अयोध्या मंदिर विवाद में चंपत राय के पत्र के नए अंश सामने आए, 4 जून से जुलाई तक के घटनाक्रम पर उठे कई सवाल
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र से जुड़े एक विवाद के बीच चंपत राय के पत्र के कुछ और अंश सामने आए हैं. पत्र में 4 जून से लेकर जुलाई तक की घटनाओं का क्रमवार उल्लेख करते हुए धन की कथित हेराफेरी, अंदरूनी पूछताछ, पुलिस में एफआईआर नहीं कराने के निर्णय और मंदिर निर्माण समिति से जुड़े पदाधिकारियों के बयानों को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं.
पत्र में चंपत राय ने घटनाक्रम के अलग-अलग चरणों का विवरण देते हुए बताया है कि 4 जून को मामला सामने आने के बाद संबंधित लोगों से पूछताछ और धन वापस कराने की प्रक्रिया शुरू हुई. इसके बाद 6, 7 और 8 जून को लगातार बैठकों का दौर चला. पत्र के अनुसार, इस दौरान काफी धनराशि वापस भी प्राप्त की गई.
4 जून से शुरू हुआ घटनाक्रम
पत्र के मुताबिक, 4 जून को धन से संबंधित पूरा मामला सामने आया. इसके बाद अंदरूनी स्तर पर जानकारी जुटाने और संबंधित लोगों से धन वापस कराने की कोशिश शुरू हुई. 6 से 8 जून तक चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव समेत अन्य लोग पीएफसी भवन में कई घंटे तक बैठे रहे.
8 जून को मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र और अनुप मित्तल अयोध्या पहुंचे. पत्र में कहा गया है कि उन्हें 4 जून से शुरू हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई.
FIR को लेकर भी हुई चर्चा
पत्र में दावा किया गया है कि नृपेन्द्र मिश्र ने सवाल किया कि पुलिस में एफआईआर क्यों नहीं कराई गई. इसके जवाब में चंपत राय ने कथित तौर पर बताया कि यदि पुलिस में मामला दर्ज किया जाता तो जांच और आगे की कार्रवाई पूरी तरह पुलिस के हाथ में चली जाती.
पत्र के अनुसार, उस समय यह आशंका भी थी कि पुलिस जांच में कितना समय लगेगा और उसका परिणाम क्या होगा. साथ ही आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई गई थी.
सूचना लीक होने को लेकर उठी आशंका
पत्र में यह भी उल्लेख है कि धनराशि वापस मिलने के बाद एक दूसरा सवाल सामने आया कि पूरे मामले की जानकारी अखिलेश यादव तक किस माध्यम से पहुंची. इसी संदर्भ में संगठन के भीतर सूचना लीक होने और किसी ‘भेदिए’ की आशंका का जिक्र किया गया है.
हालांकि, पत्र में इस बात का कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है कि जानकारी किस व्यक्ति ने बाहर पहुंचाई.
11 जून को संतों के सामने रखी गई जानकारी
चंपत राय के पत्र के अनुसार, 11 जून की शाम मंदिर परिसर में संतों की मौजूदगी में उन्होंने घटनाक्रम से जुड़ी जानकारी साझा की. शेषावतार मंदिर पर ध्वजारोहण के बाद करीब 3,000 रामभक्तों के सामने चल रहे कथित दुष्प्रचार को लेकर संतों से अपने विचार रखने का आग्रह किया गया.
इसके बाद संतों के साथ हुई बैठक में गणना कक्ष से संबंधित कथित चोरी और उसके बाद की घटनाओं की जानकारी दी गई. पत्र में कहा गया है कि संतों ने उनकी बात स्वीकार की. इसी दौरान एक संत ने सवाल किया कि नृपेन्द्र मिश्र सार्वजनिक रूप से क्यों बोल रहे हैं.
नृपेन्द्र मिश्र के टीवी इंटरव्यू पर सवाल
पत्र के एक अन्य हिस्से में दावा किया गया है कि करीब 18 जून से नृपेन्द्र मिश्र ने दिल्ली में विभिन्न टेलीविजन चैनलों को इंटरव्यू देना शुरू किया. चंपत राय के अनुसार, लगभग चार दिनों में उन्होंने करीब 14 चैनलों से बातचीत की.
पत्र में कहा गया है कि शुरुआत में नृपेन्द्र मिश्र का दायित्व मंदिर निर्माण तक सीमित बताया जाता था, लेकिन बाद में उनके बयानों में मंदिर की दूसरी व्यवस्थाओं और कथित चोरी को लेकर भी टिप्पणी सामने आई. चंपत राय ने आरोप लगाया कि ‘चोरी’ की जगह ‘डकैती’ शब्द के इस्तेमाल से समाज में अलग संदेश गया.
जुलाई में भी जारी रही अंदरूनी चर्चा
पत्र के अनुसार, जुलाई के पहले सप्ताह में एक संत ने नृपेन्द्र मिश्र को लेकर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘खलनायक’ की भूमिका में बताया. इसके बाद 6 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट बैठक में नृपेन्द्र मिश्र के अयोध्या आने की योजना भी चर्चा में रही.
पत्र में दावा है कि यात्रा के लिए टिकट बन चुका था और चालक को भी सूचना दी गई थी, लेकिन 4 जुलाई को अचानक यात्रा रद्द होने का संदेश आया. पत्र में इस बदलाव का कारण स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता जताई गई है.
मंदिर की व्यवस्थाओं और हिसाब-किताब पर बड़ा सवाल
11, 12 और 13 जुलाई को नृपेन्द्र मिश्र तथा अनुप मित्तल के अयोध्या आने और चंपत राय से बातचीत का भी पत्र में उल्लेख है. इसके बाद 14 जुलाई को चंपत राय और अनुप मित्तल के बीच अलग से करीब एक घंटे बातचीत हुई.
चंपत राय ने कथित तौर पर सवाल उठाया कि पिछले छह वर्षों में मंदिर निर्माण समिति की बैठकों में निर्माण से जुड़े तकनीकी मुद्दों पर तो विस्तार से चर्चा होती रही, लेकिन मंदिर की अन्य व्यवस्थाओं और हिसाब-किताब पर सामूहिक चर्चा क्यों नहीं हुई.
पत्र के अनुसार, अनुप मित्तल ने स्वीकार किया कि इन विषयों पर कभी विस्तृत सामूहिक चर्चा नहीं हुई और नृपेन्द्र मिश्र टेलीफोन के माध्यम से निर्देश देते रहे.
अब सामने हैं कई अनुत्तरित सवाल
चंपत राय के पत्र के इन अंशों के सामने आने के बाद विवाद से जुड़े कई सवाल फिर चर्चा में हैं. मसलन, कथित धन हेराफेरी के मामले में पुलिस शिकायत के बजाय अंदरूनी स्तर पर धन वापस कराने की प्रक्रिया क्यों अपनाई गई? सूचना बाहर कैसे पहुंची? नृपेन्द्र मिश्र ने लगातार टीवी इंटरव्यू क्यों दिए? बाद में उनके बयान अचानक क्यों रुक गए? और मंदिर की अन्य व्यवस्थाओं तथा वित्तीय मामलों पर सार्वजनिक तौर पर चर्चा की जरूरत क्यों महसूस हुई?
फिलहाल पत्र में दर्ज घटनाक्रम और सवालों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए. इन आरोपों और आशंकाओं पर अंतिम निष्कर्ष तथ्यों, आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों के जवाब सामने आने के बाद ही निकाला जा सकता है.
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Xi Jinping किर्गिस्तान में SCO Summit में होंगे शामिल, पीएम मोदी भी पहुंचेंगे
के.जे.एम़. वर्मा बीजिंग, 26 अगस्त चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग अगले सप्ताह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई देशों के नेताओं के हिस्सा लेने की उम्मीद है। चीन के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि शी चिनफिंग 30 अगस्त से एक सितंबर तक किर्गिस्तान की राजकीय यात्रा के दौरान बिश्केक में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
किर्गिस्तान यात्रा के बाद शी चिनफिंग द्विपक्षीय यात्रा पर मिस्र जाएंगे। चीन वर्तमान में एससीओ का अध्यक्ष देश है और उसने पिछले अगस्त में तियानजिन में शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी भी शामिल हुए थे। सम्मेलन के बाद एससीओ की अध्यक्षता किर्गिस्तान संभालेगा।
तियानजिन शिखर सम्मेलन से इतर हुई मोदी-शी मुलाकात ने भारत-चीन संबंधों के सामान्यीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया था। इसके तहत कैलाश-मानसरोवर यात्रा, वीजा व्यवस्था में सुधार और सीधी उड़ानों जैसे लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने वाले कदमों पर सहमति बनी थी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि पिछले साल तियानजिन में हुए शिखर सम्मेलन में एससीओ के अगले 10 वर्षों के विकास के लिए रणनीतिक रूपरेखा तैयार की गई थी, जिससे संगठन के उच्च गुणवत्ता वाले विकास के नए चरण की शुरुआत हुई।
तियानजिन सम्मेलन में शी चिनफिंग ने ब्रिक्स के ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ और बीजिंग स्थित एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की तर्ज पर ‘एससीओ विकास बैंक’ बनाने का प्रस्ताव भी रखा था। लिन ने कहा कि बिश्केक शिखर सम्मेलन के दौरान शी चिनफिंग एससीओ के तहत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने को लेकर भाग लेने वाले देशों के नेताओं के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे। एससीओ के सदस्य देशों में रूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, बेलारूस और चीन शामिल हैं।
सितंबर महीना शी चिनफिंग के लिए काफी व्यस्त रहने वाला है। उनके 12-13 सितंबर को नयी दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने और इसके बाद अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ शिखर वार्ता करने की संभावना है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को बीजिंग में सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि (एसआर) तंत्र के तहत आयोजित 25वीं बैठक की।
बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बातचीत के संबंध में जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा, ‘‘दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग को और विस्तार देने, स्थिरता बनाए रखने तथा सीमा क्षेत्रों में शांति एवं सौहार्द सुनिश्चित करने के तरीकों पर चर्चा की। साथ ही सीमा निर्धारण में प्रगति और सीमा पार सहयोग से जुड़े मौजूदा प्रयासों को जारी रखने पर भी विचार-विमर्श किया गया।’’ विशेष प्रतिनिधि (एसआर) तंत्र को भारत-चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े विवाद को व्यापक रूप से सुलझाने के उद्देश्य से स्थापित एक महत्वपूर्ण व्यवस्था माना जाता है। इसके अलावा यह दोनों देशों के बीच कई अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर समय-समय पर उत्पन्न होने वाले तनाव को दूर करने के प्रयासों में भी अहम भूमिका निभाता है।
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