कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने देश में "दो सिस्टम" बना दिए हैं - एक कुछ गिने-चुने अरबपतियों के लिए और दूसरा बाकी सभी के लिए। उन्होंने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के कामकाज की आलोचना करते हुए यह बात कही। एक्स पर एक पोस्ट में गांधी ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि जहां लोन न चुकाने पर किसानों और सैलरी पाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई होती है, वहीं कुछ खास कारोबारियों को बैंकों से खास सुविधा मिलती है। NCLT का ज़िक्र करते हुए गांधी ने लिखा, "NCLT - 'लीडर-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल'।
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर कोई किसान 50,000 रुपये नहीं चुका पाता है, तो उसकी ज़मीन नीलाम कर दी जाती है, जबकि सैलरी पाने वाले व्यक्ति की एक भी EMI छूटने पर बैंकों का दबाव झेलना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि गरीब छात्रों को एजुकेशन लोन लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई किसान 50 हज़ार रुपये नहीं चुका पाता, तो उसकी ज़मीन नीलाम कर दी जाती है। अगर सैलरी पाने वाले व्यक्ति की एक भी EMI छूट जाती है, तो बैंक के गुंडे घर आ धमकते हैं। गरीब छात्रों को तो पढ़ाई के लिए लोन भी नहीं मिल पाता।" गांधी ने आगे आरोप लगाया कि कुछ खास दोस्तों के लिए बैंक का पैसा अपनी निजी संपत्ति जैसा है - जितना चाहें निकालें, जितना मन करे उतना चुकाएं। उन्होंने एक्स पर लिखा, लेकिन कुछ खास 'दोस्तों' के लिए बैंक का पैसा अपनी निजी संपत्ति जैसा है - जितना चाहें निकालें, जितना मन करे उतना चुकाएं।
इस बीच, एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने आज कहा कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के सामने उनकी पर्सनल इनसॉल्वेंसी (व्यक्तिगत दिवालियापन) की कार्यवाही से जुड़ी खबरों ने उनके खिलाफ दावों की गलत तस्वीर पेश की है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वह सिर्फ़ एक पर्सनल गारंटर थे और उन्होंने किसी लेंडर (ऋणदाता) से व्यक्तिगत रूप से पैसे उधार नहीं लिए थे।
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सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स ने 'अमेरिकन हिंदूज़ फ़ॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' (AHEAD) फ़ोरम का अकाउंट सस्पेंड कर दिया है। यह फ़ोरम न्यूयॉर्क शहर में एक कार्यक्रम आयोजित कर रहा था, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत शामिल होने वाले थे। अब यूज़र्स के लिए एक्स अकाउंट 'अनअवेलेबल' (उपलब्ध नहीं) है। मीडिया रिपोर्ट अनुसार, संगठन ने एक बयान जारी कर कहा है कि सस्पेंशन शायद गलती से हुआ हो। बयान में आगे कहा गया, हमें पूरा भरोसा है कि हमारे कम्युनिकेशन ने हमेशा एक्स की पॉलिसी के अनुसार वैश्विक शांति, एकता, सद्भाव और अलग-अलग धर्मों व संस्कृतियों के बीच रचनात्मक बातचीत को बढ़ावा दिया है।
यह घटनाक्रम न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोरान मम्दानी के उस बयान के एक दिन बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे RSS या इस कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि इसे रद्द करने का अधिकार शहर के पास है। यह रैली 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होनी है। मोहन भागवत इस हफ़्ते NYC के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में इन्फोसिस थिएटर में होने वाले ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ में मुख्य वक्ता होंगे। वे अभी अमेरिका, कनाडा और UK के तीन देशों के दौरे पर अमेरिका में हैं।
मोहन भागवत का वीज़ा रद्द करने की मांग
आज इससे पहले, धार्मिक आज़ादी पर नज़र रखने वाली अमेरिकी कांग्रेस की एक सलाहकार संस्था ने ट्रंप प्रशासन से मोहन भागवत का वीज़ा रद्द करने की अपील की, जबकि RSS प्रमुख पहले से ही अमेरिका में मौजूद हैं। USCIRF ने भागवत की यात्रा पर चिंता जताई और आरोप लगाया कि RSS के सहयोगी संगठनों ने "धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हिंसक हमले किए हैं। भारत ने USCIRF के इन दावों को खारिज कर दिया है और इसे एक पक्षपाती संगठन बताया है जिसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है।
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