किशोर कुमार नहीं दे पाए परफेक्शन, क्लासिकल गाना बनाकर फंस गए ओपी नय्यर, संकट मोचन बनकर आए मोहम्मद रफी
Mohammad Rafi Song for Kishore Kumar : किशोर कुमार की जिंदगी में ऐसा भी वक्त था, जब संगीतकार उन्हें प्लेबैक सिंगर के तौर पर गंभीरता से नहीं लेते थे. वे भी तब गायकी से ज्यादा एक्टिंग पर ध्यान दे रहे थे. वे 1958 की फिल्म 'रागिनी' में जब बतौर हीरो काम कर रहे थे, तब उन्हें अपने लिए भी प्लेबैक सिंगिंग करनी थी, मगर वे एक गाने में बार-बार रिहर्सल के बावजूद वो परफेक्शन नहीं दे पा रहे थे, जो ओपी नय्यर को चाहिए था. वह गाना क्लासिकल अंदाज का था. ओपी नय्यर ने फिर मजबूरी में मोहम्मद रफी से रिकॉर्डिंग करवाई. उन्होंने पहले ही टेक में शानदार गाना गया.
39 साल पुराना ब्लॉकबस्टर गाना, अजीबोगरीब शब्दों से होता है शुरू, संगीतकार ने 6 महीने बाद 1 गलती के साथ किया रिलीज
अनुभव इंसान को माहिर बनाता है. 39 साल पहले लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने इस बात को साबित कर दिया था. उन्होंने एक ऐसा रिस्क लिया जो किसी के लिए भी लेना आसान नहीं था. आंखों देखी मक्खी खाना और वो भी करोड़ों के बजट वाली फिल्म पर ये दाव कोई भी आसानी से नहीं खेल सकता. लेकिन लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल इतने अनुभवी थे कि उन्हें पता था कि उनका ये दाव गलत साबित नहीं होगा और हुआ भी ऐसा ही ये गाना ब्लॉकबस्टर साबित हुआ.
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