की गेंद पर आगे बढ़कर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर के हाथों में चली गई।

अश्विन ने साफ किया कि उन्हें पंत के आक्रामक खेल से समस्या नहीं है। उनकी आपत्ति उन मौकों को लेकर है जब मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण स्थिति में हो और बल्लेबाज अनावश्यक जोखिम उठा ले। उन्होंने कहा कि वीरेंद्र सहवाग और एडम गिलक्रिस्ट जैसे बल्लेबाज भी आक्रामक क्रिकेट खेलते थे, लेकिन मैच की स्थिति को नजरअंदाज करके इस तरह के जोखिम नहीं लेते थे।

गौरतलब है कि पंत अब तक 50 टेस्ट मैच खेल चुके हैं। अश्विन के अनुसार, इतने अनुभव के बाद उनसे ज्यादा जिम्मेदारी की उम्मीद की जानी चाहिए। उन्होंने पंत को किसी विशेष प्रतिभा के नाम पर अतिरिक्त छूट देने के विचार पर भी सवाल उठाया। अश्विन का कहना है कि यशस्वी जायसवाल जैसे युवा खिलाड़ियों में भी असाधारण क्षमता है, इसलिए सिर्फ विशेष प्रतिभा होने के आधार पर किसी खिलाड़ी को आलोचना से बचाना उचित नहीं है।

अश्विन ने सिडनी और ब्रिस्बेन में पंत की शानदार पारियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंत ने वहां बेहतरीन पारियां खेलीं, लेकिन टेस्ट जीतने के लिए केवल एक खिलाड़ी का प्रदर्शन पर्याप्त नहीं होता। वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर जैसे खिलाड़ियों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा था। उनके मुताबिक, टेस्ट मैच को जीत तक पहुंचाने के लिए 11 खिलाड़ियों का योगदान चाहिए, जबकि एक गलत फैसला पूरे मैच को हाथ से निकाल सकता है।

बता दें कि पंत फिलहाल भारत की एकदिवसीय और टी20 टीम से बाहर हैं और मुख्य रूप से टेस्ट क्रिकेट में ही भारतीय टीम का हिस्सा हैं। अश्विन मानते हैं कि अगर पंत अपनी बल्लेबाजी में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव लाते हैं तो उनके लिए सीमित ओवरों की टीम में वापसी का रास्ता भी खुल सकता है।

अश्विन ने यहां तक कहा कि जिस दिन पंत को उनकी कमियों के बारे में साफ और ईमानदार प्रतिक्रिया मिलने लगेगी, वह तीनों प्रारूपों में दोबारा भारत के लिए खेलने की स्थिति में पहुंच सकते हैं। उनके मुताबिक, पंत की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन अब उनके खेल में जिम्मेदारी और बेहतर निर्णय लेने की जरूरत है। यही बदलाव उन्हें एक शानदार टेस्ट बल्लेबाज से फिर से भारत के तीनों प्रारूपों के भरोसेमंद खिलाड़ी में बदल सकता है।
Fri, 28 Aug 2026 18:54:00 +0530

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