साउथ सुपरस्टार यश की अपकमिंग फिल्म 'टॉक्सिक' को लेकर हैदराबाद में ग्रैंड प्री-रिलीज इवेंट आयोजित किया गया था। इस इवेंट के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। भीड़ के बीच एक भारी-भरकम साउंड सेट-अप गिर गया, जिसकी चपेट में आने से दो लोग घायल हो गए हैं। इस घटना के बाद एक्टर ने अपनी स्पीच रोककर स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों से घायलों की मदद करने की अपील की। घायलों को पास के अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।
कैसे हुआ हादसा?
हैदराबाद की मल्ला रेड्डी यूनिवर्सिटी में अभिनेता यश की आने वाली फिल्म 'टॉक्सिक' का प्री-रिलीज इवेंट चल रहा था। यूनिवर्सिटी में हजारों की संख्या में फैंस और लोग जुटे थे। भीड़भाड़ को देखते हुए पुलिस बार-बार लोगों से पीछे हटने का अनुरोध कर रही थी, लेकिन इसके बावजूद कई लोग मंच के करीब चले गए।
सामने आया हादसे का वीडियो
घटनास्थल का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कुछ युवाओं को कार्यक्रम स्थल के आसपास बनी संरचनाओं पर चढ़ते हुए देखा जा सकता है। कुछ लोग साउंड बॉक्स को सहारा देने वाले पोल पर चढ़ रहे थे, इसी दौरान पूरा साउंड सिस्टम अचानक नीचे गिर गया। इस घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
यश ने बीच में रोकी अपनी स्पीच
हादसे के वक्त यश मंच पर स्पीच दे रहे थे। साउंड सिस्टम गिरते ही साउंड और लाइट का एक हिस्सा खराब हो गया। जैसे ही अभिनेता को इस घटना की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत अपना भाषण रोक दिया और छात्रों का हाल-चाल पूछा, "अरे, संभलकर। क्या वहां सब ठीक है? क्या सब लोग सुरक्षित हैं?"
इसके तुरंत बाद उन्होंने अधिकारियों से स्थिति की जांच करने को कहा। दोनों घायलों को तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। आयोजकों द्वारा स्थिति नियंत्रण में होने की जानकारी दिए जाने के बाद यश ने अपना भाषण फिर से शुरू किया।
26 अगस्त को रिलीज होगी फिल्म
आपको बता दें कि फिल्म 'टॉक्सिक' 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। इस फिल्म में यश के साथ नयनतारा भी मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है।
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महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज एक नेचुरल प्रोसेस है। आमतौर 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच से मेनोपॉज शुरू होता है। इस दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल तेजी से कम होने लगता है। एस्ट्रोजन सिर्फ फर्टिलिटी के लिए जरूरी नहीं है। बल्कि यह हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब इसका लेवल घटता है, तो बोन डेंसिटी भी कम होने लगती है और हड्डियों में खोखले होने का जोखिम बढ़ जाता है।
मेनोपॉज के शुरू होने के बाद 5 से 10 सालों में महिलाओं की बोन मिनरल डेंसिटी तेजी से कम हो सकती है। जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि महिलाओं को इस दौरान क्या लक्षण महसूस हो सकते हैं। साथ ही इससे कैसे बचाव कर सकते हैं।
जानिए मेनोपॉज और हड्डियों का संबंध
हमारे शरीर की हड्डियां के टूटने या फ्रैक्चर होने पर वह दोबारा बन सकती हैं। युवावस्था में नई हड्डियां बनने का प्रोसेस ज्यादा एक्टिव होता है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ और मेनोपॉज के बाद यह प्रोसेस बिगड़ने लगता है। एस्ट्रोजन हड्डियों को टूटने से बचाता है। इसकी कमी होने पर हड्डियों का डैमेज तेजी से होने लगता है। यही वजह है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं को हड्डियों के खोखले और कमजोर होने की समस्या का सामना करना पड़ता है।
जानें कमजोर हड्डियों के शुरुआती संकेत
लगातार कमर दर्द होना
रीढ़ की हड्डियों में कमजोरी आने पर कमर और पीठ में लगातार दर्द हो सकता है। बता दें कि यह हड्डी से जुड़े रोग जैसे ऑस्टियोपोरोसिस का भी संकेत हो सकता है।
कम लंबाई होना
अगर बढ़ती उम्र के साथ ऊंचाई कम होती जा रही है। तो यह रीढ़ की हड्डियों के कमजोर होने या सिकुड़ने का भी संकेत हो सकता है। जब बोन डेंसिटी कम होती है, इसका प्रभाव रीढ़ पर देखने को मिलता है। इस कारण व्यक्ति झुककर चलने लगता है। ऐसे में हाइट कम लगने लगता है।
मामूली चोट में फ्रैक्चर होना
ज्यादा उम्र में मेनोपॉज के बाद हड्डियों के प्रभावित होने से कहीं पर साधारण चोट या हल्का गिरने पर भी कूल्हे, कलाई या रीढ़ की हड्डी टूटने का खतरा होता है।
मेनोपॉज के बाद क्यों कमजोर होती हैं हड्डियां
बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों के दोबारा बनने का प्रोसेस स्लो हो जाता है।
विटामिन डी और कैल्शियम की कमी होने पर बोन डेंसिटी कम होने लगती है।
उम्र की वजह से महिलाएं ज्यादा काम नहीं करती हैं, जिस कारण बोन हेल्थ प्रभावित होती है।
शराब और धूम्रपान का सेवन भी महिलाओं में बोन लॉस को तेज कर सकता है।
अगर महिला की फैमिली में किसी को पहले से ऑस्टियोपोरोसिस रोग रहा है, तो खतरा बढ़ सकता है।
मेनोपॉज के बाद कैसे मजबूत करें हड्डियां
कैल्शियम है जरूरी
महिलाओं को अपनी डाइट में दूध, पनीर, रागी, दही, तिल और हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करना चाहिए। यह सभी चीजें कैल्शियम का अच्छा सोर्स मानी जाती हैं।
विटामिन डी है जरूरी
सुबह की धूप और विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ कैल्शियम के अवशोषण में सहायता करते हैं। इससे हड्डियों के डैमेज होने का खतरा कम होता है।
एक्सरसाइज
तेज चलना, योग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और सीढ़ियां चढ़ना आदि हड्डियों को मजबूत बनाता है। वहीं ऐसा करने से मोटापा भी कंट्रोल होता है।
पर्याप्त प्रोटीन लेना जरूरी
प्रोटीन मांसपेशियों और हड्डियों दोनों के लिए जरूरी है। बढ़ती उम्र में मेनोपॉज के बाद हड्डियों को कमजोर होने से बचाने के लिए विटामिन डी, कैल्शियम के साथ प्रोटीन लेना जरूरी होता है।
नियमित हेल्थ चेकअप
समय-समय पर बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट और डॉक्टर की सलाह से हड्डियों की स्थिति का पता किया जा सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक 65 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं और जोखिम वाले मामलों में BMD टेस्ट कराना फायदेमंद हो सकता है। इस जांच से हड्डियों के कमजोर, हेल्दी और ऑस्टियोपोरोसिस की स्थिति का पता चलता है।
मेनोपॉज के बाद महिलाओं की हड्डियों के कमजोर होने का जोखिम अधिक बढ़ जाता है। लेकिन सही समय पर पहचान होने और सही लाइफस्टाइल अपनाकर इस खतरे को कम किया जा सकता है। झुकी हुई पीठ, कमर दर्द या बार-बार फ्रैक्चर जैसे संकेतों को इग्नोर नहीं करना चाहिए। विटामिन डी और कैल्शियम से भरपूर डाइट, एक्सरसाइज और बोन मिनरल डेंसिटी की जांच हेल्थ और मजबूत हड्डियों के लिए बेहद जरूरी है।
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