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Ayurveda For Monsoon: शरीर में कफ और वात संतुलित करता है सोंठ का पानी, ऐसे बढ़ाएं अपनी Immunity! जानें किन लोगों के लिए नुकासनदायक हैं?

बरसात का मौसम हर किसी को काफी पंसद होता है, क्योंकि चारों तरफ हरियाली और सुकून वाला मौसम होता है। हालांकि, इस दौरान सेहत का खासा ध्यान रखना ज्यादा जरुरी होता है। इस मौसम में सर्दी-खांसी, जुकाम और पाचन संबंधित समस्याएं ज्यादा परेशान करती हैं।
इनसे बचने के लिए आपको अपनी डाइट में काफी बदलाव करने की जरुरत है। वहीं, आपको ठंडी तासीर वाली चीजों से दूर रहना जरुरी है। कुछ खास हर्ब्स और देसी नुस्खों की मदद से इम्यूनिटी को मजबूत कर सकते हैं। ऐसे में आप सूखी अदरक यानी सोंठ का पानी पी सकते हैं। यह सेहत के लिए काफी फायदेममंद है। यह आपके पाचन में भी काफी सुधार लेकर आता है। जब आपकी इम्यूनिटी बूस्ट हो जाती है, तो सर्दी-खांसी छूमंतर हो जाती है। आइए आपको इसके फायदे और डाइट में कैसे शामिल करें बताते हैं।

मानसून में पानी में मिलाकर पिएं सूखी अदरक
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक सूखी अदरक का इंफ्यूज्ड पानी जरुर पिएं। 

 - सूखी अदरक को आधा टीस्पून पाउडर या 1-2 टुकड़े सूखी अदरक को 1 लीटर में पानी में डाल दें।

 - अब इसे करीब 10 मिनट तक उबालें और फिर अच्छे से छान लें।

 - इसको आप दिन पर पीती रहें। इसको खाने के साथ भी ले सकती हैं।

मानसून में सूखी अदरक का पानी पीने के फायदे
जिन लोगों को इम्यूनिटी कमजोर होती है, उन्हें इसका सेवन जरुर करना चाहिए-

पाचन में सुधार होता
सोंठ का पानी पीने से पाचन दुरुस्त रहता है, डाइजेस्टिव फायर (पाचन अग्नि) तीव्र होती है और भूख खुलकर लगती है। मानसून के समय पाचन अग्नि धीमी हो जाती है और ऐसे में डाइजेशन से संबंधित परेशनियां होती है। इसलिए इस पानी को पीना काफी फायदेमंद रहने वाला है।

गैस और ब्लोटिंग दूर होती है
अगर आप इस पानी को नियमित रुप से पीते हैं, तो गैस और ब्लोटिंग की समस्या दूर हो जाएगी। मानसून के समय आपको काफी आराम मिलेगा। खाने के बाद पेट में भारीपन महसूस नहीं होगा। इससे गट हेल्थ और मेटाबॉलिज्म में सुधार करता है और शरीर में जमा टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है।

 सर्दी-खांसी दूर होती है
इस पानी के सेवन से सर्दी-खांसी से बचाव होता है और आपके जुकाम या खांसी है, तो उससे भी राहत मिलती है। यह पानी मौसमी इंफेक्शन से बचाता है। यह शरीर में कफ और वात बैलेंस करता है।

इम्यूनिटी मजबूत होती है
सूखी अदरक पानी पीने से इम्यूनिटी मजबूत होती है। यदि आप इसका सेवन लगातार करती हैं, तो इम्यूनिटी बेहतर होगी और बीमारियों से बचाव होगा।

किन लोगों को सूखी अदरक पानी नहीं पीना चाहिए?
 - यदि आपको एसिडिटी या मुंह में अल्सर है, तो इसे नहीं पीना चाहिए।

 - मसालेदार खाने के बाद भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

 - जिन लोगों के शरीर में पित्त बढ़ा हुआ है यानी बॉडी हीट अधिक है और बर्निंग सेंसेशन अधिक महसूस होती है, उन्हें इसका सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। 

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Low Sperm Count की समस्या में IVF या IUI? जानें बेहतर Success Rate के लिए कौन सा Treatment है किफायती

आईवीएफ और आईयूआई दोनों ही फर्टिलिटी ट्रीटमेंट हैं। लेकिन अक्सर लोग दोनों को एक जैसा प्रोसेस समझ बैठते हैं। वहीं महिलाएं खुद भी दोनों प्रोसेस में से किसी एक को नहीं चुनती हैं। बल्कि डॉक्टर महिला की मेडिकल कंडीशन और उम्र को ध्यान में रखकर IVF और IUI में से किसी एक का चुनाव करते हैं। इन दोनों तरीकों, सफलता के चांसेज, खर्च और इस्तेमाल की स्थिति अलग-अलग होती है।

इसलिए इलाज शुरू करने से पहले यह समझना जरूरी होता है कि दोनों में क्या फर्क है और किस स्थिति में कौन सा ऑप्शन बेहतर माना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस बारे में बताने जा रहे हैं कि कपल्स के लिए कौन सा इलाज बेहतर है।

इसे भी पढ़ें: डिप्रेशन और तनाव का इलाज अब दवाओं में नहीं, Blue Space Therapy के जरिए पानी में मिल रहा है गहरा सुकून


जानें IVF और IUI में अंतर

IUI नेचुरल रूप से शरीर के अंदर फर्टिलाइजेशन होता है। जबकि IVF में लैब में शरीर के बाहर फर्टिलाइजेशन होता है।

IUI प्रोसेस में पुरुष के स्पर्म को पतली नली से सीधा महिला के यूट्रेस में डाला जाता है। वहीं IVF में महिला के एग्स को निकाला जाता है और फिर लैब में स्पर्म के साथ मिलाकर भ्रूण बनाया जाता है, इसके बाद में यूट्रेस में ट्रांसफर किया जाता है।

IUI बहुत सरल, कम इनवेसिव, बिना एनेस्थीसिया के 5-10 मिनट के अंदर पूरा होने वाला प्रोसेस है। जबकि IVF में एग्स को निकालने की छोटी सर्जरी, इंजेक्शन और एंब्रियो ट्रांसफर आदि किया जाता है।

IUI प्रोसेस में महिला की कम से कम एक फैलोपियन ट्यूब का खुला होना जरूरी है। जबकि IVF बंद फैलोपियन ट्यूब वाले केस में भी पूरी तरह से कारगर होता है।

IUI प्रोसेस तब होता है जब पुरुष में स्पर्म की हल्की कमी होती है या फिर महिला में बांझपन की समस्या होती है। वहीं गंभीर स्पर्म समस्या, एडवांस एंडोमेट्रियोसिस, PCOS या बार-बार IUI फेल होने पर IVF प्रोसेस कराने की सलाह दी जाती है।

ओव्यूलेशन के समय IUI प्रोसेस सिर्फ 1 दिन में पूरा होता है। जबकि IVF साइकिल में करीब 2 से 5 सप्ताह का समय लगता है।

IUI प्रोसेस क्लिनिकल प्रेग्नेंसी दर 33 फीसदी तक सफल हो सकता है। वहीं IVF क्लिनिकल प्रेग्नेंसी दर 46 फीसदी तक हो सकता है।

IUI प्रोसेस किफायती और कम खर्चीला इलाज होता है। जबकि IVF थोड़ा अधिक खर्चीला हो सकता है।

IUI क्या है और कैसे होता है

नेचुरल प्रेग्नेंसी में स्पर्म वजाइना से होते हुए गर्भाशय में जाता है और फिर फैलोपियन ट्यूब तक जाता है। ओवरी से एग निकलने के बाद फैलोपियन ट्यूब में जाकर स्पर्म में मिलता है और फिर फर्टिलाइज होता है। लेकिन IUI प्रोसेस में पतली नली की सहायता से स्पर्म को सीधे यूट्रेस में पहुंचाया जाता है। इससे स्पर्म फैलोपियन ट्यूब के बेहद करीब पहुंच जाता है।

IUI के जरिए स्पर्म को एग के पास तक पहुंचा दिया जाता है। जिस कारण प्रेग्नेंसी की संभावना बढ़ जाती है। इस प्रोसेस को कुछ मिनटों में ही पूरा किया जाता है। इसमें महिला को एनेस्थीसिया भी नहीं दिया जाता है। जब कपल में बिना किसी वजह इंफर्टिलिटी होती है, स्पर्म काउंट हल्का या स्पर्म की गतिशीलता कम होती है। तो IUI की सलाह दी जाती है। लेकिन सबसे जरूरी यह है कि जब महिला की फैलोपियन ट्यूब खुली होती है और ओवरी सामान्य रूप से काम कर रही हो, तभी यह प्रोसेस सफल होता है।

जानें क्या है IVF प्रोसेस

IVF एक एडवांस्ड टेक्निक है। जिसमें आमतौर पर महिला को कुछ दिन हार्मोन के इंजेक्शन दिए जाते हैं और ओवरी में ज्यादा अंडे बनाए जाते हैं। इस प्रोसेस के बाद एग्स को बाहर निकाला जाता है। लैब में पार्टनर के स्पर्म के साथ फर्टिलाइज किया जाता है। एंब्रियो बनने के बाद इसको वापस महिला के यूट्रेस में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

IVF की सलाह कब मिलती है
IVF की सलाह तब ही दी जाती है, जब IUI की संभावना काफी कम होती है।

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