'टेस्ट क्रिकेट में लाओ फ्री-हिट का नियम...' स्पिनर्स के No-Ball से परेशान भारतीय स्पिन कोच बहुतुले ने ICC को दिया सुझाव
IND vs SL: श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में भारतीय स्पिनर्स द्वारा नो-बॉल फेंके जाने से टीम मैनेजमेंट काफी परेशान है. भारतीय स्पिनर्स लगातार क्रीज से आगे पैर निकालकर गेंदबाजी कर रहे हैं और नो-बॉल दे रहे हैं. रवींद्र जडेजा और डेब्यू कर रहे सारांश जैन द्वारा लगातार डाली जा रही नो-बॉल टीम मैनेजमेंट के लिए चिंता का विषय बन गई है. मैच के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब भारतीय टीम के स्पिन बॉलिंग कोच साईराज बहुतुले से इस बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस समस्या को स्वीकार किया और आईसीसी को एक अनोखा सुझाव दे दिया. बहुतुले ने कहा कि अगर टेस्ट क्रिकेट में भी नो-बॉल पर फ्री-हिट का नियम लागू कर दिया जाए, तो टेस्ट क्रिकेट में नो-बॉल का प्रतिशत निश्चित रूप से काफी कम हो जाएगा.
भारतीय स्पिन कोच साईराज बहुतुले ने कोलंबो टेस्ट के चौथे दिन का खेल खत्म होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें उनसे भारतीय स्पिनर्स द्वारा लगातार फेंकी जा रही नो-बॉल को लेकर सवाल किया गया, जिसके जवाब में बहुतुले ने कहा, "हम नो-बॉल पर काम कर रहे हैं. हां, कई बार यह निराशाजनक होता है, लेकिन चाहे जडेजा हों, सारांश हों या अन्य गेंदबाज, यह एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर हम काम कर रहे हैं और उनके खेल की लगातार निगरानी कर रहे हैं. ऐसा तब होता है जब कोई गेंदबाज अतिरिक्त प्रयास लगाने की कोशिश करता है."
No Balls are concern for us, Conversations are on with players says Sairaj Bahutule on Spinners bowlers bowling too many No Balls #SLvsIND #TeamIndia https://t.co/0oIJZDBnRa
— Ankan Kar (@AnkanKar) August 26, 2026
भारतीय स्पिन कोच साईराज बहुतुले ने आगे कहा, "मैं नियमों का रखवाला नहीं हूं, लेकिन अगर नो-बॉल पर फ्री-हिट का नियम आता है, तो जाहिर तौर पर नो-बॉल निश्चित रूप से कम हो जाएंगी. कोई भी टीम नो-बॉल फेंककर विरोधी टीम को वह अतिरिक्त गेंद और अतिरिक्त रन नहीं देना चाहेगी. निश्चित रूप से, टेक-ऑफ पॉइंट (पैर रखने की जगह) के बारे में बात की जा रही है. वे समझ रहे हैं कि क्या हो रहा है और इसे कम से कम करने के लिए निश्चित रूप से एक प्रक्रिया सामने रखी जाएगी.
????Sairaj Bahutule suggests introducing 'free hit' to Test cricket to curb no ball issue????
— Akshat (@Cricketmythos) August 26, 2026
Sairaj Bahutule said :????️
"It is something which we have been working on. It is definitely a concern at times. But when the bowler is putting in that effort and gets a wicket in situations… pic.twitter.com/fK3bkLBVDE
मैं अभी जिंदा हूं...आम के पेड़ ने ऐसे बचाई मजदूर की जान, जानें 'सर्वाइवल' की कहानी चश्मदीदों की जुबानी
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने जहां बड़े पैमाने पर तबाही मचाई, वहीं इस आपदा के बीच एक नेपाली मजदूर के बच निकलने की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है. 24 वर्षीय बिबेक कुमार बाढ़ के तेज बहाव में बह गए थे. पानी, कीचड़ और पत्थरों की तेज धार उन्हें अपने साथ दूर ले जा रही थी, लेकिन तभी एक आम का पेड़ उनके लिए जिंदगी की आखिरी उम्मीद बनकर सामने आया. पेड़ से टकराने के बाद वह उसके सहारे रुक गए और बाद में बचाव दल ने उन्हें सुरक्षित निकाल लिया.
अचानक सामने आई पानी, मलबे और पत्थरों की दीवार
बिबेक कुमार उस समय बिदुर इलाके में एक नए बने मकान के बाहर काम कर रहे थे. वह शौचालय के लिए गड्ढा खोद रहे थे, तभी अचानक पानी, मिट्टी और चट्टानों का तेज बहाव उनकी ओर आया.
उन्हें संभलने या सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का लगभग कोई मौका नहीं मिला. फ्लैश फ्लड की ताकत इतनी ज्यादा थी कि वह बहाव में फंसकर काफी दूर तक बह गए. इस दौरान आसपास का मलबा और पानी लगातार नीचे की ओर बढ़ता रहा.
आम का पेड़ बना जिंदगी का सहारा
बिबेक के लिए सबसे निर्णायक पल तब आया, जब तेज बहाव उन्हें एक आम के पेड़ तक ले गया. उनका शरीर पेड़ से टकराया और इसी वजह से वह पानी के साथ आगे बहने से रुक गए.
कुछ देर तक वह पेड़ के सहारे टिके रहे. यही छोटा-सा सहारा उनकी जिंदगी और मौत के बीच अंतर बन गया. यदि वह पेड़ नहीं होता तो तेज धारा उन्हें और दूर ले जा सकती थी.
बाद में पुलिसकर्मियों ने उन्हें वहां से निकाला और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया. उनके पैरों में चोटें आई हैं और उन्हें काठमांडू स्थित नेशनल ट्रॉमा सेंटर में उपचार दिया जा रहा है.
मैं अभी जिंदा हूं...
वहीं एक और शख्स जिसने इस भयंकर जल प्रलय के बीच जिंदगी बचाने में कामयाबी हासिल. इस शख्स ने बताया कि जान बचाने के लिए मैं जंगल और ऊंची जगह की ओर भागने लगा. मेरी ये कोशिश सफल रही और मैं बच गया, मैं अभी जिंदा हूं. यही जिंद बचने के बाद ये शख्स इतना खुश था कि वह कहने लगा मैंने मृत्यु पर विजय हासिल कर ली. दरअसल कुदरत का ये कहर इतना प्रलयंकारी था कि इसमें बचने के बाद इस तरह का ऐहसास होना लाजमी है.
अचानक बहुत तेज बाढ़ आई
इसके अलावा रसुवा तिमुरे कस्टम्स ऑफिस के चीफ कस्टम्स ऑफिसर राजेंद्र ढुंगाना, जो बाढ़ से सफलतापूर्वक बच निकले और जीवित रहे. उन्होंने बताया- टिमुरे में अचानक बहुत तेज़ बाढ़ आई. भन्सार कार्यालय के लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊँची जगह की ओर भागे.
बाढ़ इतनी तेज़ थी कि भन्सार परिसर में खड़े गाड़ियाँ और ट्रक भी बह गए।
कई कर्मचारी उस समय लापता/संपर्क से बाहर थे. उन्होंने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई और पहाड़ी/ऊँची जगह पर शरण ली. स्थिति इतनी गंभीर थी कि वहां से निकलना भी बहुत मुश्किल था. भन्सार यार्ड में 300 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन और मालवाहक ट्रक बह जाने का अनुमान था और कई कर्मचारी संपर्क में नहीं थे.
एक बच्ची भी बची, कई लोगों को मिला जीवनदान
इस आपदा में बिबेक कुमार अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जिन्हें आखिरी समय में जिंदगी मिली. रिपोर्ट के मुताबिक 11 वर्षीय रिहाना लामिछाने भी बाढ़ की चपेट में आई थीं. राहत दलों ने कई लोगों को सुरक्षित निकाला है. अब तक 114 से अधिक लोगों के बचाए जाने की जानकारी सामने आई थी.
बचाव अभियान में पुलिस, सेना और अन्य एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं. हालांकि, क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों के कारण कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचना बेहद मुश्किल बना हुआ है.
जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई हिमालय की चिंता
विशेषज्ञों के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र पहले से ही ग्लेशियरों में बदलाव और बढ़ते तापमान की चुनौती का सामना कर रहा है. गर्म मौसम के कारण बर्फ पिघलने की रफ्तार बढ़ सकती है और ग्लेशियरों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है. ऐसे में भूकंप जैसी प्राकृतिक घटनाएं जोखिम को और बढ़ा सकती हैं.
नेपाल की यह त्रासदी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताती है कि पहाड़ी इलाकों में आपदा कितनी तेजी से अपना रूप बदल सकती है. जहां एक ओर बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई, वहीं दूसरी ओर एक साधारण आम का पेड़ बिबेक कुमार के लिए जिंदगी का सहारा बन गया.
उनकी कहानी इस भयावह आपदा के बीच उम्मीद की एक ऐसी तस्वीर पेश करती है, जिसमें कुछ सेकंड और एक पेड़ ने एक इंसान को मौत के मुंह से वापस खींच लिया.
आधे घंटे में कई मीटर बढ़ गया नदी का जलस्तर
इस घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विशेषज्ञों के मुताबिक भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणाली में पानी का स्तर बहुत कम समय में तेजी से बढ़ा. अचानक आए मलबे और पानी की लहर ने नदी के आसपास मौजूद बस्तियों को संभलने का मौका तक नहीं दिया.
ऐसी फ्लैश फ्लड सामान्य बारिश से आने वाली बाढ़ से अलग होती है. इसमें पानी बेहद कम समय में खतरनाक गति से आगे बढ़ता है और अपने साथ चट्टान, मिट्टी, पेड़ तथा अन्य भारी मलबा भी बहाकर ले जाता है.
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