Kareena Kapoor Pregnancy Rumours: 'पागल कर देते हो'... प्रेग्नेंसी रूमर्स उड़ाने पर पैपराजी पर भड़की करीना; VIDEO
Kareena Kapoor Pregnancy Rumours: बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर इन दिनों अपनी प्रेग्नेंसी की अफवाहों को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में जिम के बाहर उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनके तीसरी बार मां बनने की अटकलें लगने लगीं। अब जब पैपराजी ने इस वायरल वीडियो को लेकर करीना से माफी मांगी, तो एक्ट्रेस ने मजाकिया अंदाज में जवाब देते हुए कहा, “पागल कर देते हो तुमलोग।” करीना का यह रिएक्शन अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो से शुरू हुई प्रेग्नेंसी की अफवाह
दरअसल, एक पैपराजी वीडियो में करीना कपूर जिम से बाहर निकलती नजर आई थीं। वीडियो में उनका बॉडीगार्ड उन्हें छाते से कवर करता दिखाई दिया, जबकि उनके पेट का हिस्सा थोड़ा उभरा हुआ नजर आ रहा था। इसी के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने कयास लगाना शुरू कर दिया कि करीना कपूर प्रेग्नेंट हैं और वह पति सैफ अली खान (Saif Ali Khan) के साथ अपने तीसरे बच्चे का स्वागत करने वाली हैं। हालांकि, करीना ने इन अफवाहों की पुष्टि नहीं की। अगले दिन जब वह शहर में पैपराजी के सामने आईं तो फोटोग्राफर्स ने वायरल वीडियो के लिए उनसे माफी मांगी।
करीना ने मजाकिया अंदाज में दिया जवाब
पैपराजी की माफी पर करीना मुस्कुराती नजर आईं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “पागल कर देते हो तुमलोग।” इसके बाद वह अपनी कार में बैठकर वहां से चली गईं। करीना ने सोशल मीडिया पर भी इन प्रेग्नेंसी रूमर्स को गंभीरता से लेने के बजाय मजाक में टाल दिया।
उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक शख्स की तस्वीर शेयर की, जिसमें उसका पेट फूला हुआ दिखाई दे रहा था। इसके साथ उन्होंने फिल्म Hum Aapke Hain Koun के गाने ‘Chocolate, Lime Juice’ को लगाया। करीना ने हंसने और पिज्जा वाले इमोजी भी शेयर किए, जिससे ऐसा लगा कि वह वायरल वीडियो में दिखे पेट के उभार को खाने-पीने से जोड़कर मजाक कर रही हैं।
दो बेटों की मां है करीना
करीना कपूर ने अक्टूबर 2012 में कई साल डेट करने के बाद सैफ अली खान से शादी की थी। दोनों के दो बेटे हैं—Taimur Ali Khan और Jehangir Ali Khan। करीना पहले भी बता चुकी हैं कि फिलहाल उनके बच्चे एक्टिंग में खास दिलचस्पी नहीं रखते और उनका झुकाव स्पोर्ट्स की ओर ज्यादा है।
करीना कपूर की अपकमिंग फिल्म
वर्कफ्रंट की बात करें तो करीना कपूर जल्द ही Daayra में नजर आएंगी। फिल्म में Prithviraj Sukumaran भी अहम भूमिका में हैं। मेघना गुलजार के निर्देशन में बनी यह फिल्म कथित तौर पर सच्ची घटनाओं से प्रेरित एक इन्वेस्टिगेटिव ड्रामा है। फिल्म अपराध, न्याय और सजा के साथ-साथ किसी चौंकाने वाली घटना पर समाज की प्रतिक्रिया और उससे पैदा होने वाले मतभेदों की कहानी दिखाएगी। दायरा 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
काम की खबर: अस्पतालों का कमरा 3-स्टार होटल से महंगा नहीं होना चाहिए, संसदीय समिति की बड़ी सिफारिश
देश के बड़े शहरों में निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च कम करने की दिशा में संसदीय समिति ने अहम सिफारिश की है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने कहा है कि अस्पतालों के बेसिक रूम का किराया आसपास के 3-स्टार होटल के औसत कमरे के किराए से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
समिति की यह रिपोर्ट 7 अगस्त को राज्यसभा में पेश की गई और लोकसभा के पटल पर भी रखी गई। समिति ने अपनी रिपोर्ट 'अफोर्डेबिलिटी एंड एसेसिबिलिटी ऑफ हेल्थकेयर फेसिलिटीज इन पब्लिक एंड प्राइवेट सेक्टर' में खास तौर पर बड़े महानगरों के निजी अस्पतालों में कमरे के किराए को तर्कसंगत बनाने की जरूरत बताई है। समिति का मानना है कि कई निजी अस्पतालों में मरीज के इलाज के कुल बिल में कमरे का किराया बड़ा हिस्सा बन जाता है। इसलिए इसकी कीमत पर एक व्यावहारिक सीमा तय करने की जरूरत है।
अस्पताल के बेसिक रूम रेंट पर होगी सीमा
समिति ने सुझाव दिया है कि अस्पताल के कमरे का बेसिक किराया अस्पताल के आसपास या नजदीकी इलाके में मौजूद 3-स्टार होटलों के औसत कमरे के किराए से अधिक नहीं होना चाहिए। यह व्यवस्था बड़े महानगरों के सभी निजी अस्पतालों में अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। हालांकि, यह सीमा सिर्फ बेसिक रूम टैरिफ पर लागू होगी।
अस्पताल निवासी डॉक्टर, नर्सिंग, डिस्पोजेबल सामान, भोजन और लॉन्ड्री जैसे खर्च अलग से जोड़ सकेंगे। समिति का कहना है कि इन सेवाओं की लागत को अलग दिखाने से अस्पताल के कुल खर्च को अधिक पारदर्शी और तर्कसंगत बनाया जा सकेगा।
सरकारी और निजी अस्पताल के खर्च में बड़ा अंतर
समिति ने अस्पताल में भर्ती होने के खर्च में सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच बड़े अंतर को भी रेखांकित किया। 80वें नेशनल सैंपल सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी अस्पताल में भर्ती होने का औसत खर्च करीब 6631 रुपये, जबकि निजी अस्पताल में यह करीब 50508 रुपये था। देशभर में अस्पताल में भर्ती होने का औसत खर्च करीब 37858 रुपये और मरीजों का औसत आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर करीब 34,064 रुपये रहा।
रिपोर्ट में मेडिकल महंगाई की दर 10-13 प्रतिशत सालाना रहने का भी उल्लेख किया गया है। इससे परिवारों के इलाज पर होने वाला खर्च और हेल्थ इंश्योरेंस की लागत दोनों बढ़ रहे हैं।
इलाज के पैकेज रेट सार्वजनिक करने की सिफारिश
समिति ने निजी और सरकारी दोनों अस्पतालों के लिए सामान्य सर्जरी और मेडिकल प्रक्रियाओं के तय पैकेज रेट बनाने और उन्हें सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की सिफारिश की है। इन पैकेज में डॉक्टर की फीस, जांच, जरूरी मेडिकल सामान और सामान्य पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल शामिल होनी चाहिए।
समिति का मानना है कि छिपे हुए शुल्क और अलग-अलग मरीजों से अलग बिलिंग खत्म होने से इलाज का खर्च नियंत्रित हो सकता है और मरीजों को पहले से पता रहेगा कि इलाज पर कितना खर्च आएगा।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये फिलहाल संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशें हैं। अस्पतालों के लिए इन्हें अनिवार्य बनाने के लिए सरकार की मंजूरी और जरूरी नियामकीय कार्रवाई अभी बाकी है।
(प्रियंका कुमारी)
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