दुनिया की टॉप खुफिया एजेंसी अमेरिका की सीआईए। सीआईए के चीफ रेडक्लिफ अचानक C17 में बैठकर रूस पहुंचते हैं और यह जानकारी दुनिया में किसी को नहीं पता होती। उसकी पुष्टि दो दिन बाद होती है और पुष्टि भी इस तरीके से होती है कि हां गए थे लेकिन किस लिए गए थे यह नहीं पता चलता। खबरें यह निकल कर सामने आती है कि जिन दो दिन सीआईए का प्रतिनिधिमंडल इंक्लूडिंग देयर चीफ रूस में मौजूद थे। उस दौरान दो दिन यूक्रेन की तरफ से कोई भी मिसाइल या फिर ड्रोन हमला नहीं किया गया था। मतलब अमेरिका पहले बता चुका था कि हम यहां पर आने वाले हैं। रूस यूक्रेन युद्ध को खत्म कर दे उसको लेकर था या फिर पुतिन कुछ ऐसा करने जा रहे थे जिसको लेकर ट्रंप ने अपने दूत को तुरंत वहां पर दौड़ा दिया।
डेली मेल के अनुसार, माना जाता है कि रैटक्लिफ ने रूसी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि वे संघर्ष को और न बढ़ाएं, जिसमें परमाणु हथियारों का इस्तेमाल भी शामिल है। खबरों के मुताबिक, यह चेतावनी "बस ऐसा न करें" के अंदाज़ में थी और यह अमेरिकी खुफिया जानकारी के आकलन पर आधारित थी कि युद्ध के मैदान में फिर से मिली हार के बाद रूस तेज़ी से और बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब यूक्रेन को ब्रिटेन की बढ़ती सैन्य मदद की वजह से मॉस्को और यूके के बीच तनाव बढ़ गया है। अमेरिका की कथित चेतावनी और यूक्रेन से जुड़ी एक दिलचस्प घटना एक ही समय पर हुई।
'कीव इंडिपेंडेंट' ने हालात की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के हवाले से बताया कि वॉशिंगटन ने कीव से कहा था कि जब रैटक्लिफ रूस में हों, तो वे मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग पर हमले न करें। 'कीव इंडिपेंडेंट' के सूत्र ने दावा किया कि कीव 24 से 26 अगस्त के बीच इन दो शहरों पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गया था। साथ ही, सूत्र ने यह भी कहा कि अमेरिकी अधिकारियों को नहीं लगता था कि इन शहरों के आस-पास रूस की एयर डिफेंस सिस्टम सुरक्षा की गारंटी देने के लिए काफी मजबूत थी।
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