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साइबर लिटरेसी- क्या वॉट्सएप पर इनकम टैक्स नोटिस आया है:ये फ्रॉड मैसेज है, ठगों से सावधान रहें, इन 7 तरीकों से पहचानें फेक मैसेज

क्या आपके वॉट्सएप पर भी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नाम से मैसेज आया है? अगर हां तो सावधान हो जाएं। यह साइबर फ्रॉड है। इन दिनों साइबर ठग आयकर विभाग के नाम से फर्जी मैसेज भेजकर लोगों को ठग रहे हैं। वॉट्सएप पर आए मैसेज में दावा किया जाता है कि आपका टैक्स रिफंड रुका हुआ है, आपके ITR में गड़बड़ी है। ठग इसके साथ फिशिंग लिंक, PDF या APK फाइल भेजते हैं। इस पर क्लिक करते ही यूजर ठगों के जाल में फंस जाता है। हाल ही में ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ (I4C) ने इस तरह के फर्जी मैसेज को लेकर एक अलर्ट जारी किया है। I4C गृह मंत्रालय के अन्तर्गत काम करता है। इसलिए ‘साइबर लिटरेसी’ कॉलम में आज हम फेक इनकम टैक्स नोटिस के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- भारत सरकार ने फेक इनकम टैक्स नोटिस से सावधान किया है। ये स्कैम क्या है? जवाब- यह एक फिशिंग स्कैम है। इसमें ठग इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नाम से वॉट्सएप पर फर्जी नोटिस भेजते हैं। वे टैक्स रिफंड, ITR में गड़बड़ी या जुर्माने का डर दिखाकर लिंक या फाइल पर क्लिक करने के लिए कहते हैं। इससे वे ठगी को अंजाम देते हैं। हाल ही में ‘PIB फैक्ट चेक’ ने भी ऐसे एक फर्जी नोटिस के बारे में चेतावनी जारी की है। इसमें यूजर के ₹6,000 टैक्स बकाया होने का दावा किया गया था। सरकार ने इसे फर्जी बताया है। सवाल- ठग लोगों को इस स्कैम में कैसे फंसाते हैं? जवाब- ठग इनकम टैक्स विभाग के नाम पर फर्जी नोटिस भेजकर लोगों को डराते हैं। ठगी का पूरा खेल ग्राफिक में देखिए- सवाल- .zip और .exe फाइलें क्या हैं? ये क्याें रिस्की होती हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- फोन में मालवेयर इंस्टॉल होने के क्या नुकसान हैं? जवाब- इससे साइबर ठग डिवाइस और उसमें मौजूद डेटा का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- स्कैमर्स किन लोगों को निशाना बनाते हैं? जवाब- वैसे तो कोई भी व्यक्ति इनका शिकार हो सकता है। लेकिन स्कैमर्स आमतौर पर ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं, जिन्हें सरकारी प्रक्रियाओं, ऑनलाइन सर्विसेज या साइबर सुरक्षा की जानकारी कम होती है, जैसेकि- सवाल- लोग वॉट्सएप पर आए नोटिस के झांसे में क्यों फंसते हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- इनकम टैक्स नोटिस से जुड़े फैक्ट्स क्या हैं? जवाब- इसे दो पॉइंट्स से समझिए- फैक्ट 1 फैक्ट 2 सवाल- इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्स का नोटिस कैसे भेजता है? जवाब- आयकर विभाग अपने आधिकारिक नोटिस ई-फाइलिंग पोर्टल (eportal.incometax.gov.in) पर जारी करता है। इसके अलावा नोटिस की जानकारी रजिस्टर्ड ईमेल और SMS के जरिए भी भेजी जाती है। अगर किसी नोटिस पर शक हो तो आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग–इन करके उसकी पुष्टि करें। सवाल- फेक इनकम टैक्स नोटिस कैसे पहचानें? जवाब- कुछ आसान संकेतों से फर्जी इनकम टैक्स नोटिस की पहचान कर सकते हैं। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए- सवाल- अगर वॉट्सएप पर टैक्स का नोटिस आए तो क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में तुरंत ये कदम उठाएं- सवाल- अगर गलती से लिंक खुल जाए, फाइल डाउनलोड हो जाए तो तुरंत क्या कदम उठाएं? जवाब- ऐसे में घबराएं नहीं। नुकसान से बचने के लिए तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाएं, जैसेकि- सवाल- कौन-सी जानकारी कभी-भी किसी से शेयर नहीं करनी चाहिए? जवाब- अपनी कुछ फाइनेंशियल और पर्सनल डिटेल्स कभी भी किसी से नहीं शेयर करनी चाहिए। पूरी लिस्ट नीचे देखें– …………………… ये खबर भी पढ़ें… साइबर लिटरेसी- रक्षाबंधन पर साइबर फ्रॉड का रिस्क:ऑनलाइन राखी खरीदते हुए बरतें 9 सावधानियां, जानें किसी भी स्कैम से कैसे बचें रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक है। इस दौरान लोग ऑनलाइन राखी, मिठाई और गिफ्ट ऑर्डर करते हैं। बढ़ती ऑनलाइन खरीदारी के साथ साइबर ठग भी एक्टिव हो जाते हैं। वे लोगों को ठगने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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रिलेशनशिप एडवाइज– पति साइलेंट ट्रीटमेंट देते हैं:झगड़ा हो तो बात नहीं करते, जब तक मैं माफी न मांगूं, क्या ये इमोशनल एब्यूज है

सवाल- मेरी शादी को चार साल हो चुके हैं। हमारे बीच जब भी किसी बात पर लड़ाई होती है, पति कई दिनों तक मुझसे बात नहीं करते। न फोन उठाते हैं, न मैसेज का जवाब देते हैं। घर में भी सिर्फ काम भर की बातें करते हैं। अगर मैं बातचीत शुरू करने की कोशिश करूं तो इग्नोर कर देते हैं। इस दौरान मैं बहुत बेचैन रहती हूं। उनकी चुप्पी खत्म करने के लिए आखिर में माफी मांग लेती हूं, जबकि गलती पूरी तरह मेरी नहीं होती। क्या हर झगड़े के बाद इस तरह चुप्पी साध लेना इमोशनल एब्यूज है? ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट-डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। हर शादी में मतभेद होते हैं। दो लोग साथ रहते हैं तो उनकी सोच, आदतें और उम्मीदें अलग होना स्वाभाविक है। इसलिए बहस होना किसी रिश्ते के खराब या कमजोर होने की निशानी नहीं है। असल बात यह है कि बहस के बाद क्या होता है। कुछ दंपती नाराज होते हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद बैठकर बात कर लेते हैं। कुछ लोग गुस्सा शांत करने के लिए कुछ घंटे अकेले रहना पसंद करते हैं। यह भी सामान्य है। लेकिन अगर हर विवाद के बाद एक व्यक्ति- तो यह सिर्फ नाराजगी नहीं रह जाती। यहीं से रिश्ते में संवाद की जगह साइलेंट ट्रीटमेंट लेने लगता है। साइलेंट ट्रीटमेंट सिर्फ चुप्पी नहीं साइलेंट ट्रीटमेंट का मतलब केवल चुप रहना नहीं है। यह ऐसी चुप्पी है, जिसमें सामने वाले को यह महसूस कराया जाता है कि जब तक वह आपकी शर्त नहीं मानेगा, तब तक उसे भावनात्मक दूरी झेलनी पड़ेगी। साइलेंट ट्रीटमेंट का इमोशनल इफेक्ट कई लोग पूछते हैं कि अगर कोई कुछ बोल ही नहीं रहा, तो उसे गलत कैसे माना जाए? दरअसल, रिश्ते सिर्फ शब्दों से नहीं चलते। चुप्पी भी एक भाषा होती है। अगर कोई व्यक्ति यह कहे कि "मैं अभी बहुत गुस्से में हूं। मुझे कुछ घंटे चाहिए, फिर बात करेंगे।" तो यह रिश्ते को संभालने की कोशिश है। लेकिन अगर वह बिना कुछ बताए कई दिनों तक संपर्क ही खत्म कर दे, तो यह दूसरे व्यक्ति के भीतर असुरक्षा पैदा करता है। वह समझ नहीं पाता कि रिश्ता ठीक है या टूटने की कगार पर है। यही अनिश्चितता सबसे ज्यादा तकलीफ देती है। धीरे-धीरे व्यक्ति की पूरी ऊर्जा इस बात में लगने लगती है कि किसी तरह सामने वाला फिर से बात करने लगे। यहीं से शक्ति का संतुलन बदलने लगता है। साइलेंट ट्रीटमेंट क्यों खतरनाक अगर चुप्पी का इस्तेमाल पार्टनर को अपराधबोध कराने, सजा देने या अपनी बात मनवाने के लिए किया जाए, तो यह स्वस्थ संवाद नहीं है। यह भावनात्मक नियंत्रण का तरीका बन सकता है। यहीं पर आपके सवाल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आता है। आपने लिखा है कि "आखिर में मैं ही माफी मांग लेती हूं, जबकि गलती पूरी तरह मेरी नहीं होती।" यही इस पूरे रिश्ते का सबसे बड़ा संकेत है। शादीशुदा जिंदगी के रेड फ्लैग अगर शादी में हर विवाद का अंत इस तरह हो कि एक व्यक्ति सिर्फ इसलिए माफी मांग ले, ताकि दूसरा फिर से बात करने लगे, तो समस्या केवल झगड़े की नहीं रह जाती। यह रिश्ते का एक पैटर्न बन जाता है। मनोविज्ञान में इसे कोर्सिव कंट्रोल या इमोशनल मैनिपुलेशन कहते हैं। इसका उद्देश्य हमेशा सामने वाले को चोट पहुंचाना नहीं होता, लेकिन परिणाम यही होता है कि एक व्यक्ति धीरे-धीरे अपनी जरूरतों, भावनाओं और असहमति को दबाने लगता है। इसका मतलब यह नहीं कि हर साइलेंट ट्रीटमेंट इमोशनल एब्यूज है। लेकिन अगर यह व्यवहार हर विवाद के बाद, बार-बार और आपको झुकाने के लिए दोहराया जा रहा है, तो इसे सामान्य कहकर नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। बदलाव की शुरुआत कैसे हो? अब सवाल यह है कि अगर आपके रिश्ते में ऐसा हो रहा है तो क्या किया जाए? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हर बार किसी भी तरह झगड़ा खत्म कर देना समाधान नहीं है। अगर हर विवाद का अंत सिर्फ इसलिए हो रहा है कि आप माफी मांग लें और सामने वाला फिर से बात करने लगे, तो असली समस्या वहीं की वहीं रह जाती है। अगली बहस में वही पैटर्न दोबारा दोहराया जाएगा। इसलिए कोशिश केवल बातचीत शुरू कराने की नहीं, बल्कि बातचीत का तरीका बदलने की होनी चाहिए। जब माहौल सामान्य हो, तब अपने पति से इस विषय पर बात करें। बातचीत की शुरुआत आरोप से नहीं, अपनी भावना से करें। उदाहरण के लिए, “जब कई दिनों तक बात बंद रहती है तो मुझे बहुत बेचैनी और असुरक्षा महसूस होती है। मैं चाहती हूं कि हम नाराज हों, लेकिन बातचीत बंद न करें।” ऐसी भाषा सामने वाले को कटघरे में खड़ा नहीं करती, बल्कि उसे आपकी भावनाएं समझने का मौका देती है। एक और बात का ध्यान रखें। अगर आपने कोई गलती की है तो माफी मांगने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन सिर्फ चुप्पी खत्म कराने के लिए हर बार माफी मांगना धीरे-धीरे इस व्यवहार को मजबूत कर सकता है। सामने वाले को यह संदेश मिलने लगता है कि बिना कुछ कहे भी वह आपको झुका सकता है। स्वस्थ रिश्ते मतभेद को कैसे हैंडल करते हैं? ऐसा नहीं है कि स्वस्थ रिश्तों में मतभेद नहीं होते। होते हैं, लेकिन उन्हें संभालने के तरीके अलग होते हैं। उदाहरण के लिए– दो समझदार वयस्क आपसे में ऐसे नियम बना सकते हैं। ये छोटे-छोटे नियम रिश्ते में भरोसा और भावनात्मक सुरक्षा बढ़ाते हैं। प्रोफेशनल मदद कब जरूरी? अगर आपने कई बार इस बारे में बात की है, लेकिन हर विवाद के बाद वही व्यवहार दोहराया जाता है, तो इसे सामान्य मानकर टालना ठीक नहीं होगा। ऐसी स्थिति में कपल काउंसलिंग एक अच्छा विकल्प हो सकती है। अगर आपका पार्टनर इसके लिए तैयार न हो, तब भी आप अकेले किसी मनोवैज्ञानिक से मिल सकती हैं। इससे आपको अपनी भावनाओं को बेहतर ढंग से समझने और रिश्ते में स्वस्थ सीमाएं तय करने में मदद मिलेगी। अंतिम बात आपने अपने सवाल में लिखा है कि "इस दौरान मैं बहुत बेचैन रहती हूं।" यही इस पूरी स्थिति का सबसे अहम संकेत है। किसी भी रिश्ते का उद्देश्य आपको लगातार असुरक्षा, अपराधबोध या डर में रखना नहीं होना चाहिए। याद रखिए, एक स्वस्थ शादी में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद बंद नहीं होता। नाराजगी हो सकती है, लेकिन सम्मान बना रहता है। और सबसे महत्वपूर्ण बात, रिश्ता बचाने की जिम्मेदारी दोनों की होती है। अगर हर बार सिर्फ एक ही व्यक्ति झुकता रहे, माफी मांगता रहे और रिश्ता संभालता रहे, तो यह साझेदारी नहीं, बल्कि पावर का असंतुलन है। ऐसे पैटर्न को समय रहते पहचानना और उस पर खुलकर बात करना ही रिश्ते को बेहतर बना सकता है। ………………………… ये खबर भी पढ़ें… रिलेशनशिप एडवाइज- डेटिंग एप पर हसबैंड ढूंढ रही हूं:लेकिन यहां फ्रॉड हैं, अपने बारे में झूठ बताते हैं, सही आदमी को कैसे पहचानूं ऑनलाइन डेटिंग अब शादी के लिए पार्टनर खोजने का एक सामान्य तरीका बन चुकी है। कई बार यहां लोगों को अच्छे रिश्ते मिलते भी हैं। लेकिन फर्जी प्रोफाइल, गलत जानकारी, कैटफिशिंग और आर्थिक ठगी के मामले भी लगातार सामने आते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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  Sports

WCPL 2026: कैरेबियन लीग में Team India की 4 महिला खिलाड़ियों का जलवा, Pooja Vastrakar समेत दिग्गजों की एंट्री

महिला क्रिकेट के प्रशंसकों के लिए कैरेबियाई क्षेत्र से अच्छी खबर है। महिला कैरेबियन प्रीमियर लीग के 2026 सत्र में भारत की चार प्रमुख खिलाड़ी विदेशी धरती पर अपना दम दिखाती नजर आएंगी। पूजा वस्त्राकर, किरण नवगिरे, यास्तिका भाटिया और शिखा पांडे को अलग-अलग टीमों ने अपने साथ जोड़ा है। सभी टीमों ने विदेशी खिलाड़ियों की सूची की पुष्टि कर दी है।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, भारतीय खिलाड़ियों में सबसे बड़ा नाम पूजा वस्त्राकर का है। उन्हें मौजूदा विजेता बारबाडोस ट्राइडेंट्स ने अपनी टीम में शामिल किया है। पूजा ने हाल ही में महिला प्रीमियर लीग के 2026 सत्र में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की ओर से कुछ मुकाबले खेले थे। बारबाडोस की टीम में पूजा के अलावा भारत की किरण नवगिरे और न्यूजीलैंड की मैडी ग्रीन तथा सूजी बेट्स भी शामिल हैं।

किरण नवगिरे अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जानी जाती हैं और बारबाडोस के बल्लेबाजी क्रम को अतिरिक्त मजबूती दे सकती हैं। वहीं, सूजी बेट्स का अनुभव टीम के लिए अहम होगा। मैडी ग्रीन भी न्यूजीलैंड की अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल हैं।

त्रिनबागो नाइट राइडर्स ने भारत की शिखा पांडे और यास्तिका भाटिया को अपनी टीम में जगह दी है। शिखा इससे पहले भी इस प्रतियोगिता में त्रिनबागो की ओर से खेल चुकी हैं और अब वह एक बार फिर टीम का हिस्सा होंगी। यास्तिका पहली बार महिला कैरेबियन प्रीमियर लीग में खेलती दिखाई देंगी। त्रिनबागो की विदेशी सूची में दक्षिण अफ्रीका की मरिजाने कैप और ऑस्ट्रेलिया की लॉरा हैरिस तथा मैडलीन पेन्ना भी शामिल हैं।

इस सत्र में नई टीम जमैका एक्सप्रेस भी मैदान पर उतरेगी। उसने ऑस्ट्रेलिया की पूर्व कप्तान मेग लैनिंग, आयरलैंड की एमी हंटर, दक्षिण अफ्रीका की नोंकू म्लाबा, पाकिस्तान की सैयदा आरूब शाह और न्यूजीलैंड की रोजमेरी मैर को टीम में शामिल किया है। मेग लैनिंग के लिए यह प्रतियोगिता में पदार्पण होगा। लंबे अंतरराष्ट्रीय अनुभव के बावजूद वह पहली बार महिला कैरेबियन प्रीमियर लीग का हिस्सा बनेंगी।

गुयाना अमेजन वॉरियर्स ने दक्षिण अफ्रीका की चार खिलाड़ियों ताजमिन ब्रिट्स, नादिन डी क्लर्क, क्लो ट्रायॉन और शबनिम इस्माइल को चुना है। ऑस्ट्रेलिया की एरिन बर्न्स भी टीम में शामिल हैं। एरिन ने आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला करीब सात साल पहले खेला था। ताजमिन ब्रिट्स इस टीम की ऐसी विदेशी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने इससे पहले इस प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया है।

गौरतलब है कि महिला कैरेबियन प्रीमियर लीग का 2026 सत्र 5 सितंबर से शुरू होगा और खिताबी मुकाबला 17 सितंबर को खेला जाएगा। इस बार प्रतियोगिता के सभी मुकाबले बारबाडोस के केंसिंग्टन ओवल में आयोजित होंगे। भारतीय खिलाड़ियों की मौजूदगी से टूर्नामेंट को भारत में भी अतिरिक्त दर्शक रुचि मिलने की उम्मीद है। खास तौर पर पूजा वस्त्राकर, किरण नवगिरे, शिखा पांडे और यास्तिका भाटिया के प्रदर्शन पर प्रशंसकों की नजरें टिकी रहेंगी।
Fri, 28 Aug 2026 22:42:00 +0530

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