Delhi Lakshmi Yojana के तहत 4190 महिलाओं को मिले स्वीकृति पत्र, हर माह मिलेंगे ₹2500
दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत चार हजार से ज्यादा महिलाओं को बुधवार को स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और प्रदेश भाजपा प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा की मौजूदगी में 4190 महिलाओं को योजना के तहत स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम के दौरान 65 चयनित लाभार्थी महिलाओं को प्रतीकात्मक रूप से स्वीकृति पत्र दिए गए।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, महिलाओं को एक सितंबर से इस योजना के तहत 2500 रुपये की मासिक सहायता प्रत्यक्ष नकद अंतरण से मिलनी शुरू हो जाएगी। इसमें कहा गया है कि 21 से 60 वर्ष की आयु की महिलाओं के लिए शुरू की गई योजना के तहत करीब 9,13,495 लाभार्थियों का पंजीकरण किया गया है, जिनमें से 6,52,223 ने पूर्ण आवेदन जमा किए हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2025 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अपने संकल्प पत्र में “हर गरीब महिला को प्रति माह 2,500 रुपये की आर्थिक मदद देने” का वादा किया था।
दिल्ली के उपराज्यपाल संधू ने कार्यक्रम में कहा कि देश की लगभग आधी आबादी महिलाओं की है और विकसित दिल्ली एवं विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की बराबर की भागीदारी होगी। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति से ही राष्ट्र शक्ति का निर्माण संभव है। उपराज्यपाल ने कहा कि भारतीय परिवार व्यवस्था में महिलाओं को ‘गृह लक्ष्मी’ कहा जाता है और यह योजना इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं के सम्मान, सशक्तीकरण और वित्तीय स्वतंत्रता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा, “यह योजना केवल आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली की महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और अपने फैसले खुद लेने की ताकत देने का माध्यम है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि पात्र महिलाओं को उनका लाभ पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से मिले।” उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होंगी, तभी परिवार, समाज और देश तेजी से आगे बढ़ेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के तहत हर महीने मिलने वाली 2,500 रुपये की सहायता को महिलाओं के वर्तमान खर्च और भविष्य की बचत, दोनों को ध्यान में रखते हुए दिया जाएगा।
उनके मुताबिक, इसके तहत 1,000 रुपये ‘डिजिटल वॉलेट’ के माध्यम से खर्च के लिए उपलब्ध होंगे, जबकि 1,500 रुपये की राशि आवर्ती जमा (आरडी)/सावधि जमा (एफडी) के रूप में जमा की जाएगी ताकि महिलाओं के लिए भविष्य की बचत भी तैयार हो सके। गुप्ता ने कहा कि सावन, तीज और रक्षाबंधन के इस विशेष अवसर पर योजना की शुरुआत दिल्ली की महिलाओं के लिए एक विशेष सौगात है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से दिल्ली की महिलाओं के लिए ‘तीज का सिंधारा’ और ‘राखी की सौगात’ बताते हुए कहा कि यह सहायता महिलाओं को अपनी जरूरतों और सपनों के लिए उपयोग करने का अवसर देगी।
केंद्रीय राज्य मंत्री एवं प्रदेश भाजपा प्रमुख हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि यह योजना प्रधानमंत्री की गारंटी को पूरा करने और महिलाओं की गरिमा और वित्तीय स्वतंत्रता को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है। वहीं, कार्यक्रम में स्वीकृत पत्र लेने आईं बुराड़ी निवासी प्रीति ने कहा कि वह सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली आर्थिक सहायता का इस्तेमाल अपने बच्चे की स्कूल की फीस देने के लिए करेंगी। आनंद पर्वत निवासी अंजलि ने कहा कि सहायता से वह अपनी मर्जी से खुद पर पैसा खर्च कर सकेंगी और इसके लिए उसे अपने परिवार पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।
ऐसी महिलाएं योजना के तहत पात्र नहीं होंगी जिनके तीन से ज्यादा बच्चे हैं और जिनकी सालाना घरेलू बिजली खपत 2,400 यूनिट से अधिक है। कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के मंत्री, पार्टी के सांसद और अन्य लोग मौजूद थे।
Nepal Floods में फंसे तमिलनाडु के पर्यटकों को बचाने की Dayanidhi Maran ने विदेश मंत्री से अपील की
लोकसभा सदस्य दयानिधि मारन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बुधवार को नेपाल में आई भीषण बाढ़ में फंसे या लापता तमिलनाडु के करीब 50 लोग सहित भारतीय पर्यटकों को सुरक्षित निकालने और स्वदेश वापस लाने की अपील की। नेपाल के तिब्बत से सटे दो मध्यवर्ती जिलों में बुधवार तड़के अचानक आई भीषण बाढ़ से चार लोगों की मौत हो गई। बाढ़ से नदी किनारे बसी बस्तियों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई और कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं।
अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की ओर से भोटे कोशी नदी के रास्ते अचानक आई बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया। इससे तिब्बत से सटे रसुवा और धादिंग जिलों के साथ-साथ काठमांडू के दक्षिण-पश्चिम में स्थित नुवाकोट जिला भी प्रभावित हुआ। मारन ने एक औपचारिक पत्र में पड़ोसी देश में उत्पन्न हुई “गंभीर स्थिति” की ओर ध्यान आकर्षित किया।
मारन ने पत्र में कहा, “खबरों के अनुसार, कई लोगों की जान चली गई है और तमिलनाडु के करीब 50 पर्यटकों समेत कई अन्य लोग अब भी लापता हैं। दुर्गम इलाकों और लगातार जारी बाढ़ के कारण बचाव अभियान बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।” उन्होंने कहा, “इस प्राकृतिक आपदा से बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। सड़कें, पुल और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे बह गए हैं, जिससे संचार और परिवहन नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।” मारन ने विदेश मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध करते हुए केंद्रीय विदेश मंत्री जयशंकर से प्रभावित लोगों का पता लगाने, उन्हें सुरक्षित निकालने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कदम उठाने की अपील की।
उन्होंने भारतीय दूतावास और बचाव दलों को आवश्यक निर्देश जारी करने का भी आग्रह किया, ताकि नेपाल में फंसे भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा सके। पीएमके अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने नेपाल के उत्तरी रसुवा क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ के कारण 400 से अधिक भारतीयों के फंसे होने की खबर पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इनमें कुंभकोणम क्षेत्र के 57 लोग शामिल हैं।
रामदास ने एक बयान में बताया कि प्रभावित पर्यटक तंजावुर, तिरुवरूर और मयिलादुथुरई जिलों के रहने वाले हैं। उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, “बताया जा रहा है कि इनमें से 22 लोगों को बचा लिया गया है जबकि बाकी लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।” रामदास ने केंद्र और राज्य सरकारों से नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर सभी फंसे लोगों को सुरक्षित वापस लाने का आग्रह किया।
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