6 साल के बच्चे को ले जाते पुलिस का वीडियो:बिहार प्रदर्शन में शामिल भैया लोगों की खातिर गोली खाने को तैयार, कहा - निकलो मकानों से, जंग लड़ो बेईमानों से
25 अगस्त 2026 को पटना में BPSC TRE-4 उम्मीदवारों के प्रदर्शन के दौरान 6 साल के बच्चे का वीडियो वायरल हो रहा है। इस बच्चे का नाम आदित्य कुमार है। वह पहली कक्षा का छात्र है। वीडियो में पुलिस उसे प्रदर्शन स्थल से ले जाते हुए दिखाई दे रही है। प्रदर्शन स्थल से जाने के पहले आदित्य ने माइक के सामने छात्रों के समर्थन में बात की। उसने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से युवाओं के लिए नौकरी देने की मांग उठाई। आदित्य ने शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के इस्तीफे की मांग भी की। मांगों को पूरा कराने के लिए लाठी खाने का तैयार आदित्य बच्चे ने एसपी से जवाब मांगते हुए कहा कि सिर में चोट लगने की घटना का आदेश किसने दिया था। उसने पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। मीडिया से बात करते हुए आदित्य ने पूरे कान्फिडेंस के साथ कहा - इस प्रदर्शन के दौरान अपनी मांगों को पूरा करने के लिए अगर उन्हें लाठी खाना पड़े तो वो भी खाएंगे। जेल जाना पड़े तो भी जाएंगे। सब किसान, नौजवानों से की प्रदर्शन में शामिल होने की बात उससे जब यह पूछा गया कि यहां प्रदर्शन कर रहे भैया लोगों की क्या मांग है तो उसने कहा - भैया लोगों की मांग है कि BPSC का पेपर लीक क्यों हुआ। वह आगे कहता है -अभी हम बच्चा है। जब बड़े होंगे तो हो सकता है सरकार हमारे एग्जाम का पेपर भी लीक करा दे। इसीलिए हम कहते हैं कि सब किसान, नौजवान लोग इस प्रदर्शन में आ जाइए। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस उसे ले गई आदित्य ने कहा कि हम डरेंगे क्यों? हम डरने वाले नहीं है। गोली भी चलेगा तो खाएंगे पर इस भ्रष्टाचारी सरकार को भगाएंगे। सरकार के खिलाफ आवाज उठाते हुए इस मासूम बच्चे ने कहा - निकलो मकानों से, जंग लड़ो बेईमानों से। बाद में डाकबंगला चौराहे पर स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने उसे और उसकी मां को प्रदर्शन स्थल से हटा दिया। पहले भी प्रदर्शन में पहुंच चुका है आदित्य आदित्य इससे पहले पेपर लीक और सिवान में AK-47 मामले को लेकर तेजस्वी यादव के लोकभवन मार्च में भी शामिल हुआ था। इसके अलावा गर्दनीबाग में भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के बीच भी वह पहुंचा था। वहां उसने कहा था कि वह भी छात्र है और भविष्य में उसके साथ भी ऐसी समस्या हो सकती है। पटना के गर्दनी बाग में जारी है छात्रों का आंदोलन बिहार के पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षक भर्ती (BPSC TRE 4.0) की मांग को लेकर छात्रों का 'स्टूडेंट जस्टिस सत्याग्रह' आंदोलन गर्दनीबाग धरना स्थल पर हो रहा है। उम्मीदवार 'ऑल Ph.D. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार' के बैनर तले अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं। आंदोलन के बावजूद छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक TRE-4 समेत उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। सहायक प्राध्यापक बहाली में UGC Regulation 2018 के Table 3A लागू करने, बिहार में डोमिसाइल नीति प्रभावी करने और 70वीं BPSC परीक्षा निरस्त करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन कर रहे हैं। इस आंदोलन की शुरुआत में केवल शिक्षक भर्ती नोटिफिकेशन की मांग थी, जो अब बढ़कर 13 सूत्रीय मांगों में बदल चुकी है। इसे लेकर राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। आंदोलन के चलते जारी हुआ भर्ती नोटिफिकेशन इस आंदोलन के चलते बिहार लोक सेवा आयोग ने पिछले दिनों शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) का नोटिफिकेशन जारी किया था। TRE-4 के तहत कुल 32,388 पदों पर भर्ती की जाएगी। 1 सितंबर से ऑनलाइन आवेदन शुरू होगा। आवेदन की आखिरी तारीख 30 सितंबर है। नोटिफिकेशन जारी होने के बाद भी छात्रों का कहना कि उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। आंदोलन के बावजूद छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक TRE-4 समेत उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। --------------------------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें कंप्यूटर पढ़ाने के बदले झाड़ू-पोछा कराते हैं टीचर:छात्रों ने लगाए नारे- प्रिंसिपल हटाओ; जांच में बिस्किट देकर छात्रों को भड़काने का आरोप 20 अगस्त को कन्नौज के गुगरापुर PMश्री कंपोजिट विद्यालय में जूनियर कक्षाओं के बच्चे स्कूल पहुंचे और स्कूल के बाहर खड़े होकर प्रदर्शन करने लगे। बच्चों ने प्रभारी प्रधानाध्यापक राकेंद्र सक्सेना की कार को घेर लिया और नारेबाजी की। उन पर कई आरोप भी लगाए। पूरी खबर यहां पढ़ें
क्या 100 साल पहले बिहार आए लोग बाहरी हैं? पंचायत चुनाव आरक्षण पर हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया
Bihar Panchayat Election Reservation: पटना हाईकोर्ट ने आरक्षण को लेकर फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ कर दिया कि जिनके पूर्वज 100 या 125 साल पहले बिहार आकर बस गए थे, उन्हें बाहरी मानकर आरक्षण से रोका नहीं जा सकता. इस फैसले से सहरसा के मुखिया की कुर्सी वापस मिल गई है.
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