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Explainer: तिब्बत की तरह ही भारत की भी 88 झीलें उफन रहीं, कभी भी फट सकती हैं; जानें 3 कारण

Explainer: नेपाल में तिब्बत की ओर से आई बाढ़ ने तबाही मचा दी है. बाढ़ में मरने वाले लोगों की संख्या 273 हो गई है, जिनमें 270 मृतक नेपाल से तो 3 मृतक नेपाल से हैं. नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह अचानक बाढ़ आ गई थी. मौसमी तबाही में करीब 1500 लोग अब भी लापता है. सिर्फ नेपाल में 900 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी मिली है, जिनमें से 525 विदेशी पर्यटक थे, जो 32 अलग-अलग देशों के नागरिक हैं. वहीं, चीनी सरकारी वेबसाइट के अनुसार, तिब्बत में 550 से अधिक लोग अब भी लापता है. 

भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल गए 288 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पाया है, जिसमें 73 लोग त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में काम करते हैं. अब तक 21 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया है. वहीं, तिब्बत में फंसे करीब 200 भारतीयों से भी लगातार संपर्क किया जा रहा है.  

भारत की भी 88 झीलें फटने का खतरा

IIT रोपड़ और सिडनी की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने एक साझा स्टडी की थी, जिसकी रिपोर्ट इसी महीने जारी की गई थी. रिपोर्ट के अनुसार, साल 1990 में हिमाचल प्रदेश में सिर्फ 107 ग्लेशियर झीलें थीं और यह आंकड़ा 2024 तक बढ़कर 669 हो गया, यानी 525% की बढ़ोत्तरी. 669 में से 88 झीलें ऐसी हैं, जिन पर ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा मंडरा रहा है. 9 झीलें को बहुत ज्यादा खतरनाक, 18 झीलों को ज्यादा खतरनाक और 26 झीलों को मध्यम खतरनाक की श्रेणी में रखा गया है. 

बता दें, यह रिसर्च ब्यास बेसिन की हिमसू झील और सतलुज बेसिन की एक बेनाम झील पर की गई थी. रिपोर्ट के अनुसार, अगर ब्यास झील का नेचुरल डैम टूट जाता है तो 1,385 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड के हिसाब से बाढ़ आ जाएगी. यानी हर सेकेंड करीब 14 लाख लीटर पानी बहेगा. इससे हर सेकेंड ओलंपिक साइज के 6 स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं. ऐसे ही सतलुज झील से 3,507 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड पानी का सैलाब आएगा. यानी हर सेंकेंड लगभग 35 लाख लीटर पानी बहेगा, जिससे डैम और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट सहित 588 इमारतों का खतरा है.  

हिमालय का बढ़ता तापमान ब्रस्ट के खतरे को और बढ़ा रहा है. जुलाई 2026 में आई IIT खड़गपुर की एक स्टडी के अनुसार, ऊंचाई वाले इलाकों का तापमान पिछले 20 वर्षों में करीब 1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इससे ग्लेशियर पिघलने और नदियों के बहाव में बड़ा बदलाव आ सकता है.  

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3 वजहों से फट सकती है ग्लेशियर की झीलें

1. ग्लोबल वार्मिंग और ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना

ग्लोबल वार्मिंग के वजह से मैदानी क्षेत्रों की तुलना में पर्वतीय इलाकों का तापमान अधिक तेज़ी से बढ़ रहा है. इससे ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप नई झीलों का निर्माण हो रहा है और पुरानी झीलों का आकार लगातार बढ़ रहा है. विज्ञान पत्रिका 'नेचर' के अनुसार, यदि तापमान इसी गति से बढ़ता रहा, तो अगले 70 वर्षों में हिमालय-काराकोरम क्षेत्र की लगभग 65% बर्फ पिघल सकती है, जिससे झीलों की संख्या और उनके आकार में अत्यधिक वृद्धि होगी.

2. झील में बर्फ या चट्टानों का गिरना

पहाड़ों पर भूस्खलन (Landslide) या हिमस्खलन (Avalanche) के कारण जब मिट्टी, चट्टानें या बर्फ के बड़े टुकड़े सीधे झील में गिरते हैं, तो झील में तीव्र लहरें उत्पन्न होती हैं. इससे झील का प्राकृतिक बांध क्षतिग्रस्त होकर टूट जाता है. नेचर पत्रिका के एक अध्ययन के अनुसार, हिमालय-काराकोरम क्षेत्र में अब तक दर्ज 388 से अधिक GLOF (ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड) की घटनाओं में हिमस्खलन को ही सबसे मुख्य कारण पाया गया है.

3. अत्यधिक बारिश और मानवीय गतिविधियां

अतिवृष्टि के कारण झीलों में जलस्तर अचानक बढ़ जाता है, जिससे प्राकृतिक बांध टूट जाता है. उदाहरण के लिए, पिछले वर्ष जुलाई में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ का प्रमुख कारण यही था, जहाँ भारी बारिश के कारण एक नई झील बन गई और ओवरफ्लो हो गई. भूकंप के साथ-साथ पहाड़ों में हो रहे अवैध खनन, वनों की कटाई और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स जैसी मानवीय गतिविधियों से पर्वतीय क्षेत्रों की प्राकृतिक स्थिरता प्रभावित होती है, जो झील के बांध टूटने का खतरा बढ़ा देती है.

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क्या भारत में इससे पड़ेगा कोई फर्क

भोटेकोशी नदी नेपाल के उत्तरी हिस्से में चीन-तिब्बत सीमा से निकलने वाली एक प्रमुख हिमालयी नदी है, जो मुख्य रूप से सिंधुपालचोक क्षेत्र से होकर बहती है. नेपाल में आगे बढ़ते हुए यह सुनकोशी और फिर सप्तकोशी नदी में मिल जाती है. नेपाल के हनुमान नगर के पास स्थित भीमनगर बराज (सुपौल जिले के बीरपुर के समीप) से यह बिहार में प्रवेश करती है, जहाँ इसे कोसी नदी के नाम से जाना जाता है. आगे चलकर यह नदी कटिहार के कुरसेला के पास गंगा नदी में मिल जाती है.

कोसी नदी में कमला और बागमती जैसी नदियों का जल भी मिलता है. ऐसे में यदि भोटेकोशी का जलस्तर अत्यधिक बढ़ता है, तो वह पानी सुनकोशी के रास्ते पूरे कोसी नदी तंत्र को उफान पर ला सकता है. जलस्तर बढ़ने की स्थिति में बिहार के सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और खगड़िया जिलों में गंभीर बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है.

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2008 में बिहार में हुआ था नुकसान

कोसी को अपने भीषण विनाशकारी स्वभाव के कारण 'बिहार की शोक नदी' कहा जाता है. वर्ष 2008 में नेपाल के कुसहा में कोसी नदी का मुख्य तटबंध टूट गया था. इसके परिणामस्वरूप नदी अपनी धारा बदलकर सैकड़ों वर्ष पुराने पूर्व दिशा वाले रास्ते पर बहने लगी थी, जिससे व्यापक जन-धन की हानि हुई थी. 

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Raksha Bandhan 2026: 'भैया मेरे राखी के बंधन' से 'मेरी बहना है' तक, भाई-बहन के प्यार की मिसाल है ये गाने

Raksha Bandhan 2026: दुनियाभर में 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा. ये दिन भाई-बहन के खूबसूरत रिश्ते को सेलिब्रेट करने का दिन है. इस खास मौके पर राखी और मिठाइयों के साथ बॉलीवुड के गाने भी माहौल को और यादगार बना देते हैं. हिंदी फिल्मों में भाई-बहन के प्यार, नोकझोंक और भावनाओं को बयां करने वाले कई शानदार गाने बनाए गए हैं, जो आज भी लोगों की जुबां पर रहते हैं. चलिए देखते हैं लिस्ट में किस-किसका नाम है.

1. भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना (Bhaiya Mere Rakhi)

'भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना' साल 1959 में रिलीज हुई फिल्म ‘छोटी बहन’ का है.  इसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी, जबकि इसके बोल शैलेंद्र ने लिखे थे और म्यूजिक शंकर-जयकिशन ने दिया था. गाने में एक बहन अपने भाई से राखी के रिश्ते को हमेशा निभाने और उसकी रक्षा करने का वादा मांगती है. ये गाना रक्षाबंधन पर लोगों की पहली पसंद में से एक है. 

2. मेरे भैया मेरे चंदा (Mere Bhaiyaa Mere Chanda)

साल 1965 में रिलीज हुई फिल्म 'काजल' का गाना 'मेरे भैया मेरे चंदा' आज भी बहुत मशहूर है. रक्षाबंधन के दिन ये गाना लगभग हर किसी के कानों में गूंजता है. इस गाने को दिग्गज गायिका आशा भोसले ने गाया है. रवि ने इसको म्यूजिक दिया है.  गाने में बहन अपने भाई के प्रति प्यार, अपनापन और उसके लिए अपनी भावनाओं को बेहद खूबसूरत अंदाज में जाहिर करती है. फिल्म में मीना कुमारी और धर्मेंद्र नजर आए.

3. फूलों का तारों का (Phoolo Ka Taaro Ka)

फूलों का तारों काएक ऐसा सदाबहार गाना है जिसने भाई-बहनों की कई पीढ़ियों के दिलों को छुआ है. किशोर कुमार और लता मंगेशकर की आवाजों के साथ-साथ आनंद बख्शी के खूबसूरत लिरिक्स ने इसे भाई-बहनों के बीच के रिश्ते को सेलिब्रेट करने वाला एक आइकॉनिक ट्रैक बना दिया है. बता दें, ये गाना 1971 में रिलीज हुई फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ का है.

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4. बहना ने भाई की कलाई से (Behna Ne Bhai Ki Kalai Se)

'बहना ने भाई की कलाई से' गाना भाई-बहन के रिश्ते पर बने बेहद पॉपुलर रक्षाबंधन में से एक है. ये गाना 1974 में रिलीज हुई फिल्म ‘रेशम की डोरी’ का है. इसे सुमन कल्याणपुर ने अपनी आवाज दी थी. गाने में बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधते हुए उसके प्रति प्यार और स्नेह जाहिर करती है. सुमन कल्याणपुर की आवाज और लिरिक्स की इमोशनल गहराई इस गाने को भाई-बहनों के बीच के खास रिश्ते के लिए एक दिल को छू लेने वाला ट्रिब्यूट बनाती है.

5. धागों से बांधा रिश्‍ता (Dhaagon Se Baandhaa)

साल 2022 में आई अक्षय कुमार की फिल्म ‘रक्षा बंधन’ का गाना धागों से बांधा रिश्‍ता भी बेहद फेमस है. इसमें अक्षय कुमार और उनकी चार बहनों के बीच के रिश्ते को दिखाया गया है.  इस गाने को अरिजीत सिंह, हिमेश रेशमिया और श्रेया घोषाल ने गाया है और यह रक्षा बंधन त्योहार का सार दिखाता है, जो उनके प्यार और भाई के उसकी रक्षा करने के वादे का प्रतीक है.

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