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Monsoon Special Recipe: मानसून में बनाएं Donuts, बेहद आसान है रेसिपी और बच्चों को भी आएगी पसंद

अगर आप मानसून की शाम में कुछ मीठा और स्वादिष्ट खाना चाहते हैं, तो घर पर डोनट बनाकर देख सकते हैं। डोनट बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है और इसे घर पर बनाना भी ज्यादा मुश्किल नहीं है। खास बात यह है कि आप इसे अपनी पसंद के हिसाब से चॉकलेट, स्ट्रॉबेरी या क्रीम ग्लेज से सजा सकते हैं। बारिश के मौसम में गरम चाय या कॉफी के साथ ताजा बने डोनट का स्वाद और भी अच्छा लगता है। अगर आप घर पर कुछ अलग और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं, तो यह आसान डोनट रेसिपी जरूर ट्राई करें।

डोनट बनाने के लिए सामग्री
डोनट का आटा तैयार करने के लिए: 4½ कप मैदा, 1½ कप गुनगुना दूध, 1 छोटा चम्मच इंस्टेंट यीस्ट, 1 छोटा चम्मच चीनी, यीस्ट एक्टिव करने के लिए ½ कप चीनी, एक चुटकी नमक, 1 छोटा चम्मच दही और 3 बड़े चम्मच बिना नमक वाला नरम मक्खन।
नोट: अंडे वाला डोनट बनाने के लिए: दही की जगह कमरे के तापमान पर रखे 2 अंडों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

डोनट तलने के लिए: जरूरत के अनुसार तेल।
डोनट सजाने के लिए: पिसी हुई चीनी, पिंघली हुई चॉकलेट, कटी हुई स्ट्रॉबेरी या कोई और फल या चॉकलेट के टुकड़े। इसे भी पढ़ें: Healthy Breakfast Ideas: बच्चों की डाइट में Apple शामिल करने के ये 5 Creative तरीके, Fruits के नखरे होंगे अब खत्म

डोनट का आटा कैसे तैयार करें?
सबसे पहले एक बड़े बर्तन में गुनगुना दूध लें। इसमें इंस्टेंट यीस्ट और एक छोटा चम्मच चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। इसे करीब 5 से 10 मिनट के लिए छोड़ दें। जब दूध के ऊपर हल्का झाग दिखाई देने लगे तो समझ जाएं कि यीस्ट एक्टिव हो गया है।

अब इसमें आधा कप चीनी, एक चुटकी नमक, एक छोटा चम्मच दही और नरम मक्खन डालकर अच्छी तरह मिलाएं। अगर आप अंडे वाला डोनट बना रहे हैं तो दही की जगह 2 अंडे डालें।

इसके बाद धीरे-धीरे मैदा डालते जाएं और इसे मिलाकर आटा तैयार करें। आटे को करीब 8 से 10 मिनट तक अच्छी तरह गूंधें। आटा नरम, चिकना और थोड़ा चिपचिपा होना चाहिए।

अब आटे को ढककर करीब 45 मिनट से 1 घंटे के लिए किसी गर्म जगह पर रख दें। जब आटा फूलकर लगभग दोगुना हो जाए तो समझ जाएं कि यह डोनट बनाने के लिए तैयार है।

डोनट का आकार कैसे दें?
आटा फूलने के बाद इसे हल्के हाथों से दबाकर इसकी हवा निकाल दें। अब इसे बेलकर एक मोटी शीट तैयार करें। डोनट कटर या किसी गोल आकार के कटर की मदद से डोनट काटें।

हर डोनट के बीच में एक छोटा सा छेद करें। तैयार डोनट को बटर पेपर पर रखें। सभी डोनट तैयार करने के बाद इन्हें ढककर करीब 30 मिनट के लिए दोबारा रख दें। इससे डोनट अच्छी तरह फूल जाएंगे और तलने के बाद नरम बनेंगे।

डोनट को कैसे तलें?
एक कड़ाही में पर्याप्त तेल डालकर धीमी-मध्यम आंच पर गर्म करें। तेल बहुत ज्यादा गर्म न हो, वरना डोनट बाहर से जल्दी ब्राउन हो जाएंगे लेकिन अंदर से कच्चे रह सकते हैं। अब सावधानी से डोनट को गर्म तेल में डालें और धीमी आंच पर तलें। दोनों तरफ से डोनट सुनहरे और हल्के भूरे रंग के हो जाएं तो उन्हें तेल से निकाल लें। तले हुए डोनट को टिश्यू पेपर पर रखें, ताकि उनका अतिरिक्त तेल निकल जाए।

इसे भी पढ़ें: No Onion-No Garlic: सावन में बिना प्याज-लहसुन की सब्जी को इन Tips से बनाएं और भी Delicious

डोनट को कैसे सजाएं?
डोनट थोड़ा ठंडा होने के बाद इसे अपनी पसंद के अनुसार सजाएं। आप डोनट पर पिसी हुई चीनी डाल सकते हैं या इसे चॉकलेट में डुबो सकते हैं। बच्चों के लिए डोनट को और आकर्षक बनाने के लिए इसके ऊपर कलरफुल स्प्रिंकल्स भी डाल सकते हैं।

मानसून में ऐसे सर्व करें डोनट
ताजा बने डोनट को गर्म चाय, कॉफी या दूध के साथ सर्व करें। बारिश के मौसम में शाम के समय परिवार के साथ इसका मजा लिया जा सकता है। आप बच्चों के साथ मिलकर भी डोनट को अलग-अलग ग्लेज और स्प्रिंकल्स से सजा सकते हैं। तो अगली बार बारिश के मौसम में अगर घर पर कुछ मीठा और स्वादिष्ट बनाने का मन हो, तो इस आसान डोनट रेसिपी को जरूर ट्राई करें।

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Mecca Defence Pact के बहाने बदल रहा है Bangladesh का रणनीतिक खेल, भारत को चारों ओर से घेरने की तैयारी!

तारिक रहमान की भारत यात्रा टलने का असल कारण अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है। भले ही ढाका इस फैसले के पीछे शेख हसीना की भारत से की गई वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस और उससे बिगड़े कूटनीतिक माहौल का हवाला दे रहा हो, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा रणनीतिक समीकरण भी आकार लेता दिख रहा है। संकेत बताते हैं कि तारिक रहमान का ध्यान फिलहाल नई दिल्ली की यात्रा से अधिक बदलते क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और मक्का पैक्ट में बांग्लादेश की संभावित भागीदारी पर केंद्रित है। ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ की नीति के तहत ढाका पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के साथ उभरते इस सुरक्षा ढांचे में अपने लिए संभावनाएं तलाश रहा है। ऐसे में भारत यात्रा को टालना बांग्लादेश की नई विदेश नीति, उसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं और दक्षिण एशिया में अपने विकल्पों का दायरा बढ़ाने की कोशिश का भी संकेत माना जा रहा है।

ढाका का स्पष्ट संदेश है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। बांग्लादेशी नेतृत्व का कहना है कि पर्याप्त द्विपक्षीय प्रगति और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप समझ बनने पर ही यात्रा का समय तय होगा। दूसरी ओर, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी संबंधों को “पारस्परिक हित” की कसौटी पर परखने की बात कही है। दोनों पक्षों की भाषा में समानता दिखाई देती है, लेकिन असली प्रश्न यह है कि ‘राष्ट्रीय हित’ की उनकी परिभाषाएं कितनी दूर तक एक-दूसरे से मेल खाती हैं।

इसे भी पढ़ें: चौराहे पर बांग्लादेश: बदलाव, अनिश्चितता और नई राह की तलाश

हम आपको बता दें कि वर्तमान तनाव के केंद्र में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का भारत में निर्वासन और उनके प्रत्यर्पण का बांग्लादेशी आग्रह है। इसी महीने नई दिल्ली से शेख हसीना की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस ने ढाका की नाराजगी और बढ़ा दी। बांग्लादेश इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में देखता है, जबकि भारत ने आयोजन में अपनी भूमिका से इंकार किया है। हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास की परीक्षा बन चुका है। इसी पृष्ठभूमि में रहमान की भारत यात्रा के लिए “अनुकूल वातावरण” बनाने की बात कही जा रही है।

लेकिन कहानी यहीं समाप्त नहीं होती। असली सामरिक संकेत बांग्लादेश के संभावित मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की ओर झुकाव में छिपे हैं। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच हुए इस ढांचे में 'किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला सभी पर हमला' माने जाने की अवधारणा शामिल है। बांग्लादेशी मंत्रियों ने इसमें शामिल होने की संभावना के प्रति सकारात्मक रुख दिखाते हुए अंतिम निर्णय को राष्ट्रीय हितों से जोड़ा है। यदि ढाका इस व्यवस्था से जुड़ता है, तो दक्षिण एशिया और उसके आसपास के सामरिक समीकरणों में एक नई परत जुड़ सकती है।

भारत के लिए चिंता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका है। 1971 के इतिहास के बाद लंबे समय तक भारत-बांग्लादेश संबंधों में जो सामरिक निकटता रही, उसमें अब स्पष्ट परिवर्तन दिखाई दे रहा है। ढाका ने पाकिस्तान के साथ व्यापार, कूटनीतिक संपर्क और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की इच्छा जताई है। यदि यह प्रक्रिया मक्का रक्षा ढांचे जैसी किसी व्यापक सुरक्षा संरचना से जुड़ती है, तो भारत को अपनी पूर्वी सीमा के सामरिक परिवेश का नए सिरे से आकलन करना पड़ सकता है।

इसके साथ चीन का कारक भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। बांग्लादेश अपनी विदेश नीति को अमेरिका, चीन, पाकिस्तान और अन्य शक्तियों के साथ संतुलित संबंधों की दिशा में विविधतापूर्ण बनाने का प्रयास कर रहा है। बीजिंग के लिए बंगाल की खाड़ी और दक्षिण एशिया में अपनी रणनीतिक उपस्थिति बढ़ाने का अवसर पहले से मौजूद है। ऐसे में यदि भारत-ढाका संवाद कमजोर पड़ता है और बांग्लादेश वैकल्पिक साझेदारों की ओर तेजी से बढ़ता है, तो चीन की आर्थिक और संभावित सामरिक पहुंच भारत की पूर्वी और समुद्री रणनीति के लिए अधिक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती है।

देखा जाये तो भारत के सामने चुनौती केवल सीमा सुरक्षा की नहीं है। 4,096 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा, अवैध आव्रजन, सीमा प्रबंधन और बाड़बंदी जैसे मुद्दे पहले ही संबंधों को प्रभावित कर रहे हैं। ढाका का आरोप है कि भारत बिना पर्याप्त कूटनीतिक सत्यापन के लोगों को सीमा पार भेज रहा है, जबकि भारत अपनी सुरक्षा और आव्रजन चिंताओं को प्रमुखता देता है। फिर भी इस उभरते तनाव को भारत और बांग्लादेश के स्थायी विच्छेद के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। दोनों देश भूगोल से बंधे हैं और उनके आर्थिक, सुरक्षा तथा संपर्क हित गहराई से जुड़े हुए हैं।

साथ ही यदि बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होता है, तो सवाल उठता है कि इससे ढाका और चीन के रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा? देखा जाये तो मक्का पैक्ट में तुर्किये की मौजूदगी सबसे महत्वपूर्ण बात है। तुर्किये जहां नाटो का सदस्य और पश्चिमी सुरक्षा ढांचे का हिस्सा है, वहीं चीन के साथ उसके संबंध प्रतिस्पर्धा और सहयोग, दोनों पर टिके हैं। आर्थिक संपर्क, व्यापार और व्यापक यूरेशियाई राजनीति में दोनों के हित कई जगह मिलते हैं, लेकिन उइगर मुद्दे और मध्य एशिया जैसे प्रश्नों पर मतभेद भी मौजूद हैं। इसलिए बांग्लादेश यदि इस तुर्किये-पाकिस्तान-सऊदी सुरक्षा ढांचे में प्रवेश करता है, तो वह चीन-विरोधी खेमे में सीधे शामिल होने की बजाय एक बहुस्तरीय रणनीतिक संतुलन की नीति अपना सकता है। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान स्वयं चीन का निकटतम रणनीतिक साझेदार है, जबकि तुर्किये मक्का पैक्ट के माध्यम से अपने रक्षा-औद्योगिक और भू-राजनीतिक प्रभाव का विस्तार चाहता है। ऐसे में ढाका के लिए मक्का पैक्ट और चीन के साथ मजबूत आर्थिक-सामरिक संबंध परस्पर विरोधी होने की बजाय समानांतर विकल्प भी बन सकते हैं। लेकिन यदि इस रक्षा ढांचे का विस्तार किसी ऐसे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन की दिशा में होता है, जहां चीन और तुर्किये के हित आमने-सामने आने लगें, तो बांग्लादेश को कठिन कूटनीतिक स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

यहां प्रश्न यह भी उठता है कि यदि बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होता है तो भारत पर क्या असर होगा? देखा जाये तो ऐसी स्थिति में भारत की चिंता यह होगी कि कहीं बांग्लादेश किसी औपचारिक या अनौपचारिक बहु-ध्रुवीय सुरक्षा नेटवर्क का हिस्सा बनकर नई दिल्ली की पारंपरिक रणनीतिक बढ़त को सीमित न कर दे। हालांकि यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि ढाका किसी भारत विरोधी गठबंधन का हिस्सा बन जाएगा। फिर भी भारत के लिए संदेश स्पष्ट है कि बांग्लादेश को केवल 1971 की ऐतिहासिक साझेदारी के चश्मे से देखने की बजाय उसे एक स्वतंत्र रणनीतिक शक्ति के रूप में समझना होगा। यदि नई दिल्ली और ढाका के बीच राजनीतिक संवाद कमजोर रहता है, तो पाकिस्तान, चीन और तुर्किये जैसे देशों के लिए वहां अपना प्रभाव बढ़ाने की गुंजाइश स्वाभाविक रूप से बढ़ सकती है।

बहरहाल, नई दिल्ली के लिए यह स्पष्ट संकेत है कि ढाका अब पुराने समीकरणों में बंधकर चलने को तैयार नहीं है। भारत को बांग्लादेश के साथ अपने रिश्ते को शेख हसीना के दौर की राजनीतिक निकटता या 1971 की ऐतिहासिक विरासत के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए। यदि भारत और बांग्लादेश के बीच संवाद और विश्वास का अंतराल बढ़ता है, तो उस खाली जगह को भरने के लिए पाकिस्तान, चीन और तुर्किये जैसी बाहरी शक्तियां स्वाभाविक रूप से अधिक सक्रिय होंगी और इसका असर केवल द्विपक्षीय संबंधों पर नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया और बंगाल की खाड़ी के शक्ति संतुलन पर पड़ेगा।

-नीरज कुमार दुबे

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  Sports

Sonal Dinusha ने तोड़ा Joe Root का बड़ा रिकॉर्ड, India के खिलाफ 'Sweep Shot' से रचा नया इतिहास

भारत के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला श्रीलंका ने भले ही बराबरी पर खत्म की हो, लेकिन इस मुकाबले में सोनाल दिनुषा ने अपने बल्ले से ऐसा प्रदर्शन किया है, जो लंबे समय तक याद किया जाएगा। कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब में गुरुवार को दूसरे टेस्ट के आखिरी दिन दिनुषा ने नाबाद 133 रन की पारी खेली और अपनी टीम को मैच बचाने में अहम भूमिका निभाई। भारत ने श्रृंखला 1-0 से अपने नाम की है।

25 वर्षीय बाएं हाथ के बल्लेबाज दिनुषा ने इस श्रृंखला में तीन शतक लगाए हैं। कोलंबो में पहली पारी में उन्होंने 103 रन बनाए थे, जबकि दूसरी पारी में नाबाद 133 रन बनाकर लौटे। इससे पहले गाले में खेले गए पहले टेस्ट में भी उन्होंने शतक लगाया था। यानी चार पारियों में उनके बल्ले से तीन शतक निकले हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, दिनुषा ने पूरी श्रृंखला में स्वीप शॉट के जरिए कुल 176 रन बनाए। यह टेस्ट श्रृंखला में किसी भी बल्लेबाज द्वारा स्वीप शॉट से बनाए गए सबसे ज्यादा रन हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड इंग्लैंड के जो रूट के नाम था। रूट ने 2021 में श्रीलंका के खिलाफ खेली गई श्रृंखला में स्वीप शॉट से 168 रन बनाए थे।

दिनुषा ने सिर्फ रन बनाने में ही नहीं, बल्कि स्वीप शॉट खेलने के मामले में भी नया रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने पूरी श्रृंखला में 121 बार स्वीप शॉट खेलने की कोशिश की। टेस्ट श्रृंखला में किसी बल्लेबाज द्वारा खेले गए स्वीप शॉट की यह सबसे बड़ी संख्या है। इससे पहले जो रूट ने 2021 की श्रृंखला में 113 स्वीप शॉट खेलने की कोशिश की थी।

गौरतलब है कि भारत ने दूसरे टेस्ट में पहली पारी में बड़ी बढ़त हासिल करने के बाद श्रीलंका को फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर किया था। भारत की पहली पारी की बढ़त 213 रन थी। इसके बाद श्रीलंका ने दोनों पारियों में कुल 243.4 ओवर बल्लेबाजी की। अकेले दिनुषा ने इस मुकाबले में 426 गेंदों का सामना किया, जो उनके धैर्य और लंबी पारी खेलने की क्षमता को दिखाता है।

अंतिम दिन श्रीलंका ने 229 रन पर छह विकेट से आगे खेलना शुरू किया। दिनुषा ने केशारा नुवंथा के साथ सातवें विकेट के लिए 112 रन की साझेदारी की। नुवंथा ने 46 रन बनाए। दोनों बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाया और मुकाबले को श्रीलंका की हार से बचाने में अहम भूमिका निभाई।

आखिरकार दोनों टीमों ने 429 रन पर श्रीलंका के नौ विकेट होने के बाद मैच समाप्त करने पर सहमति जताई। श्रीलंका को कुल मिलाकर 216 रन की बढ़त हासिल हुई, लेकिन समय समाप्त होने के कारण भारत जीत हासिल नहीं कर सका। भारत की ओर से मानव सुथार ने 41 ओवर में 121 रन देकर तीन विकेट लिए, जबकि रवींद्र जडेजा ने 38.3 ओवर में 94 रन देकर तीन विकेट हासिल किए।

बता दें कि दिनुषा ने एक और खास उपलब्धि अपने नाम की है। वह टेस्ट इतिहास के केवल छठे ऐसे बल्लेबाज बन गए हैं, जिन्होंने छठे या उससे नीचे के क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए एक श्रृंखला में तीन शतक लगाए हैं। वह ऐसा करने वाले पहले श्रीलंकाई बल्लेबाज हैं और दो टेस्ट की श्रृंखला में यह उपलब्धि हासिल करने वाले भी पहले खिलाड़ी हैं।

कोलंबो टेस्ट में दोनों पारियों में शतक लगाने के साथ दिनुषा ने एक और विशिष्ट सूची में जगह बनाई है। वह टेस्ट इतिहास के केवल पांचवें बल्लेबाज हैं, जिन्होंने छठे या उससे नीचे के क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए एक ही टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगाया है। इस सूची में पहले के चार में से तीन खिलाड़ी श्रीलंका के ही थे।

श्रीलंका भले ही श्रृंखला जीतने से चूक गया हो, लेकिन सोनाल दिनुषा के प्रदर्शन ने टीम को एक ऐसा बल्लेबाज जरूर दिया है, जिसने मुश्किल परिस्थितियों में लंबी पारी खेलने और दबाव झेलने की अपनी क्षमता साबित की है। भारत के खिलाफ उनकी यह श्रृंखला उनके टेस्ट करियर के सबसे यादगार प्रदर्शनों में शामिल होने वाली है।
Fri, 28 Aug 2026 19:09:00 +0530

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