जरूरत की खबर- रक्षाबंधन पर खेलें फन फैमिली गेम्स:भाई-बहन से लेकर मम्मी–पापा, दादा-दादी को भी करें शामिल, राखी को बनाएं यादगार
रक्षाबंधन के मौके पर पूरा परिवार एक साथ जुटता है। भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी, बुआ, चाचा और अन्य रिश्तेदारों से घर गुलजार हो जाता है। जब पूरा परिवार साथ हो तो क्यों न कुछ मजेदार फन गेम्स हो जाएं। इसलिए इस राखी हम आपके लिए कुछ ऐसे फन गेम्स लेकर आए हैं, जिन्हें बच्चे, युवा और बुजुर्ग समेत परिवार का हर सदस्य साथ मिलकर खेल सकता है। ये गेम्स न सिर्फ हंसी-ठिठोली और मनोरंजन का मौका देंगे, बल्कि परिवार के साथ बिताए गए पलों को यादगार बना देंगे। तो चलिए, आज ‘जरूरत की खबर’ में बात करते हैं– फैमिली फन गेम की। फैमिली के लिए फन गेम्स पूरे परिवार को एक साथ शामिल करना हो तो डंब शराड्स, पिक्शनरी, अंताक्षरी या पासिंग द पार्सल जैसे गेम्स अच्छे ऑप्शन हैं। इसे एक-एक करके समझिए- डंब शराड्स पिक्शनरी पासिंग द पार्सल इन गेम्स की खासियत ये है कि इन्हें परिवार के अलग-अलग उम्र के लोग एक साथ खेल सकते हैं। ग्राफिक में फन फैमिली गेम्स की लिस्ट देखिए- परफेक्ट गेम कैसे चुनें? गेम चुनते समय इन बातों का ध्यान रखें- भाई-बहन के बीच मजेदार टक्कर रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते को सेलिब्रेट करने का दिन है। इसलिए कुछ गेम्स उनके बीच रखें। ‘हू नोज मी बेटर’ इसका एक बढ़िया विकल्प है। इसमें एक खिलाड़ी अपने बारे में सवाल पूछता है और बाकी लोग उनके जवाब लिखते हैं। जिसके सबसे ज्यादा जवाब सही होते हैं, वह विजेता बनता है। सवाल कुछ इस तरह के हो सकते हैं- हर सही जवाब के लिए एक अंक दें। आखिर में सबसे ज्यादा अंक पाने वाला खिलाड़ी जीत जाता है। रैपिड फायर भी अच्छा विकल्प है। इसमें एक-दूसरे से लगातार छोटे-छोटे सवाल पूछे जाते हैं और जवाब देने के लिए 5-10 सेकेंड का समय दिया जाता है। कम समय में सबसे ज्यादा सही जवाब देने वाला खिलाड़ी विजेता होता है। ग्राफिक में भाई-बहन के लिए फन गेम्स देखिए- घर पर कैसे खेलें 'ट्रेजर हंट'? अगर परिवार में बच्चे और युवा ज्यादा हैं तो रक्षाबंधन पर ट्रेजर हंट गेम खेला जा सकता है। इसमें- उदाहरण के लिए, पहला क्लू डाइनिंग टेबल के पास रखा जा सकता है। उस पर लिखा हो- "जहां पूरा परिवार रोज साथ बैठकर खाना खाता है, अगला क्लू वहीं मिलेगा।" बचपन की तस्वीरों से यादें होंगी ताजा रक्षाबंधन पर ‘गेस द चाइल्डहुड फोटो’ भी खेल सकते हैं। परिवार के सदस्यों की बचपन की तस्वीरें इकट्ठी करें और एक-एक करके सभी को दिखाएं। बाकी लोग अनुमान लगाएं कि तस्वीर किसकी है। इस गेम को और मजेदार बनाने के लिए तस्वीर के साथ छोटे-छोटे सवाल भी जोड़े जा सकते हैं। जैसेकि- इस गेम के साथ परिवार की पुरानी यादें भी ताजा होंगी। 'वन-मिनट गेम्स' से बढ़ाएं कम्पटीशन अगर परिवार में ज्यादा लोग हैं तो ‘वन मिनट गेम्स’ अच्छे विकल्प हैं। इनमें हर खिलाड़ी को एक छोटा टास्क दिया जाता है, जिसे उसे एक मिनट के अंदर पूरा करना होता है। ग्राफिक में वन मिनट गेम्स देखिए- इनमें से ऐसे गेम चुनें, जिनमें चोट लगने का जोखिम न हो। छोटे बच्चों को निगरानी में खेलने को कहें। छोटे बच्चों के लिए मजेदार गेम्स छोटे बच्चों के लिए ऐसे खेल चुनें, जिनमें ज्यादा कठिन नियम न हों। ‘कलर हंट’ इसका एक अच्छा विकल्प है। ग्राफिक में छोटे बच्चों के लिए गेम्स देखिए- बुजुर्गों संग पुरानी यादें करें ताजा बुजुर्गों के लिए याददाश्त, संगीत और बातचीत से जुड़े गेम चुने जा सकते हैं। इसके लिए परिवार के किसी सदस्य से जुड़ी यादों को गेम का हिस्सा बना सकते हैं। बुजुर्ग से ये सवाल पूछ सकते हैं- इस तरह बच्चे और युवा भी परिवार की पुरानी कहानियों के बारे में जान पाएंगे। बुजुर्गों के लिए गेम्स ग्राफिक में देखिए- फैमिली क्विज में पूछें मजेदार और चटपटे सवाल फैमिली क्विज को सामान्य सवालों की जगह परिवार से जुड़े सवालों पर आधारित करें। इससे गेम मजेदार बनेगा। ग्राफिक में फैमिली क्विज के सवाल देखिए- हारने वाले को दें फनी पनिशमेंट गेम में हारने वाले के लिए फनी ‘पनिशमेंट’ भी रखा जा सकता है, लेकिन इसे मजेदार और आसान रखें। ऐसा टास्क न दें, जिससे किसी को असहज महसूस हो। परिवार के सभी सदस्यों की उम्र और सहजता का ध्यान रखें। ग्राफिक में फनी पनिशमेंट आइडियाज देखिए- गेम्स का मकसद जीतना नहीं, साथ समय बिताना फैमिली गेम्स का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इनसे परिवार के सदस्यों को एक साथ समय बिताने का मौका मिलता है। खासकर जब बच्चे और युवा मोबाइल या दूसरे स्क्रीन में ज्यादा समय बिताते हैं, तब ऐसे गेम कुछ समय के लिए सभी का ध्यान एक-दूसरे की तरफ ला सकते हैं। ग्राफिक में फैमिली गेम्स के सभी फायदे देखिए- आखिर में बनाएं ‘फैमिली विनर’ अगर कई गेम्स खेले जा रहे हैं तो हर गेम का अलग विजेता चुनने की बजाय पॉइंट सिस्टम अपनाएं। गेम जीतने वाले को 5 पॉइंट, दूसरे स्थान पर आने वाले को 3 और तीसरे स्थान पर आने वाले को 1 पॉइंट दें। सभी गेम्स खत्म होने पर सबसे ज्यादा पॉइंट हासिल करने वाले को ‘फैमिली विनर’ का टाइटल दें। इसके लिए महंगे गिफ्ट की जरूरत नहीं है। हाथ से बनाया गया सर्टिफिकेट, चॉकलेट या परिवार की तरफ से कोई मजेदार टाइटल भी दे सकते हैं, जैसेकि- रक्षाबंधन सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि रिश्तों को फिर से तरोताजा करने का मौका है। इस बार महंगे उपहारों से ज्यादा अपना 'समय' और 'खुशियां' एक-दूसरे को गिफ्ट करें। छोटे-छोटे ये फन गेम्स आपके त्यौहार में वो रंग भर देंगे, जिसकी चमक सालों तक फीकी नहीं पड़ेगी। तो देर किस बात की? इस रक्षाबंधन आप भी मनाइए यादगार राखी! ……………………………… ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- इस राखी बिना गैस-ओवन के बनाएं मिठाई:ये 5 मिठाइयां सिर्फ 15 मिनट में होंगी तैयार, शेफ से जानें बनाने का सही तरीका रक्षाबंधन पर घर में मिठाई न हो, ऐसा हो नहीं सकता। लेकिन हर बार पेड़ा, बर्फी, लड्डू या रसगुल्ला बाजार से खरीदकर लाना भी जरूरी नहीं है। अगर इस बार कुछ अलग ट्राई करना चाहते हैं तो ऐसी मिठाइयां बना सकते हैं, जिनके लिए न गैस जलाने की जरूरत है, न ओवन की। पूरी खबर पढ़ें…
जब जेल में बहनों ने बांधी संजय दत्त को राखी:रक्षाबंधन पर बहनों को तोहफे में दिए थे चाय-नाश्ते के 2-2 रुपए के कूपन
रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है। भाई भी अपनी बहन को कुछ न कुछ गिफ्ट देता है, लेकिन संजय दत्त की जिंदगी में एक रक्षाबंधन ऐसा भी आया था, जब उनकी बहनों ने उन्हें जेल में राखी बांधी और उन्हें तोहफे में 2-2 रुपए के कूपन दिए थे। 1994 में संजय दत्त ठाणे सेंट्रल जेल में थे बात जुलाई 1994 की है। अवैध हथियार रखने के मामले में संजय दत्त की अंतरिम जमानत रद्द हो गई थी। इसके बाद उन्हें ठाणे सेंट्रल जेल भेज दिया गया। उन्हें जेल की सबसे कड़ी सुरक्षा वाली अंडा बैरक में रखा गया था। यहां खतरनाक अपराधियों और टाडा के आरोपियों को रखा जाता था। संजय दत्त पर लिखी यासिर उस्मान की किताब के मुताबिक, संजय दत्त जिस बैरक में थे, वह करीब 10x10 फीट की थी। वहां न धूप आती थी और न बाहर की दुनिया दिखाई देती थी। कमरे में एक छोटा बल्ब, गद्दा और बिना फ्लश वाला शौचालय था। संजय ने बाद में बताया था कि जेल में शुरुआती डेढ़ महीने काफी मुश्किल रहे। उन्हें दूसरे कैदियों से मिलने की इजाजत भी नहीं थी। अकेलापन इतना ज्यादा था कि वह समय बिताने के लिए घंटों चींटियों को चलते देखते थे। इस मुश्किल समय में उनके पिता सुनील दत्त बेटे की जमानत के लिए लगातार कोशिश कर रहे थे। वहीं उनकी बहनें प्रिया और नम्रता भी संजय से मिलने जेल जाती थीं। कई बार उन्हें भाई से दूर से ही मिलने का मौका मिलता था। वहीं, रक्षाबंधन पर बहनों ने जेल में उन्हें राखी बांधी। उस समय संजय के पास देने के लिए कोई तोहफा नहीं था। उन्होंने अपनी बहनों को सिर्फ जेल की कैंटीन के दो-दो रुपए वाले चाय-नाश्ते के कूपन दिए और कहा था, ‘मेरे पास फिलहाल यही है।’ बता दें कि संजय दत्त और उनकी बहनों के रिश्ते में उतार-चढ़ाव आए। साल 2008 में संजय दत्त ने मान्यता दत्त से शादी की थी। शुरुआत में परिवार के कुछ सदस्यों ने इस रिश्ते को आसानी से स्वीकार नहीं किया था। प्रिया और मान्यता के बीच भी कुछ समय तक दूरी रही। संजय के राजनीति में आने को लेकर भी प्रिया से उनके मतभेद सामने आए थे। लेकिन बाद में परिवार में रिश्ते सुधरते गए। संजय और मान्यता के जुड़वां बच्चों के जन्म के बाद दूरियां कम हुईं। साल 2020 में संजय दत्त को कैंसर हुआ, तो उनकी बहनें फिर उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं। प्रिया और नम्रता ने इलाज के दौरान भाई का साथ दिया। ……….. यह खबर भी पढ़ें… ‘अरे बेवकूफों, क्या एक मुसलमान, मुसलमान को राखी बांधता है?’: पत्नी जरीना वहाब को दाऊद इब्राहिम से जोड़ने पर भड़के थे आदित्य पंचोली 2000 के दशक में कुछ हिंदी अखबारों और मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि मुंबई में आदित्य पंचोली की 'दादागिरी' इसलिए चलती है क्योंकि उनकी पत्नी और अभिनेत्री जरीना वहाब अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को राखी बांधती हैं। इस दावे पर आदित्य पंचोली ने कड़ी नाराजगी जताई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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