Gujarat Govt: श्रावण उत्सव में ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा बड़ा बाजार, 7 जिलों में लगेंगे सखी मंडल के मुफ्त स्टॉल
Gujarat Govt: गुजरात सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनके स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए नई पहल शुरू की है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में ‘श्रावण उत्सव’ के दौरान राज्य के 7 जिलों में विशेष मेलों और धार्मिक आयोजनों में Sakhi Mandal की महिलाओं को मुफ्त स्टॉल उपलब्ध कराए जाएंगे. यह पहल 26 अगस्त से 7 सितंबर 2026 तक चलेगी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लखपति दीदी’ अभियान को गति देना है.
महिलाओं को सीधे ग्राहक तक पहुंचने का मौका
गुजरात ग्रामीण आजीविका संवर्धन कंपनी लिमिटेड (GLPC) के जरिए ग्रामीण विकास विभाग, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत काम करने वाले स्वयं सहायता समूहों यानी सखी मंडल्स को मेलों में स्टॉल दिए जाएंगे.
इन स्टॉल पर महिलाएं अपने बनाए हुए विभिन्न उत्पाद सीधे ग्राहकों को बेच सकती हैं, जिनमें खाद्य उत्पाद और पारंपरिक व्यंजन, हस्तशिल्प और हैंडलूम उत्पाद, पारंपरिक परिधान, पूजा सामग्री, होम डेकोर आइटम और स्थानीय और ग्रामीण उत्पाद शामिल हैं. इस दौरान सखी मंडल की महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता के चेक भी वितरित किए जाएंगे. राजकोट में मेला 2 से 6 सितंबर तक रेसकोर्स में आयोजित होगा. वहीं गेला सोमनाथ में पांच दिवसीय मेले का आयोजन किया जाएगा.
महिलाओं को स्टॉल के साथ रहने-खाने की भी सुविधा
इस योजना की खास बात यह है कि महिलाओं को केवल स्टॉल ही मुफ्त नहीं दिए जाएंगे, बल्कि रहने और भोजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी. मेले में आने-जाने के लिए यात्रा खर्च भी प्रदान किया जाएगा. इससे Sakhi Mandal की महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा. सरकार का लक्ष्य है कि महिलाएं बिना अतिरिक्त खर्च के सीधे बड़े ग्राहक समूह तक पहुंचें और अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ा सकें.
श्रावण में क्यों चुना गया यह समय?
श्रावण गुजरात में धार्मिक आयोजनों और मेलों का प्रमुख समय है. इस दौरान शिव मंदिरों, ज्योतिर्लिंगों, शक्तिपीठों, कृष्ण मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. सरकार इसी बड़े जनसमूह को ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों के लिए संभावित बाजार के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है. इससे स्थानीय उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने और बिक्री बढ़ाने का अवसर मिलेगा.
रिटेल जीसीसी के वर्कफोर्स में एआई से जुड़े टैलेंट की हिस्सेदारी 2028 तक 10 प्रतिशत से अधिक होने का अनुमान
नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। रिटेल जीसीसी में एआई से जुड़े टैलेंट की हिस्सेदारी 2028 तक बढ़कर 10.6 प्रतिशत पहुंचने की उम्मीद है। यह आंकड़ा 2025 में 4.8 प्रतिशत और 2022 में 2.1 प्रतिशत था। यह जानकारी बुधवार को जारी नई रिपोर्ट में दी गई।
रिटेल और कंज्यूमर जीसीसी में अभी एआई और डेटा से जुड़े मुख्य कामों में लगभग 7,800 पेशेवर काम कर रहे हैं, और 2025 में एआई और डेटा टैलेंट के लिए 990 पदों की मांग थी।
टीमलीज डिजिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिन 180 जीसीसी का आकलन किया गया, उनमें से टॉप 50 मेगा रिटेल जीसीसी में से केवल 22 में एआई क्षमताएं विकसित पाई गईं, यानी वे सिर्फ एआई का इस्तेमाल नहीं कर रहे, बल्कि उसे बना भी रहे हैं।
बेंगलुरु में भारत के रिटेल जीसीसी एआई टैलेंट पूल का 54 प्रतिशत हिस्सा है, जहां 4,200 प्रोफेशनल्स काम करते हैं, जबकि 8 साल से ज्यादा अनुभव वाले सीनियर एआई लीडर्स की संख्या पूरे देश में बहुत कम और कुछ खास जगहों तक ही सीमित है।
दिल्ली-एनसीआर दूसरे नंबर पर है, लेकिन बेंगलुरु से काफी पीछे है, और उसके बाद हैदराबाद का नंबर आता है। चेन्नई, मुंबई और पुणे में से हर एक जगह पर 20 से भी कम सीनियर लीडर्स हैं।
इस वर्कफोर्स में, सीनियर एआई टैलेंट पूल यानी 8 या उससे ज्यादा साल के अनुभव वाले प्रोफेशनल्स की संख्या पूरे देश में सिर्फ 320 है। इस ग्रुप के लगभग दो-तिहाई (63 प्रतिशत, यानी लगभग 202 प्रोफेशनल्स) एआई इंजीनियरिंग लीड लेवल पर हैं, जिनका औसत अनुभव 9 साल है।
एआई/डेटा डायरेक्टर्स की हिस्सेदारी 22 प्रतिशत है। सबसे ऊंचे लेवल पर, एआई आर्किटेक्ट्स और प्रिंसिपल साइंटिस्ट्स का हिस्सा सिर्फ 15 प्रतिशत है यानी पूरे देश में लगभग 47 प्रोफेशनल्स, जिनका औसत अनुभव 14 साल से ज्यादा है।
रिपोर्ट के अनुसार, जेनएआई स्पेशलिस्ट्स (औसत अनुभव 5 साल) इस सीनियर ग्रुप से बाहर हैं और टैलेंट स्ट्रक्चर में एक अलग उभरता हुआ हिस्सा बनाते हैं।
--आईएएनएस
एबीएस
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