President Murmu ने IFS Officers को दिया 'राष्ट्रहित सर्वोपरि' का मंत्र, जनसेवा पर जोर
(फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 27 अगस्त राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के नवनियुक्त अधिकारियों को ‘राष्ट्रहित सर्वोपरि’ का मंत्र देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि दुनिया के साथ भारत का जुड़ाव हमेशा देश के लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए। आईएफएस के प्रशिक्षु अधिकारियों के एक समूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति दुनिया के साथ देश के जुड़ाव के लिए नयी संभावनाएं पैदा कर रही है। उन्होंने राजनयिकों को निवेश, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसरों के प्रति सतर्क रहने तथा ऐसी साझेदारियां विकसित करने की सलाह दी, जो भारत के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाएं।
मुर्मू ने कहा कि कूटनीति को भारत की समृद्धि में सीधे योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया के साथ भारत का जुड़ाव हमेशा देश के लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए -‘राष्ट्रहित सर्वोपरि’। राष्ट्रपति ने कहा कि यह भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों के पेशेवर जीवन का स्थायी सिद्धांत होना चाहिए।
राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, मुर्मू ने कहा कि राजनयिकों को अपने संपर्कों को केवल सरकारी कार्यालयों और आधिकारिक बैठकों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्हें विश्वविद्यालयों, कारोबार जगत, शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों, सांस्कृतिक संस्थानों, नागरिक समाज और स्थानीय समुदायों तक भी पहुंच बनानी चाहिए। उन्होंने प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ सार्थक संपर्क कायम करने की सलाह दी, खासकर प्रवासी समुदाय के युवाओं को भारत से जुड़े रहने और देश की विकास यात्रा में योगदान देने के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित करने पर बल दिया।
कूटनीति के स्वरूप में तेजी से हो रहे बदलाव का उल्लेख करते हुए मुर्मू ने कहा कि प्रौद्योगिकी देशों के संवाद करने, कारोबार के संचालन और नागरिकों के सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंचने के तरीके को बदल रही है। उन्होंने कहा कि विदेशों में स्थित भारत के मिशनों को भी इस बदलाव के साथ कदमताल करनी होगी। मुर्मू ने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल बेहतर शासन और गहरे जुड़ाव के साधन के रूप में किया जाना चाहिए, लेकिन इसे कभी भी मानवीय संवेदना का स्थान नहीं लेना चाहिए।’’ राष्ट्रपति ने राजनयिकों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि जरूरत के समय भारतीय मिशन हमेशा देश के नागरिकों के लिए सुलभ और उपलब्ध रहें।
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर चलाए गए निकासी और मानवीय अभियानों के दौरान प्रदर्शित परंपरा को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। मुर्मू ने कहा, ‘‘मदद मांगने वाले प्रत्येक भारतीय को महसूस होना चाहिए कि उनका मिशन सुलभ, संवेदनशील और भरोसेमंद है।’’ मुर्मू ने कहा कि भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी न केवल हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता वाले देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि वे एक युवा, गतिशील और आकांक्षी भारत का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि शांति, बहुलवाद, संवाद, सह-अस्तित्व और विविधता के प्रति सम्मान भारत की सभ्यतागत सोच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ में गहराई से निहित हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से अनिश्चित और जटिल होती दुनिया में राजनयिकों को चुस्त, जिज्ञासु और लगातार सीखने के लिए तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘सबसे बढ़कर, उन्हें विनम्रता बनाए रखनी चाहिए।’’ मुर्मू ने युवा प्रशिक्षु अधिकारियों से विदेश यात्रा के दौरान हमेशा यह याद रखने का आग्रह किया कि वे केवल भारत सरकार का ही नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों और उनकी उम्मीदों तथा आकांक्षाओं का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। मुर्मू ने अधिकारियों को ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और पेशेवर आचरण के उच्चतम मानदंड बनाए रखने की सलाह दी।
भारतीय विदेश सेवा के 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों और भूटान के दो राजनयिकों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। ये सभी यहां सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान में वर्तमान में प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं।
Nepal Tibet सीमा पर आई Flood में 288 भारतीय लापता, राहत कार्य में जुटा MEA
(फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 27 अगस्त नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद कम से कम 288 भारतीय अब भी लापता हैं, जबकि लगभग 200 अन्य चीन की ओर फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि भारत दोनों देशों के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है, ताकि बचाव अभियान में समन्वय किया जा सके।
इसने कहा कि बचाव अभियान में तेजी आने के साथ भारत नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और संकट से निपटने में उसकी मदद कर रहा है। नेपाल में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने तीन जिलों में भारी तबाही मचाई है। बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 270 हो गई।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शीर्ष अधिकारियों तथा काठमांडू और बीजिंग में भारत के राजदूतों के साथ उच्चस्तरीय बैठक के बाद कहा कि भारत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के लिए “पुरजोर प्रयास” कर रहा है। भारत ने बुधवार रात से दो सैन्य परिवहन विमानों के जरिए कुल 47.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री नेपाल भेजी है और अधिक राहत सामग्री भेजने की प्रक्रिया जारी है। एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि भारत की तत्काल प्राथमिकता लापता भारतीयों का पता लगाना और उन्हें बचाना तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि नेपाल में लापता भारतीयों में जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले लोग और तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न राज्यों के पर्यटक समूह शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘288 भारतीय नागरिकों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। इनमें वे 73 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जो त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे थे।
काठमांडू स्थित हमारा दूतावास इन लोगों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए परियोजना प्रमुख के संपर्क में है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, तमिलनाडु के 37 और 49 भारतीय नागरिकों के दो अलग-अलग समूह हैं, जो सम्राट और फ्लाई एवरेस्ट ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे।’’ जायसवाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल के 32 भारतीय नागरिकों का एक अलग समूह भी था, जो सम्राट ट्रैवल्स की मदद से रसुवा जिले के तिमुरे गया था। उन्होंने कहा कि वहीं, कुछ अन्य राज्यों के 61 भारतीय नागरिकों का एक और समूह भी था। उन्होंने कहा कि केरल के 33 भारतीय नागरिकों का एक और समूह भी था।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को बचा लिया है... हमें जानकारी मिली है कि मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीय नागरिक चीन के क्षेत्र में फंसे हुए हैं।’’ जायसवाल ने कहा कि तिब्बत की ओर फंसे लगभग 200 भारतीय नागरिकों ने सुरक्षित निकाले जाने के लिए सहायता मांगी है। उन्होंने कहा कि इनमें से 95 लोग गारचेन में हैं और नेपाल में प्रवेश करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं, जबकि चार लोग जिलॉन्ग शहर में और 13 लोग जुतुलपुक में हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बाढ़ से तबाह हुए क्षेत्रों में स्थिति लगातार बदल रही है और भारत भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है।
उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद जयशंकर ने कहा, ‘‘बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सभी भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के लिए तत्काल प्रयास किए जा रहे हैं।” जयशंकर ने कहा कि उनका मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटर और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस मामले के साथ-साथ राहत प्रयासों को लेकर भी नेपाली पक्ष के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।’’ भारत ने बृहस्पतिवार को सैन्य परिवहन विमान से 37.5 टन राहत सामग्री की दूसरी खेप नेपाल भेजी। भारत ने बुधवार को 10 टन एचएडीआर (मानवीय सहायता और आपदा राहत) सामग्री भेजी थी।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत नेपाली अधिकारियों के साथ लगातार और करीबी संपर्क में है। हम जारी राहत प्रयासों को मजबूती से समर्थन देते रहेंगे।’’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से बात की थी और वहां बाढ़ से हुई जान-माल की क्षति पर संवेदना व्यक्त की थी। साथ ही, उन्होंने कहा था कि भारत पड़ोसी देश को हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है।
मोदी ने कहा था कि भारत के लोग इस कठिन समय में नेपाल के अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं।
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