Clothes Washing Tips: कपड़े धोने के लिए अपनाएं ये 6 आसान तरीके, सफेद कपड़ों रहेंगे साफ और चमकदार
Clothes Washing Tips: कपड़े धोना रोज का काम है, लेकिन छोटी-सी गलती आपके पसंदीदा कपड़ों की चमक और उम्र दोनों कम कर सकती है। गलत तरीके से धुलाई करने पर सफेद कपड़े पीले, रंगीन कपड़े फीके और नाजुक कपड़े खराब हो सकते हैं।
हर कपड़े को एक ही तरीके से धोना सही नहीं होता, फैब्रिक के हिसाब से धुलाई का तरीका बदलना जरूरी है।कुछ आसान घरेलू टिप्स अपनाकर कपड़ों से दाग-धब्बे हटाने के साथ उनकी चमक भी बरकरार रखी जा सकती है।
1. सफेद कपड़ों के लिए अपनाएं ये आसान तरीका
सफेद कपड़ों पर गंदगी और पीलापन जल्दी नजर आता है। इन्हें धोते समय बेकिंग सोडा और नींबू के रस का इस्तेमाल किया जा सकता है। थोड़े गुनगुने पानी में बेकिंग सोडा और नींबू का रस मिलाकर कपड़ों को कुछ देर भिगोएं। इसके बाद धो लें। इससे कपड़ों की सफेदी बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
2. रंग छोड़ने वाले कपड़ों को अलग धोएं
नए या गहरे रंग के कपड़ों से पहली कुछ धुलाई में रंग निकल सकता है। इसलिए इन्हें सफेद या हल्के रंग के कपड़ों के साथ धोने से बचें। जरूरत हो तो पहली धुलाई के दौरान पानी में थोड़ा नमक या सिरका मिलाने का तरीका अपनाया जाता है।
3. पसीने के दाग पर तुरंत करें काम
शर्ट या टी-शर्ट के अंडरआर्म वाले हिस्से में पसीने के दाग जल्दी दिखाई देने लगते हैं। ऐसे दागों पर कपड़ा धोने से पहले थोड़ा बेकिंग सोडा और पानी का पेस्ट लगाया जा सकता है।
4. कॉलर की सफाई पर दें खास ध्यान
शर्ट का कॉलर जल्दी गंदा होता है और यहां पसीने व तेल की परत जम सकती है। कपड़े को मशीन में डालने से पहले कॉलर पर थोड़ा लिक्विड डिटर्जेंट लगाएं। हल्के हाथों से रगड़ने के बाद कपड़े को धोएं। बहुत जोर से न रगड़ें इससे फैब्रिक खराब हो सकता है।
5. रेशमी कपड़ों को ऐसे संभालें
रेशमी कपड़ों को सामान्य कपड़ों की तरह तेज रगड़कर या तेज धूप में सुखाना नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे कपड़ों के लिए माइल्ड डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें और अगर कपड़े के लेबल पर हाथ से धोने की सलाह दी गई है तो उसी के अनुसार धोएं। धुलाई के बाद इन्हें सीधे तेज धूप में रखने के बजाय छांव में सुखाना बेहतर रहता है।
6. ऊनी कपड़ों को धोने के बाद सही तरीके से रखें
ऊनी कपड़े धोने के बाद उन्हें अच्छी तरह सुखाना बेहद जरूरी है। नमी रह जाने पर इनमें बदबू आ सकती है और लंबे समय तक रखने पर फफूंदी की समस्या भी हो सकती है।
कपड़ों को पूरी तरह सुखाने के बाद उन्हें सूखी और साफ जगह पर रखें। लंबे समय के लिए स्टोर करते समय कपड़ों को नमी और कीड़ों से बचाने की व्यवस्था भी करें।
कपड़े धोते समय इन गलतियों से बचें
- कपड़ों की सफाई के लिए घरेलू नुस्खे आजमाते समय यह जरूरी है कि हर फैब्रिक पर एक ही चीज न लगाई जाए। रेशम, ऊन और महंगे कपड़ों के लिए पहले कपड़े का केयर लेबल पढ़ें।
- सफेद, रंगीन और नाजुक कपड़ों को अलग-अलग धोना भी कपड़ों की चमक और रंग बनाए रखने में मदद कर सकता है।
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Parenting Tips: बच्चे को हर बात पर टोकना छोड़ दें, अपनाएं ये तरीका; खुद फैसले लेना सीखेगा
Let Them Lead : पैरेंटिंग में बच्चे को सही-गलत समझाना जरूरी है, लेकिन हर काम अपनी मर्जी से करवाना सही नहीं होता। अपने तरीके से लीड करने देने से माता-पिता बच्चे को यह तय करने का मौका देते हैं कि वह क्या खेलना या करना चाहता है।
उदाहरण के लिए, अगर बच्चा खिलौनों से खेल रहा है तो पहले देखें कि वह खुद क्या करना चाहता है। फिर उसकी पसंद के खेल में शामिल हों और जरूरत पड़ने पर ही मदद या सलाह दें। जानें बच्चे की बात सुनने और समझने के 5 आसान तरीके।
1. बच्चे की बात पूरी सुनें
बच्चा स्कूल या दोस्तों से जुड़ी कोई बात बता रहा हो तो तुरंत सलाह देने के बजाय पहले उसकी बात पूरी सुनें। बीच में कुछ कहने से पहले पूछें कि उसे कैसा लगा और वह खुद इस बारे में क्या सोचता है। इससे बच्चे को लगता है कि उसकी बात को गंभीरता से सुना जा रहा है।
2. खेल का फैसला बच्चे को करने दें
खेलते समय हर चीज अपने हिसाब से चलाने की जरूरत नहीं है। बच्चे को तय करने दें कि वह कौन सा खेल खेलना चाहता है । अगर बच्चा ब्लॉक्स से घर बना रहा है, तो उसे यह बताने के बजाय कि घर कैसा होना चाहिए, उसके साथ बैठकर उसकी बनाई चीज को देखें। इस तरह बातचीत भी होगी और बच्चे की कल्पना को भी जगह मिलेगी।
3. हर बात पर सवाल न पूछें
बच्चे के साथ समय बिताते हुए लगातार सवाल पूछना जरूरी नहीं है। उदाहरण के लिए, “तुमने कारों के लिए पूरा रास्ता बना दिया।” इसके बाद बच्चे को खुद बताने का मौका दें। इससे बातचीत ज्यादा स्वाभाविक रह सकती है।
4. बच्चे की भावनाओं को समझने की कोशिश करें
बच्चा गुस्सा या उदास हो तो उसकी भावना को समझने की कोशिश करें। आप कह सकते हैं,“तुम इस बात से परेशान लग रहे हो।” इससे बच्चे को अपनी भावना पहचानने और उसे शब्दों में बताने में मदद मिल सकती है।
5. हर छोटी गलती पर न टोकें
बच्चा खेलते समय कोई चीज आपके तरीके से नहीं कर रहा है तो हर बार उसे सुधारना जरूरी नहीं है। माता-पिता उसकी तारीफ कर सकते हैं, उसकी नकल कर सकते हैं या उसकी बात को दोहरा सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे को हर चीज की खुली छूट दे दी जाए।
‘Let Them Lead’ का मतलब मनमानी नहीं
इस पैरेंटिंग तरीके का मतलब यह नहीं है कि बच्चे को हर फैसला खुद लेने दिया जाए या माता-पिता उसकी हर बात मान लें। इसका सीधा मतलब है कि जहां बच्चे को अपनी पसंद जाहिर करने की आजादी दी जा सकती है, वहां उसे पहल करने का मौका दें। माता-पिता बच्चे के साथ रहें, उसकी बात सुनें और जरूरत पड़ने पर सही दिशा दिखाएं।
बच्चे के साथ रोज थोड़ा ‘नो-इंस्ट्रक्शन टाइम’ रखें
इसके लिए कोई नियम बनाने की जरूरत नहीं है। रोज कुछ समय सिर्फ बच्चे के साथ बिताएं। मोबाइल को दूर रखें, उसकी बात सुनें और उसकी पसंद की एक्टिविटी में शामिल हों। बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसकी पसंद की भी अहमियत है।
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