उत्तर प्रदेश के शामली में बुधवार शाम उस समय सनसनी फैल गई जब मशहूर हरियाणवी सिंगर और यूट्यूबर अंकित बालियान (35) की जिम के बाहर अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर निर्मम हत्या कर दी। हमलावरों ने उन पर करीब 20 राउंड गोलियां चलाईं, जिनमें से एक गोली उनके सिर में भी लगी। घटना के तुरंत बाद अंकित की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना उनके ही एक हिट गाने—'भारी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान'—की याद दिलाती है, जो गन कल्चर और हिंसा पर आधारित था।
पूरा मामला
35 साल के सिंगर, जो अपने हिट गाने 'भारी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान' के लिए जाने जाते थे, शाम करीब 7 बजे जिम से निकल रहे थे, तभी हमलावरों ने उन पर फायरिंग कर दी। हमलावरों के भागने से पहले ही उनकी मौत हो गई। हत्या के पीछे की वजह का अभी पता नहीं चल पाया है। गोगी गैंग ने बालियान की हत्या की ज़िम्मेदारी ली है। गैंग का दावा है कि सिंगर उनके दुश्मनों के संपर्क में था और उसने गैंग से जुड़ी एक घटना पर गाना भी बनाया था।
गैंग से जुड़े बताए जा रहे भोलू शाहपुरिया के इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट में लिखा था, "यह तो बस शुरुआत है, सबकी बारी आएगी।" गैंग ने उत्तर प्रदेश पुलिस को भी धमकी दी और चेतावनी दी कि बालियान की हत्या जैसी और भी घटनाएं हो सकती हैं।
पुलिस ने बताया कि बालियान अपना वर्कआउट खत्म करके जिम से करीब 20-25 मीटर दूर अपनी कार के पास पहुंचे थे, तभी हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। उन्होंने बताया कि फायरिंग में तीन से चार अज्ञात लोग शामिल थे। इस हत्या ने एक अजीब सी स्थिति पैदा कर दी क्योंकि बालियान के हिट गाने 'भारी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान' में हिंसा का ज़िक्र था।
शामली के बंटीखेड़ा गांव के रहने वाले बालियान पिछले कुछ सालों से हरियाणा के रोहतक और सोनीपत में रहकर सिंगिंग और एक्टिंग में अपना करियर बना रहे थे। वह नियमित रूप से शामली के जिम में जाते थे और बताया जाता है कि करीब एक साल से वहां जा रहे थे। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है, जिसमें पुरानी रंजिश और आगामी पंचायत चुनावों से संभावित संबंध शामिल हैं।
इस हत्या के बाद बालियान के परिवार वालों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए उनके शव को सड़क पर रखकर दिल्ली-मुजफ्फरनगर रोड जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक आरोपी पकड़े नहीं जाते, वे वहां से नहीं हटेंगे और गिरफ्तारी के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा।
बालियान के गानों का महत्व
बालियान की डिजिटल मौजूदगी मुख्य रूप से स्थानीय हरियाणवी पॉप म्यूज़िक वीडियो, दबंग अंदाज़ और पॉडकास्ट पर केंद्रित थी। उनके म्यूज़िक कंटेंट में क्षेत्रीय गर्व, "देसी" एटीट्यूड, ग्रामीण जीवन की कठोरता और कानून-व्यवस्था से जुड़े हाई-एनर्जी वाले विषय प्रमुखता से शामिल थे – जो गन कल्चर, स्थानीय राजनीति और युवाओं की बहादुरी पर आधारित उनके हिट गानों में साफ झलकता था।
एक क्रिएटर के तौर पर, उन्होंने मुख्य कलाकार और प्रोड्यूसर दोनों की भूमिका निभाई और अक्सर मासूम शर्मा, राजू पंजाबी और आशु ट्विंकल जैसे मशहूर हरियाणवी प्लेबैक कलाकारों के साथ काम किया। म्यूज़िक के अलावा, उन्होंने पॉलिटिकल पॉडकास्ट और ग्राउंड-लेवल व्लॉगिंग में भी हाथ आजमाया, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश और हरियाणा के स्थानीय नेताओं और समुदाय के प्रमुख लोगों के इंटरव्यू लिए।
बालियान '112 NE', 'गोली के बारूद', 'जाट जाटनी', 'अगला जनम जाट', 'संविधान', 'मोदी बरगा रुतबा', 'जाट धर्मेंद्र की तरिया', 'एक खटोला जेल के भीतर', 'वेट', 'सिस्टम', 'राइफलें' जैसे गानों के लिए भी जाने जाते थे। लेकिन उनकी मौत के बाद 'भारी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान' गाना एक दुखद संदर्भ बन गया – यह गाना बंदूक हिंसा के बारे में था और तब और भी परेशान करने वाला बन गया जब खुद बालियान को जिम के बाहर गोलियों से भून दिया गया।
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बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन इन दिनों अपने एक रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर विवादों में हैं। एक ज्वेलरी ब्रांड के इस ऐड में कृति बोल्ड ड्रेस पहनकर अपने भाई को राखी बांधती नजर आईं। वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके कपड़ों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। विवाद बढ़ता देख इस विज्ञापन को हटा दिया गया।
कंगना ने कृति पर कसा तंज
इस आलोचना पर कृति सेनन ने सवाल उठाया कि लोग लड़कियों को यह बताना कब बंद करेंगे कि उन्हें क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। कृति के इस बयान पर बीजेपी सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनौत ने कड़ा पलटवार किया है।
कृति के बयान पर कंगना का हमला
हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान कंगना ने कहा कि कृति को फिल्मों में कुछ भी पहनने से किसने रोका है? किसी को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि वे क्या पहनती हैं। कंगना ने कृति की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि त्योहार हमारी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा होते हैं। जैसे पूजा-पाठ के नियम होते हैं, वैसे ही रक्षाबंधन के भी कुछ नियम और मर्यादाएं होती हैं।
कंगना ने विज्ञापन पर उठाए सवाल
कंगना ने आगे कहा कि सिर्फ ड्रेस ही नहीं, बल्कि विज्ञापन में जिस तरह से त्योहार को दिखाया गया है, वह गलत है। उसमें टीका और परिवार जैसी पारंपरिक चीजें गायब थीं। उन्होंने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो यह कहकर विज्ञापन का बचाव कर रहे थे कि कपड़ों से फर्क नहीं पड़ता, जबकि वह विज्ञापन खुद एक प्रोडक्ट को प्रमोट कर रहा था।
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