दिशा पाटनी 500 रुपए लेकर मुंबई आई थीं:‘हीरोपंती’ के ऑडिशन में फेल हुईं; इंजीनियरिंग छोड़ी, फिर ‘एमएस धोनी’ से बनीं स्टार
दिशा पाटनी की बॉलीवुड तक पहुंचने की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बरेली से निकलकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बीच मॉडलिंग शुरू करने वाली दिशा 500 रुपए लेकर मुंबई पहुंची थीं। यहां उन्हें लगातार ऑडिशन देने पड़े और ‘हीरोपंती’ का ऑडिशन फेल हो गया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और इंजीनियरिंग छोड़कर एक्टिंग को करियर बना लिया। 2015 में ‘लोफर’ से फिल्मी सफर शुरू हुआ, लेकिन 2016 की ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई। इसके बाद ‘बागी 2’, ‘भारत’, ‘मलंग’ और ‘कल्कि 2898 एडी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया। हाल में उनकी मल्टीस्टार फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ और ‘अवारापन 2’ रिलीज हुई है। आज की सक्सेस स्टोरी में दिशा पाटनी की निजी जिंदगी और करियर से जुड़ी कुछ और खास बातें... बरेली में जन्म, पुलिस अधिकारी पिता और हेल्थ इंस्पेक्टर मां का परिवार दिशा पाटनी का जन्म 13 जून 1992 को उत्तर प्रदेश के बरेली में हुआ। उनका परिवार उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की राजपूत पृष्ठभूमि से आता है। उनके पिता जगदीश सिंह पाटनी पुलिस अधिकारी और मां हेल्थ इंस्पेक्टर हैं। बड़ी बहन खुशबू पाटनी भारतीय सेना में मेजर रह चुकी हैं और फिटनेस से भी जुड़ी हैं। छोटा भाई सूर्यांश पाटनी है। जिस दुनिया में दिशा बाद में ग्लैमर और फिल्म स्टारडम के लिए पहचानी गईं, उसकी शुरुआत एक सामान्य और अनुशासित पारिवारिक माहौल से हुई थी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बीच आया मॉडलिंग का मौका दिशा ने लखनऊ की एमिटी यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की थी। लेकिन उनकी जिंदगी में ऐसा मोड़ आया, जिसने उन्हें पढ़ाई से कैमरे की दुनिया तक पहुंचा दिया। दिशा ने बाद में ‘आज तक’ को दिए इंटरव्यू में बताया था कि वह नोएडा से बीटेक कर रही थीं और सेकेंड ईयर में उन्हें मॉडलिंग के ऑफर मिलने लगे। इन्हीं ऑफर्स से उनका मुंबई आना-जाना शुरू हुआ। पढ़ाई और मॉडलिंग के बीच संतुलन बनाना मुश्किल होता गया। आखिरकार उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई दूसरे साल में छोड़ दी और मॉडलिंग को करियर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। तब शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि कैमरे के सामने किया यह काम आगे चलकर उन्हें बॉलीवुड के बड़े सितारों के बीच पहुंचा देगा। 18 साल की उम्र में मॉडलिंग, फिर मिस इंडिया तक पहुंचीं दिशा ने कम उम्र में मॉडलिंग शुरू कर दी थी। 2020 में ‘फिल्मीबीट’ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्होंने 18 साल की उम्र में मॉडल के तौर पर काम शुरू किया था। उनके मुताबिक उस समय उन पर कई जिम्मेदारियां थीं और उन्होंने परिवार पर आर्थिक रूप से निर्भर रहने के बजाय खुद काम करके अपना खर्च संभाला। 19 साल की उम्र में जब वह मुंबई आई थीं, तब शहर में उन्हें कोई जानने वाला नहीं था। फिल्मी परिवार से न होने के कारण उन्हें अपना रास्ता खुद बनाना था। वह अकेली रहती थीं, ऑडिशन देती थीं और अपनी जरूरतों का खर्च खुद उठाती थीं। मुंबई आने के समय उनके पास सिर्फ 500 रुपए थे। टीवी विज्ञापनों के ऑडिशन रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए थे। किराया देने का दबाव इतना था कि उनके लिए हर काम पहले नौकरी जैसा था। मॉडलिंग के दौरान दिशा ने कई विज्ञापनों में काम किया। 2013 में उन्होंने पॉन्ड्स फेमिना मिस इंडिया इंदौर प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और फर्स्ट रनर-अप रहीं। इससे उन्हें मॉडलिंग में और पहचान मिली। दिशा का लक्ष्य सिर्फ रैंप तक सीमित नहीं था। कैमरे के सामने काम करते हुए उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें एक्टिंग ज्यादा पसंद है। मॉडलिंग उनके लिए मंजिल के बजाय बॉलीवुड तक पहुंचने का रास्ता बनने लगी। पहला ऑडिशन सफल नहीं हुआ, ‘हीरोपंती’ में मौका हाथ से निकला दिशा की कहानी का दिलचस्प हिस्सा यह है कि उनका पहला बड़ा फिल्मी ऑडिशन सफल नहीं हुआ था। उन्होंने टाइगर श्रॉफ की डेब्यू फिल्म ‘हीरोपंती’ के लिए ऑडिशन दिया था। उस समय दिशा और टाइगर एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे। ‘बॉलीवुड हंगामा’ को दिए इंटरव्यू में दिशा ने बताया था कि उस समय वह पढ़ाई कर रही थीं और एक शूट के सिलसिले में मुंबई आई थीं। वह खुद को एक्टर नहीं मानती थीं और एक्टिंग के बारे में ज्यादा नहीं जानती थीं। उन्हें सिर्फ ऑडिशन के लिए बुलाया गया था। दिशा ने माना कि उनका ऑडिशन खराब था। उन्होंने यह भी बताया कि वह फिल्म के बारे में ज्यादा नहीं जानती थीं और मुंबई शिफ्ट भी नहीं हुई थीं। जिस फिल्म से टाइगर श्रॉफ का बॉलीवुड डेब्यू हुआ, उसी फिल्म में दिशा का सफर शुरू नहीं हो सका। लेकिन यह असफलता आगे की कहानी में अहम साबित हुई, क्योंकि दिशा रुकी नहीं। तेलुगु फिल्म ‘लोफर’ से एक्टिंग डेब्यू 2015 में दिशा को फिल्मी दुनिया में पहला बड़ा मौका मिला। उन्होंने पुरी जगन्नाध की तेलुगु फिल्म ‘लोफर’ में वरुण तेज के साथ काम किया। फिल्म में उन्होंने मौनी का किरदार निभाया था। यहीं से उनका आधिकारिक एक्टिंग करियर शुरू हुआ। ‘लोफर’ बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी। लेकिन दिशा के लिए यह फिल्म महत्वपूर्ण थी, क्योंकि उन्हें पहली बार बड़े पर्दे पर खुद को साबित करने का मौका मिला था। कई कलाकारों के लिए पहली फिल्म की असफलता करियर रोक देती है। दिशा के मामले में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने अगले मौके का इंतजार किया और वही फिल्म उनके करियर की बड़ी शुरुआती सीढ़ी बनी। ‘एमएस धोनी’ ने बदली किस्मत 2016 में दिशा को वह फिल्म मिली जिसने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई- ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’। नीरज पांडे निर्देशित इस फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत ने महेंद्र सिंह धोनी की भूमिका निभाई थी। दिशा ने प्रियंका झा का किरदार निभाया, जो धोनी की जिंदगी का बेहद भावनात्मक अध्याय था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता साबित हुई और दिशा के काम को नोटिस किया गया। उनका स्क्रीन टाइम ज्यादा नहीं था, लेकिन प्रियंका के किरदार की कहानी भावनात्मक थी। यही वजह रही कि उनकी स्क्रीन प्रेजेंस दर्शकों को याद रह गई। इस फिल्म के बाद दिशा को सिर्फ मॉडल या नई एक्ट्रेस के तौर पर नहीं देखा गया। उन्हें ऐसी अभिनेत्री के रूप में पहचान मिलने लगी, जिसमें ग्लैमर के साथ भावनात्मक किरदार निभाने की क्षमता है। इस फिल्म के लिए उन्हें आईफा में ‘स्टार डेब्यू ऑफ द ईयर- फीमेल’ का पुरस्कार मिला। इसके अलावा उन्हें कई अन्य डेब्यू अवॉर्ड्स और नामांकन मिले। जैकी चैन के साथ इंटरनेशनल प्रोजेक्ट ‘एमएस धोनी’ के बाद दिशा का अगला बड़ा पड़ाव बॉलीवुड के बाहर था। 2017 में वह जैकी चैन की फिल्म ‘कुंग फू योगा’ में नजर आईं। फिल्म में सोनू सूद और अन्य कलाकार भी थे। इस प्रोजेक्ट से दिशा को इंटरनेशनल दर्शकों के सामने आने का मौका मिला। एक तरफ वह बॉलीवुड में जगह बनाने की कोशिश कर रही थीं और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट का अनुभव ले रही थीं। लेकिन दिशा को असली कमर्शियल स्टारडम अभी मिलना बाकी था। ‘बागी 2’ ने बनाया कमर्शियल स्टार 2018 में दिशा की फिल्म ‘बागी 2’ रिलीज हुई। इसमें वह टाइगर श्रॉफ के साथ नजर आईं। दोनों इससे पहले म्यूजिक वीडियो ‘बेफिक्रा’ में साथ काम कर चुके थे। ‘बागी 2’ उनकी टाइगर श्रॉफ के साथ पहली फिल्म थी, जिसमें दोनों की जोड़ी बड़े पर्दे पर दिखाई दी। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त प्रदर्शन किया और दुनिया भर में 258 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया। यह 2018 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों में शामिल रही। दिशा के लिए ‘बागी 2’ महत्वपूर्ण थी, क्योंकि इससे उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। उनका ग्लैमरस लुक, फिटनेस और टाइगर के साथ ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री चर्चा में रही। हालांकि समीक्षकों ने उनके किरदार की सीमाओं पर सवाल भी उठाए। दिशा के करियर की दिलचस्प सच्चाई यही रही- उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई, लेकिन बतौर अभिनेत्री उन्हें मजबूत भूमिकाओं की तलाश भी रही। सलमान खान के साथ ‘भारत’, फिर ‘राधे’ 2019 में दिशा को सलमान खान के साथ काम करने का मौका मिला। अली अब्बास जफर की ‘भारत’ में उन्होंने राधा का किरदार निभाया और ‘स्लो मोशन’ गाने में सलमान के साथ नजर आईं। फिल्म कमर्शियल तौर पर सफल रही और साल की बड़ी फिल्मों में शामिल हुई। दिशा ने ‘भारत’ को लेकर कहा था कि वह फिल्म से खुश थीं, क्योंकि उन्हें डांस करना पसंद है और वह ऐसा बॉलीवुड गाना करना चाहती थीं। उन्होंने सलमान खान और कोरियोग्राफर वैभवी मर्चेंट के साथ काम करने को खास अनुभव बताया था। इसके बाद सलमान और दिशा की जोड़ी ‘राधे’ में फिर नजर आई। हालांकि फिल्म को आलोचकों से खास प्रतिक्रिया नहीं मिली और कोविड-19 के कारण इसकी रिलीज प्रभावित हुई। ‘मलंग’ में ग्लैमर से आगे बढ़ने की कोशिश 2020 की ‘मलंग’ दिशा के लिए अलग तरह का प्रोजेक्ट था। मोहित सूरी की इस फिल्म में उनके साथ आदित्य रॉय कपूर, अनिल कपूर और कुणाल खेमू थे। दिशा ने सारा नांबियार का किरदार निभाया। फिल्म को व्यावसायिक रूप से मध्यम सफलता मिली, लेकिन दिशा को पहले की तुलना में ज्यादा स्क्रीन स्पेस मिला। उनके स्क्रीन टाइम और प्रदर्शन को सकारात्मक तरीके से नोट किया गया था। दिशा ने अपने करियर को लेकर कहा था कि वह सिर्फ नंबर वन बनने के लिए फिल्में साइन नहीं करतीं। उनके लिए जरूरी है कि वह चुनी गई भूमिका के सफर को एंजॉय करें। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म चुनते समय वह अपनी ‘इनर वॉइस’ पर भरोसा करती हैं। यही बात दिशा की करियर स्ट्रैटेजी को अलग करती है। उनकी फिल्मोग्राफी में बड़ी कमर्शियल फिल्में हैं, लेकिन उन्होंने खुद को हर फिल्म में एक ही तरह से पेश करने की कोशिश नहीं की। ‘हर फिल्म के सेट पर खुद को नया कलाकार मानती हूं’ अपने एक्टिंग ग्रोथ को लेकर दिशा पाटनी ने कहा था कि हर फिल्म करते समय उन्हें लगता है कि उन्होंने पहले जो सीखा था, वह भूल गई हैं और सेट पर खुद को नए कलाकार की तरह महसूस करती हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक्टिंग की कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली। उन्होंने ऑडिशन और काम करते हुए एक्टिंग सीखी। उनके लिए हर फिल्म सीखने की प्रक्रिया रही। यह बयान अहम है, क्योंकि दिशा का करियर किसी फिल्म स्कूल या लंबे थिएटर अनुभव से शुरू नहीं हुआ था। मॉडलिंग, विज्ञापन, ऑडिशन और लगातार काम- यही उनका प्रशिक्षण बनता गया। फिटनेस और एक्शन बनीं पहचान दिशा की पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही। फिटनेस और डांस उनकी पब्लिक इमेज का बड़ा हिस्सा हैं। जिम, जिम्नास्टिक और फिटनेस से जुड़े वीडियो और तस्वीरों के कारण वह सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहती हैं। एक्शन फिल्मों में भी उनकी रुचि दिखाई दी। दिशा ने कहा था कि वह एक आउट-एंड-आउट एक्शन फिल्म करना चाहती हैं। उनके मुताबिक अगर दर्शक किसी लड़की को एक्शन करते हुए देखना चाहते हैं और उनकी धारणा बदलती है, तो ऐसी फिल्मों के लिए रास्ता और खुलेगा। यानी दिशा खुद को सिर्फ ग्लैमरस भूमिकाओं तक सीमित नहीं देखना चाहती थीं। ‘राधे’ से ‘एक विलेन रिटर्न्स’ तक आया उतार ‘मलंग’ के बाद दिशा के करियर में उतार-चढ़ाव आए। 2021 में ‘राधे’ रिलीज हुई और 2022 में वह ‘एक विलेन रिटर्न्स’ में नजर आईं। दोनों फिल्मों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। ‘एक विलेन रिटर्न्स’ में उन्होंने थ्रिलर कहानी से जुड़ा किरदार निभाया, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। इसके बाद 2024 में ‘योद्धा’ आई। फिल्म में दिशा ने एक्शन से जुड़ा किरदार निभाया और उनके फाइट सीक्वेंस की तारीफ हुई, हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही। लेकिन उसी साल ‘कल्कि 2898 एडी’ ने तस्वीर बदल दी। फिल्म में दिशा का रोल छोटा था, लेकिन यह जबरदस्त कमर्शियल सफलता रही। ‘कंगुवा’ और नई इंडस्ट्री में कदम 2024 में दिशा ने तमिल सिनेमा में कदम रखा। वह सूर्या स्टारर ‘कंगुवा’ में नजर आईं और एंजेलिना का किरदार निभाया। हालांकि फिल्म को मिश्रित प्रतिक्रिया मिली और उनके किरदार के स्क्रीन स्पेस पर भी सवाल उठे। यह दौर बताता है कि दिशा का करियर हमेशा सीधी रेखा में नहीं चला। कभी बड़ी हिट मिली, कभी फिल्म असफल हुई, कभी भूमिका की तारीफ हुई तो कभी सीमित स्क्रीन टाइम के लिए आलोचना झेलनी पड़ी। 2026 में भी जारी है सफर 2025 में उनकी कोई फिल्म रिलीज नहीं हुई, लेकिन 2026 में दिशा की फिल्मोग्राफी में कई प्रोजेक्ट जुड़े। ‘ओ'रोमियो’ में वह जूली के किरदार में नजर आईं। इसके अलावा ‘वेलकम टू द जंगल’ और ‘अवारापन 2’ भी उनके करियर का हिस्सा बने। ‘अवारापन 2’ में उन्होंने इमरान हाशमी के साथ मुख्य भूमिका निभाई। यह 2007 की चर्चित ‘अवारापन’ का सीक्वल है। अपने करियर के एक दशक से ज्यादा समय बाद भी दिशा अलग-अलग तरह के प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बन रही हैं। स्टारडम के बीच भी खुद को ‘इंट्रोवर्ट’ मानती हैं दिशा की सोशल मीडिया छवि बेहद ग्लैमरस है, लेकिन ‘फिल्मीबीट’ से बातचीत में उन्होंने वास्तविक जीवन को काफी अलग बताया था। उन्होंने कहा था कि वह इंट्रोवर्ट हैं, सामाजिक कार्यक्रमों में असहज महसूस करती हैं और घर पर रहना ज्यादा पसंद करती हैं। बचपन के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि स्कूल में उनके छोटे बाल थे, वह टॉमबॉय की तरह रहती थीं और उन्हें ‘जादू’ कहकर चिढ़ाया जाता था। लेकिन उस समय वह अपनी छोटी-सी दुनिया में इतनी व्यस्त रहती थीं कि इन बातों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेती थीं। शायद यही वजह है कि कैमरे के सामने आत्मविश्वासी दिखाई देने वाली दिशा निजी जिंदगी में खुद को अलग तरह से देखती हैं। _______________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़ें.. रेणुका शहाणे कास्टिंग काउच से जूझीं:‘हम आपके...’ के बाद फिल्में छोड़ीं; एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर वाली महिला का रोल किया, लोग बोले- उम्मीद नहीं थी रेणुका शहाणे का नाम आते ही लोगों के जेहन में ‘हम आपके हैं कौन’ की संस्कारी भाभी पूजा और ‘सुरभि’ का सहज चेहरा उभरता है। लेकिन उनकी कहानी सिर्फ एक सुपरहिट फिल्म और लोकप्रिय टीवी शो तक सीमित नहीं है। मनोविज्ञान की पढ़ाई से लेकर थिएटर, टीवी, फिल्मों और निर्देशन तक रेणुका ने हर पड़ाव पर अपनी शर्तों पर काम किया।पूरी खबर पढ़ें..
‘अरे बेवकूफों, क्या एक मुसलमान, मुसलमान को राखी बांधता है?’:पत्नी जरीना वहाब को दाऊद इब्राहिम से जोड़ने पर भड़के थे आदित्य पंचोली
2000 के दशक में कुछ हिंदी अखबारों और मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि मुंबई में आदित्य पंचोली की 'दादागिरी' इसलिए चलती है क्योंकि उनकी पत्नी और अभिनेत्री जरीना वहाब अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को राखी बांधती हैं। इस दावे पर आदित्य पंचोली ने कड़ी नाराजगी जताई थी। आप की अदालत में दिए एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “मेरी बीवी 17 साल की उम्र से फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रही है। एक भी उंगली आज तक उस पर नहीं उठी। वह एक मुस्लिम औरत है। मैं बोलता हूं, वो पाक है, देवी है।" उन्होंने आगे कहा था, "उसके बारे में लिखा गया कि वो इसलिए दादागिरी करता है क्योंकि आदित्य पंचोली की बीवी जरीना वहाब, दाऊद इब्राहिम को राखी बांधती है। अरे बेवकूफों, लिखने से पहले सोचो, क्या एक मुसलमान, मुसलमान को राखी बांधता है?” आदित्य और जरीना की मुलाकात 1986 में हुई थी आदित्य पंचोली और जरीना वहाब की लव स्टोरी बॉलीवुड की सबसे चर्चित और अनोखी कहानियों में से एक है। दोनों की पहली मुलाकात साल 1986 में नारी हीरा की वीडियो फिल्म ‘कलंक का टीका’ के सेट पर हुई थी। जरीना वहाब के मुताबिक, आदित्य उनसे उम्र में लगभग 5 साल छोटे थे और पहली मुलाकात में ही उन्हें बेहद हैंडसम लगे थे। फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आए और उन्हें प्यार हो गया। दोनों का प्यार इस कदर परवान चढ़ा कि पहली मुलाकात के महज 15 से 20 दिनों के अंदर ही दोनों ने साल 1986 में शादी कर ली। यह शादी उस दौर में इसलिए भी बहुत चर्चा में रही क्योंकि जरीना मुस्लिम थीं और आदित्य हिंदू। जरीना की मां रिश्ते को लेकर चिंतित थीं जरीना ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी मां शुरुआत में इस रिश्ते को लेकर काफी चिंतित थीं, क्योंकि आदित्य दूसरे धर्म के थे और उम्र में छोटे थे। लेकिन जरीना ने अपनी मां को समझाते हुए कहा था, "‘मां, हिंदू-मुसलमान सब एक जैसे हैं। आप ही कहती हैं कि अल्लाह की मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। तो मेरी जिंदगी का इतना बड़ा फैसला भी अल्लाह ने ही लिया है। यह फैसला मैंने नहीं, उन्होंने लिया है।’" जरीना की बात सुनकर उनके परिवार ने इस शादी को स्वीकार कर लिया। जरीना ने लहरें को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उनकी शादी निकाह के तरीके से हुई थी। जब उनसे पूछा गया था कि क्या आदित्य ने इस्लाम कबूल किया था, तो उन्होंने कहा, “उन्होंने धर्म नहीं बदला था, लेकिन मुस्लिम रीति के अनुसार उन्हें अपना नाम बदलना पड़ा था, इसलिए उन्होंने ऐसा किया।” जरीना वहाब ने बताया था कि उनकी बेटी का नाम सना एक पाकिस्तानी शो के किरदार से प्रेरित था। वहीं बेटे का नाम सूरज रखा गया, क्योंकि आदित्य की एक फिल्म में उनके किरदार का नाम सूरज था। बच्चों के नाम मुस्लिम या हिंदू रखने को लेकर परिवार में कोई चर्चा नहीं हुई। जरीना ने कहा था कि सना और सूरज को अपनी धार्मिक पहचान खुद चुनने की आजादी दी गई। दोनों के करियर की बात करें तो जरीना वहाब ने 1970 के दशक में फिल्मों में पहचान बनाई। 1976 की ‘चितचोर’ और 1977 की ‘घरौंदा’ उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल हैं। ‘घरौंदा’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस के लिए नॉमिनेशन भी मिला था। उन्होंने हिंदी के साथ मलयालम और दूसरी भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया। बाद में टीवी और फिल्मों में चरित्र भूमिकाओं में भी नजर आईं। वहीं आदित्य पंचोली ने 1980 के दशक में अभिनय की शुरुआत की। ‘दयावान’, ‘कब तक चुप रहूंगी’, ‘कातिल’ जैसी फिल्मों से उन्होंने पहचान बनाई। आगे चलकर ‘यस बॉस’, ‘बॉडीगार्ड’, ‘रेस 2’, ‘जय हो’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। उनके करियर में हीरो के साथ-साथ विलेन और कैरेक्टर रोल भी अहम रहे। ……….. यह खबर भी पढ़ें… जब जेल में बहनों ने बांधी संजय दत्त को राखी: रक्षाबंधन पर बहनों को तोहफे में दिए थे चाय-नाश्ते के 2-2 रुपए के कूपन रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है। भाई भी अपनी बहन को कुछ न कुछ गिफ्ट देता है, लेकिन संजय दत्त की जिंदगी में एक रक्षाबंधन ऐसा भी आया था, जब उनकी बहनों ने उन्हें जेल में राखी बांधी और उन्हें तोहफे में 2-2 रुपए के कूपन दिए थे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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