Supreme Court 1 सितंबर को UPSC CSE 2025 में OBC क्रीमी लेयर मामले पर सुनवाई करेगा
उच्चतम न्यायालय केंद्र सरकार की उस याचिका पर एक सितंबर को सुनवाई करेगा जिसमें सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई)-2025 के अभ्यर्थियों के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) संबंधी क्रीमी लेयर के निर्धारण से जुड़े मानदंड पर उसके 11 मार्च के फैसले को लागू करने के बारे में स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया है। उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार, इस मामले में 11 मार्च को फैसला सुनाने वाली न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर महादेवन की विशेष पीठ एक सितंबर को दोपहर 3.30 बजे केंद्र की याचिका पर सुनवाई के लिए बैठेगी। मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र की याचिका पर सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित करने पर सहमति जताई थी।
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने पहले ही निपटाए जा चुके एक मामले में कुछ जरूरी निर्देश देने के अनुरोध के साथ आवेदन दाखिल किया है और इसे न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाना है। एक पक्षकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा कि न्यायमूर्ति नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने 11 मार्च को आदेश पारित किया था और मौजूदा आवेदन पर उसी पीठ को सुनवाई करनी चाहिए, क्योंकि अब दोनों न्यायाधीश अलग-अलग पीठों में बैठ रहे हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमें एक विशेष पीठ गठित करनी होगी।’’ उन्होंने कहा कि वह संबंधित न्यायाधीशों से बात कर पीठ का गठन करेंगे।
डीओपीटी ने शीर्ष अदालत से निर्देश देने का अनुरोध किया कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा सीएसई-2025 के लिए अनुशंसित 958 उम्मीदवारों को सेवा आवंटन की प्रक्रिया को ओबीसी क्रीमी लेयर निर्धारित करने के उस आधार पर आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाए, जो 11 मार्च के फैसले से पहले लागू था। डीओपीटी की याचिका उच्चतम न्यायालय के ‘भारत संघ बनाम रोहित नाथन’ मामले में दिए गए फैसले से जुड़ी है। इस मामले में अदालत ने 11 मार्च को कहा था कि 14 अक्टूबर 2004 का स्पष्टीकरण पत्र, ओबीसी क्रीमी लेयर की पहचान से संबंधित 8 सितंबर, 1993 के कार्यालय ज्ञापन का स्थान नहीं ले सकता।
अदालत ने यह भी कहा था कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) या निजी क्षेत्र में कार्यरत माता-पिता के वेतन या आय को अकेले क्रीमी लेयर से बाहर रखने का निर्णायक आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि माता-पिता के पद की स्थिति और श्रेणी के साथ-साथ निर्धारित आय एवं संपत्ति संबंधी मानदंडों को 1993 के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार ध्यान में रखा जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने इसके पांच दिन बाद, 11 मार्च को रोहित नाथन मामले में फैसला सुनाया।
केंद्र ने बताया है कि जिन उम्मीदवारों के माता-पिता सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) या निजी क्षेत्र में कार्यरत थे और जिनकी आय निर्धारित सीमा से अधिक थी, हो सकता है उन्होंने उस समय लागू व्याख्या के आधार पर ओबीसी (गैर-क्रीमी लेयर) आरक्षण के लाभों के लिए खुद को अयोग्य मान लिया हो। केंद्र ने न्यायालय से संघ लोक सेवा आयोग द्वारा अनुशंसित सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई)-2025 के उम्मीदवारों के सेवा आवंटन की प्रक्रिया को 11 मार्च, 2026 से पहले लागू ओबीसी संबंधी क्रीमी लेयर निर्धारण करने के मानदंड के आधार पर पूरा करने की अनुमति मांगी है।
Delhi में H1N1 के 138 नए मामले मिले, अस्पतालों में बनेंगे फ्लू कॉर्नर और आइसोलेशन वार्ड
राष्ट्रीय राजधानी में बीते 24 घंटे में एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के 138 मामलों की पुष्टि हुई है और सरकार ने सभी अस्पतालों को ‘फ्लू कॉर्नर’ बनाने और आपातकालीन विभागों में वरिष्ठ रेजिडेंट चिकित्सकों को तैनात करने का निर्देश दिया। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। बयान के मुताबिक, 138 और मामलों के सामने के बाद इस साल एच1एन1 के कुल मामलों की संख्या 2446 हो गई है जबकि दिल्ली में अब तक इन्फ्लूएंजा-ए के कुल 3177 मामले दर्ज किए हैं।
इसके मद्देनजर दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने दिल्ली सरकार के विभिन्न अस्पतालों के चिकित्सा निदेशक (एमडी) और चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) के साथ एक ऑनलाइन समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मकसद एच1एन1, मौसमी इन्फ्लूएंजा और सांस से जुड़ी अन्य बीमारियों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा करना था। बैठक में स्वास्थ्य सचिव, विशेष सचिव और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान सभी अस्पतालों को निर्देश दिया गया कि वे कम से कम पांच पृथक बिस्तर तैयार रखें, जबकि बड़े अस्पतालों को इन्फ्लूएंजा और वेक्टर-जनित बीमारियों के मामलों के प्रबंधन के लिए 10 या उससे ज़्यादा पृथक बिस्तर सुनिश्चित करने को कहा गया है। बयान के अनुसार, अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं, जांच, दवाओं की उपलब्धता आदि को और अधिक मजबूत करने का भी निर्देश दिया गया। मंत्री ने अस्पतालों को यह भी निर्देश दिए कि वे आपातकालीन विभागों में समर्पित फ्लू कॉर्नर बनाएं और ड्यूटी के लिए वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर को तैनात करें।
उन्होंने कहा कि जिन संदिग्ध मरीज़ों में लक्षण दिखें, उनकी तुरंत जांच होनी चाहिए और जहां जरूरी हो, वहां स्वैब नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जाएं। बयान में कहा गया है कि बैठक में अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई और अस्पताल प्रशासन को जरूरी दवाओं की उपलब्धता पर नियमित रिपोर्ट देने और पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। इसके मुताबिक, अस्पतालों से कहा गया है कि वह जरूरत होने पर आवश्यक दवाओं की स्थानीय स्तर पर खरीद कर सकते हैं।
मंत्री ने ऐसे बैनर लगाने पर जोर दिया जिनमें इन्फ्लूएंजा के लक्षणों, सावधानियों और सही इलाज के लिए ज़रूरी व्यवहार के बारे में जानकारी हो। उन्होंने विशेष रूप से आपातकालीन विभागों और अधिक भीड़ वाले स्थानों पर ऐसी सामग्री प्रदर्शित करने के निर्देश दिए, ताकि लोगों को इन्फ्लुएंजा के लक्षणों, बचाव के उपायों और उचित समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के संबंध में जागरूक किया जा सके। उन्होंने कहा कि लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि अब तक अस्पतालों में आए अधिकतर मरीजों में हल्का बुखार और दूसरे अन्य सामान्य लक्षण पाए गए हैं और वे एक-दो दिन में ठीक हो गए हैं।
मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग इन्फ्लूएंजा के ट्रेंड और अस्पतालों की तैयारियों पर लगातार निगरानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में भी जांच और इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं, इसलिए दिल्ली के नागरिकों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
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