Nepal Flood 2026: नेपाल बाढ़ के बाद Narayani River की तेज लहरों ने डराया!| Flood 2026 | Hindi News
नेपाल में बाढ़ का पानी तिब्बत की तरफ से आया है. इससे भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके में भारी नुकसान हुआ है. इधर, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात कर स्थिति पर चर्चा की है. राज्य में संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है. NDRF की कई टीमें बिहार के 6 जिलों के लिए रवाना की गई हैं. कोसी और गंडक नदी बेसिन में पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन को अलर्ट रखा गया है. #nepal #nepalflood #nepalflood2026 #bihar #biharflood2026 #hindi #hindinews #flood #flood2026 You can Search us on YouTube by- NBT, NBT TV Live, Navbharat Times, Times Now, TNN, TNNB, Navbharat TV, Hindi News, Latest news and @timesnownavbharat About Channel: Times Now Navbharat देश का No.1 Hindi news है। यह चैनल भारत और दुनिया से जुड़ी हर Latest News और Breaking News , राजनीति, मनोरंजन और खेल से जुड़े समाचार आपके लिए लेकर आता है। इसलिए सब्सक्राइब करें और बने रहें टाइम्स नाउ नवभारत के साथ Times Now Navbharat is India's fastest growing Hindi News Channel with 24 hour coverage. Get Breaking news, Latest news, Politics news, Entertainment news and Sports news from India & World on Times Now Navbharat. ------------------------------------------------------------------------------------------------------------- Watch Live TV : https://www.timesnowhindi.com/live-tv Subscribe to our other network channels: Times Now: https://www.youtube.com/TimesNow Zoom: https://www.youtube.com/zoomtv ------------------------------------------------------------------------------------------------------------- You can also visit our website at: https://www.timesnowhindi.com Download our App for Breaking News: https://tinyurl.com/bde8rv84 Like us on Facebook: https://www.facebook.com/Timesnownavbharat Follow us on Twitter: https://twitter.com/TNNavbharat Follow us on Instagram: https://www.instagram.com/timesnownavbharat
CREDAI ने UP RERA की शर्तों का किया विरोध, 4 महीने की राहत पर विवाद
रियल एस्टेट कंपनियों के शीर्ष निकाय क्रेडाई ने उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (उत्तर प्रदेश रेरा) की पात्र रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए शर्तों के साथ चार महीने की समयसीमा बढ़ाने के आदेश का विरोध किया है। संगठन का आरोप है कि नियामक की शर्तों के कारण ज्यादातर कंपनियां इस राहत का लाभ नहीं उठा पाएंगी। क्रेडाई (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) के बैनर तले 400 से अधिक कंपनियों ने 21 अगस्त के आदेश का विरोध करने का फैसला किया है।
संगठन ने यूपी रेरा के सचिव को पत्र लिखकर आदेश वापस लेने या उस पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उत्तर प्रदेश रेरा ने मंगलवार को केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की 31 जुलाई की सलाह के बाद निर्देश जारी किए थे। मंत्रालय ने पश्चिम एशिया की स्थिति से उत्पन्न ‘फोर्स मेज्योर’ यानी असाधारण परिस्थितियों से प्रभावित परियोजनाओं को राहत देने का सुझाव दिया था।
ये ऐसी परिस्थितियां होती हैं जिन पर किसी का नियंत्रण नहीं होता। उत्तर प्रदेश रेरा के आदेश के तहत जिन परियोजनाओं की मूल, संशोधित या पहले से बढ़ाई गई पूरी होने की समयसीमा 28 फरवरी से 31 अक्टूबर, 2026 के बीच है, उन्हें चार महीने की अतिरिक्त समयसीमा का लाभ मिलेगा। हालांकि, जिन परियोजनाओं को पहले ही पूर्ण होने का प्रमाणपत्र या उपयोग प्रमाणपत्र मिल चुका है, उन्हें इस दायरे से बाहर रखा गया है।
इसके अलावा, राहत के लिए कई नियामकीय शर्तें भी रखी गई हैं। इनमें 28 फरवरी, 2026 तक स्वीकृत नक्शे, लेआउट या भवन योजना की वैधता, सभी लंबित तिमाही प्रगति रिपोर्ट दाखिल करना और वित्त वर्ष 2024-25 की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट जमा करना शामिल है। क्रेडाई ने अपने बयान में कहा कि केंद्र सरकार की सलाह में ऐसी कोई अंतिम तिथि निर्धारित नहीं की गई थी और अतिरिक्त शर्तों ने राहत का दायरा काफी सीमित कर दिया है।
क्रेडाई के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया की स्थिति को ‘फोर्स मेज्योर’ माना है। इसलिए सभी परियोजनाएं स्वत: चार महीने की समयसीमा बढ़ाने के लिए पात्र होनी चाहिए थीं। शर्तें लगाकर उत्तर प्रदेश रेरा ने मामले को जटिल बना दिया है और इसका नतीजा यह है कि ज्यादातर कंपनियां इसका लाभ नहीं उठा पाएंगी।’’ संगठन ने कहा कि सामग्री की आपूर्ति में समस्या के कारण निर्माण में हुई देरी पश्चिम एशिया की स्थिति का पूरे क्षेत्र पर पड़ा असर है और इसका आकलन परियोजना-दर-परियोजना के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
क्रेडाई ने महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु और हरियाणा के रियल एस्टेट नियामकों के आदेशों का भी हवाला दिया। संगठन के अनुसार, इन राज्यों में नियामकों ने ऐसी अतिरिक्त शर्तों के बिना चार महीने की समयसीमा बढ़ाई है। रियल एस्टेट कंपनियों के संगठन ने चेतावनी दी कि यदि आदेश में संशोधन नहीं किया गया तो ‘बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन’ किए जाएंगे।
उसने यह भी मांग की कि नया फैसला होने तक कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाए। प्रवक्ता के अनुसार, क्रेडाई ने प्राधिकरण के समक्ष व्यक्तिगत सुनवाई और पात्र कंपनियों के लिए समान तथा आसानी से उपलब्ध राहत सुनिश्चित करने वाला संशोधित आदेश जारी करने का अनुरोध किया है।
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