Parenting Tips: बच्चे को हर बात पर टोकना छोड़ दें, अपनाएं ये तरीका; खुद फैसले लेना सीखेगा
Let Them Lead : पैरेंटिंग में बच्चे को सही-गलत समझाना जरूरी है, लेकिन हर काम अपनी मर्जी से करवाना सही नहीं होता। अपने तरीके से लीड करने देने से माता-पिता बच्चे को यह तय करने का मौका देते हैं कि वह क्या खेलना या करना चाहता है।
उदाहरण के लिए, अगर बच्चा खिलौनों से खेल रहा है तो पहले देखें कि वह खुद क्या करना चाहता है। फिर उसकी पसंद के खेल में शामिल हों और जरूरत पड़ने पर ही मदद या सलाह दें। जानें बच्चे की बात सुनने और समझने के 5 आसान तरीके।
1. बच्चे की बात पूरी सुनें
बच्चा स्कूल या दोस्तों से जुड़ी कोई बात बता रहा हो तो तुरंत सलाह देने के बजाय पहले उसकी बात पूरी सुनें। बीच में कुछ कहने से पहले पूछें कि उसे कैसा लगा और वह खुद इस बारे में क्या सोचता है। इससे बच्चे को लगता है कि उसकी बात को गंभीरता से सुना जा रहा है।
2. खेल का फैसला बच्चे को करने दें
खेलते समय हर चीज अपने हिसाब से चलाने की जरूरत नहीं है। बच्चे को तय करने दें कि वह कौन सा खेल खेलना चाहता है । अगर बच्चा ब्लॉक्स से घर बना रहा है, तो उसे यह बताने के बजाय कि घर कैसा होना चाहिए, उसके साथ बैठकर उसकी बनाई चीज को देखें। इस तरह बातचीत भी होगी और बच्चे की कल्पना को भी जगह मिलेगी।
3. हर बात पर सवाल न पूछें
बच्चे के साथ समय बिताते हुए लगातार सवाल पूछना जरूरी नहीं है। उदाहरण के लिए, “तुमने कारों के लिए पूरा रास्ता बना दिया।” इसके बाद बच्चे को खुद बताने का मौका दें। इससे बातचीत ज्यादा स्वाभाविक रह सकती है।
4. बच्चे की भावनाओं को समझने की कोशिश करें
बच्चा गुस्सा या उदास हो तो उसकी भावना को समझने की कोशिश करें। आप कह सकते हैं,“तुम इस बात से परेशान लग रहे हो।” इससे बच्चे को अपनी भावना पहचानने और उसे शब्दों में बताने में मदद मिल सकती है।
5. हर छोटी गलती पर न टोकें
बच्चा खेलते समय कोई चीज आपके तरीके से नहीं कर रहा है तो हर बार उसे सुधारना जरूरी नहीं है। माता-पिता उसकी तारीफ कर सकते हैं, उसकी नकल कर सकते हैं या उसकी बात को दोहरा सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे को हर चीज की खुली छूट दे दी जाए।
‘Let Them Lead’ का मतलब मनमानी नहीं
इस पैरेंटिंग तरीके का मतलब यह नहीं है कि बच्चे को हर फैसला खुद लेने दिया जाए या माता-पिता उसकी हर बात मान लें। इसका सीधा मतलब है कि जहां बच्चे को अपनी पसंद जाहिर करने की आजादी दी जा सकती है, वहां उसे पहल करने का मौका दें। माता-पिता बच्चे के साथ रहें, उसकी बात सुनें और जरूरत पड़ने पर सही दिशा दिखाएं।
बच्चे के साथ रोज थोड़ा ‘नो-इंस्ट्रक्शन टाइम’ रखें
इसके लिए कोई नियम बनाने की जरूरत नहीं है। रोज कुछ समय सिर्फ बच्चे के साथ बिताएं। मोबाइल को दूर रखें, उसकी बात सुनें और उसकी पसंद की एक्टिविटी में शामिल हों। बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसकी पसंद की भी अहमियत है।
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Raksha Bandhan Story: किसने सबसे पहले बांधी थी राखी? इन 5 पौराणिक कथाओं में छिपा है रक्षा सूत्र का राज
Raksha Bandhan First Rakhi Story: हर साल सावन की पूर्णिमा पर रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि राखी बांधने की परंपरा आखिर शुरू कैसे हुई? रक्षाबंधन की शुरुआत को लेकर कोई एक प्रमाणित ऐतिहासिक कहानी नहीं मिलती।
इसके बजाय हिंदू धार्मिक परंपराओं और लोककथाओं में रक्षा सूत्र से जुड़ी कई कहानियां मिलती हैं। जानिए राखी से जुड़ी 5 ऐसी कहानियां जो प्रेम और रक्षा का संदेश देती हैं।
1. इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर बांधा था रक्षा सूत्र
रक्षाबंधन से जुड़ी पुरानी मान्यताओं में इंद्र और इंद्राणी की कहानी का उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार देवताओं और असुरों के बीच युद्ध चल रहा था। युद्ध में देवताओं की स्थिति कमजोर पड़ने लगी तो इंद्राणी ने भगवान विष्णु की प्रार्थना की।
मान्यता है कि मंत्रोच्चार के साथ इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर राखी बांधी। इसके बाद इंद्र ने युद्ध में विजय प्राप्त की। इसी वजह से रक्षा सूत्र को रक्षाबंधन की शुरुआती परंपराओं से जोड़कर देखा जाता है।
2. कृष्ण और द्रौपदी की कहानी
मान्यता है कि एक बार कृष्ण की उंगली में चोट लगने से खून निकलने लगा। यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर कृष्ण की उंगली पर बांध दिया। द्रौपदी के इस स्नेह से कृष्ण प्रभावित हुए और उन्होंने उनकी रक्षा करने का वचन दिया। आगे चलकर जब द्रौपदी को कौरव सभा में अपमानित किया गया, तब कृष्ण ने उनकी लाज बचाई।
3. माता लक्ष्मी ने राजा बलि को माना भाई
राखी की पौराणिक कथा माता लक्ष्मी और राजा बलि से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने राजा बलि को वचन दिया था और इसी कारण वे बलि के राज्य में रहने लगे।
भगवान विष्णु को वापस लाने के लिए माता लक्ष्मी राजा बलि के पास पहुंचीं। कहा जाता है कि लक्ष्मी ने बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उन्हें अपना भाई माना। राजा बलि ने भी इस रिश्ते को स्वीकार किया।
4. यमराज और यमुना की कहानी भी है खास
मान्यता है कि यमुना अपने भाई यमराज से मिलने के लिए काफी समय से इंतजार कर रही थीं। जब यमराज उनके घर पहुंचे तो यमुना ने उनका स्वागत किया, पूजा की और उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा।
यमुना के प्रेम से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिया। इसी कथा से भाई-बहन के बीच प्रेम, लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना की परंपरा को भी जोड़ा जाता है।
5. कर्णावती और हुमायूं की कहानी का सच?
रक्षाबंधन के साथ रानी कर्णावती और मुगल शासक हुमायूं की कहानी भी अक्सर सुनाई जाती है। कहा जाता है कि चित्तौड़ पर संकट के समय रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजकर मदद की गुहार लगाई थी।
हालांकि इस घटना के ऐतिहासिक प्रमाणों को लेकर मतभेद हैं। इसलिए इसे पक्के ऐतिहासिक तथ्य की बजाय प्रचलित ऐतिहासिक कथा के रूप में देखना ज्यादा उचित है।
भाई- बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है राखी
रक्षाबंधन से जुड़ी इन कथाओं में अपनों की रक्षा, भरोसा, स्नेह और रिश्ते को निभाने का वचन है। राखी भाई-बहन के रिश्ते की पहचान है।भाई-बहन दोनों एक-दूसरे की खुशियों और सुरक्षा की कामना करते हैं।
इसलिए यह कहना मुश्किल है कि दुनिया में सबसे पहली राखी किसने बांधी थी। लेकिन पौराणिक कथाओं में इंद्राणी का इंद्र को रक्षा सूत्र बांधना, कृष्ण-द्रौपदी का प्रसंग और यम-यमुना की कहानी इस परंपरा की प्राचीन जड़ों की ओर इशारा करती हैं।
(Disclaimer): इस लेख में शामिल पौराणिक और ऐतिहासिक प्रसंग विभिन्न धार्मिक मान्यताओं, लोककथाओं और प्रचलित कथाओं पर आधारित हैं। इन सभी घटनाओं को प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य नहीं माना जा सकता।
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