पुराना दुपट्टा अब नहीं जाएगा बेकार, घर में इन 7 तरीकों से करें इसका शानदार इस्तेमाल
Old Dupatta Reuse Ideas: अलमारी साफ करते समय जब कोई पुराना दुपट्टा हाथ में आता है, तो अक्सर मन में पहला ख्याल यही आता है कि इसे अब रखा किसलिए जाए? कभी रंग फीका पड़ जाता है, कभी फैशन बदल जाता है और कई बार दुपट्टा सलवार-कुर्ते के साथ पहनने लायक भी नहीं रहता. लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि कपड़ा बेकार हो गया. घर में थोड़ी-सी कल्पनाशीलता के साथ पुराने दुपट्टे को कई उपयोगी चीजों में बदला जा सकता है. खास बात यह है कि इसके लिए हमेशा सिलाई मशीन या बहुत ज्यादा मेहनत की जरूरत भी नहीं होती. अगर आपके पास कोई सूती, जॉर्जेट, कॉटन या प्रिंटेड पुराना दुपट्टा रखा है, तो उसे फेंकने से पहले ये आसान तरीके जरूर देख लें. हो सकता है अलमारी में पड़ा वही कपड़ा घर के किसी कोने की खूबसूरती बढ़ा दे.
Adani Energy को Maharashtra में मिला 4,700 करोड़ का Transmission Project, अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ेगा दबदबा
अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) को महाराष्ट्र में 4,500 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा एवं भंडारण बिजली की निकासी के लिए 4,700 करोड़ रुपये की पारेषण परियोजना मिली है। कंपनी के बुधवार को जारी बयान के अनुसार, ‘‘पश्चिमी क्षेत्र में सातारा के पास पंप स्टोरेज क्षमता के लिए नेटवर्क विस्तार योजना (4,500 मेगावाट तक)-भाग-ए’’ परियोजना एईएसएल को शुल्क आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) प्रक्रिया के जरिये मिली है।
बयान के अनुसार, निजी पारेषण एवं वितरण कंपनी और वैश्विक स्तर पर विविधीकृत अदाणी समूह का हिस्सा एईएसएल ने कर्नाटक में उत्पन्न होने वाली नवीकरणीय ऊर्जा को महाराष्ट्र के प्रमुख बिजली खपत केंद्रों तक पहुंचाने के लिए यह महत्वपूर्ण पारेषण परियोजना हासिल की है। परियोजना पर अनुमानित 4,700 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय होगा। इससे सातारा, पुणे और मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में बढ़ते पंप स्टोरेज तंत्र को भी समर्थन मिलेगा।
सातारा पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड नामक विशेष इकाई (एसपीवी) के तहत आने वाली इस परियोजना को 36 महीने में पूरा किया जाना है। एईएसएल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कंदर्प पटेल ने बयान में कहा, ‘‘सातारा पारेषण परियोजना नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी और ऊर्जा भंडारण की तैनाती, दोनों को समर्थन देने के लिए एक महत्वपूर्ण पारेषण आधार तैयार करेगी।
इससे दक्षिणी और पश्चिमी भारत के बीच बिजली के प्रवाह को मजबूत करने में मदद मिलेगी।’’ परियोजना में सातारा में 765/400 केवी का उपकेंद्र स्थापित करना, कोल्हापुर-सातारा 765 केवी की दोहरी सर्किट वाली पारेषण लाइन बिछाना और कोल्हापुर पूलिंग स्टेशन की क्षमता बढ़ाने के साथ संबंधित पारेषण ढांचा तैयार करना शामिल है।
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