केरल की केजिया लिज मेजो बनीं मिस यूनिवर्स इंडिया-2026:इंटरनेशनल लेवल पर भारत को रिप्रजेंट करेंगी, बोलीं- यह मेरे लिए बड़ी जिम्मेदारी
केरल की केजिया लिज मेजो ने मिस यूनिवर्स इंडिया-2026 का खिताब जीत लिया है। उन्होंने अपनी खूबसूरती और इंटेलिजेंस से हर किसी को इम्प्रेस किया। उन्हें मिस यूनिवर्स इंडिया-2025 मनिका विश्वकर्मा ने क्राउन पहनाया। केजिया अब इंटरनेशनल लेवल पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। इस साल के अंत में प्यूर्टो रिको में होने वाली 75वीं मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में दुनिया के विभिन्न देशों की ब्यूटी क्वीन हिस्सा लेंगी। इस प्रतियोगिता में तमिलनाडु की वैष्णवी गणेश फर्स्ट रनर-अप और गुजरात की अनुश्री सातवलेकर सेकंड रनर-अप रहीं। जयपुर के जी-स्टूडियो में रविवार देर रात ‘मिस यूनिवर्स इंडिया 2026’ फिनाले आयोजित हुआ। इसमें देशभर से 52 फाइनलिस्ट ने अपने टैलेंट, खूबसूरती और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया। केजिया बोलीं- यह मेरे लिए उपलब्धि नहीं, बड़ी जिम्मेदारी खिताब जीतने के बाद केजिया ने कहा कि यह खिताब मेरे लिए केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। भारत का प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय मंच पर करना मेरे लिए गर्व और सम्मान की बात है। मैं इस अवसर के माध्यम से भारत की विविधता, संस्कृति, प्रतिभा और नई पीढ़ी की शक्ति को दुनिया के सामने पेश करूंगी। सुष्मिता सेन, सेलिना जेटली और उर्वशी रौतेला रहीं जज प्रतियोगिता में बॉलीवुड एक्ट्रेस और पूर्व मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन, दो बार मिस यूनिवर्स इंडिया रह चुकीं उर्वशी रौतेला और मिस यूनिवर्स में फर्स्ट रनर-अप रह चुकीं सेलिना जेटली, फिल्म प्रोड्यूसर व पर्यावरणविद् प्रज्ञा कपूर और मिस यूनिवर्स इंडिया के मालिक निखिल आनंद ने इस पेजेंट को जज किया। इस दौरान मिस यूनिवर्स इंडिया 2024 रिया सिंघा भी मौजूद रहीं। सुष्मिता सेन बोलीं- जब मैं मिस यूनिवर्स के लिए फाइट कर रही थी, तब मुझे अंग्रेजी ज्यादा आती नहीं थी। एसेंस का भी मतलब पता नहीं था। ऐसे में यह जर्नी आसान नहीं रही। उस वक्त जो मैंने उत्तर दिया था, वह मैं आज भी नहीं दे पाती। हम एक ही मां के बच्चे हैं और यह मातृभूमि हमारी मां है। पूरे देशभर से टैलेंट यहां मौजूद है। हम कहीं न कहीं कुछ हिस्सों में अलग होंगे, लेकिन हम फिर भी इस देश की वजह से एक हैं। उर्वशी बोलीं- सुष्मिता मेरी पहली गुरु उर्वशी रौतेला ने कहा कि सुष्मिता सेन मेरी पहली गुरु हैं। उन्होंने ही मुझे मिस यूनिवर्स इंडिया का ताज पहनाया था। उनके इस बयान से पुराने दिनों की यादें भी ताजा हो गईं। एक ही मंच पर गुरु और शिष्य की मौजूदगी ने कार्यक्रम को भावुक बना दिया। देखिए, इवेंट की PHOTOS…
रग्बी के पूर्व स्टार ने 81अल्ट्रा मैराथन दौड़कर बनाया रिकॉर्ड:100 दिन तक दौड़कर 12 करोड़ जुटा रहे डेविड जैक्सन; चोट से चली गई थी याददाश्त
13 साल पहले सिर की गंभीर चोट से याददाश्त खोने वाले पूर्व ब्रिटिश रग्बी खिलाड़ी डेविड जैक्सन ने लगातार 81 दिनों तक रोज 50 किमी की अल्ट्रा मैराथन पूरी कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। ब्रिस्टल में रिवर एवन के किनारे 81वीं दौड़ पूरी करते ही उन्होंने पुरुष वर्ग में लगातार सबसे ज्यादा अल्ट्रा मैराथन का रिकॉर्ड अपने नाम किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड 80 दौड़ का था। हालांकि जैक्सन का लक्ष्य सिर्फ रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि ब्रेन इंजरी से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए 100 दिन में 100 अल्ट्रा मैराथन पूरी करना है। 31 साल की उम्र में उनका 12 साल का पेशेवर रग्बी करियर एक हादसे के बाद खत्म हो गया था। नॉटिंघम रग्बी क्लब के लिए 316 मैचों में 102 ट्राई और 971 अंक बनाने वाले जैक्सन अभ्यास के दौरान साथी खिलाड़ी से सिर टकराने के बाद मैदान पर ही बेहोश हो गए थे। उन्हें दौरा पड़ा और मस्तिष्क में ब्लीडिंग हुई। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि सिर पर अगला झटका जानलेवा हो सकता है। हादसे के बाद उनकी शॉर्ट-टर्म मेमोरी चली गई। ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम प्रभावित होने से रोजमर्रा के सामान्य काम भी मुश्किल हो गए थे। सुपरमार्केट में सामान चुनना या कमरे की रोशनी में बैठना तक उनके लिए मानसिक तनाव का कारण बन जाता था। लंबे संघर्ष के बाद जैक्सन अब स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच हैं और पूरी तरह फिट हैं। अपने अभियान में वे ब्रिटेन की गर्मी और पांच हीटवेव के बीच रोज करीब सात घंटे दौड़ रहे हैं। 14वें दिन टेंडन की चोट और शुरुआती हफ्तों में शरीर का 10% वजन कम होने के बावजूद उन्होंने दौड़ जारी रखी। इंग्लैंड, वेल्स और स्कॉटलैंड के 25 स्थानों पर 10 किमी के सर्किट में दौड़ते हुए जैक्सन अब तक 4,000 किमी से ज्यादा की दूरी तय कर चुके हैं। उनके साथ 700 से ज्यादा धावक दौड़ चुके हैं, जिनमें इंग्लैंड के अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी जॉर्ज मार्टिन भी शामिल हैं।इस अभियान से जैक्सन ‘हेडवे यूके’ और ‘हेड फॉर चेंज’ के लिए करीब 12 करोड़ रुपए जुटा रहे हैं। उनका लक्ष्य ब्रेन इंजरी से प्रभावित लोगों को जरूरी मानसिक और चिकित्सकीय सहयोग उपलब्ध कराना है। जैक्सन कहते हैं कि 100 दिन बाद उनका शरीर सामान्य हो जाएगा, लेकिन ब्रेन इंजरी से प्रभावित लोगों को जिंदगी भर सहारे की जरूरत होती है।
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