MG की नई इलेक्ट्रिक SUV हेक्टर हॉक EV आज आएगी:फुल चार्ज में 530km चलेगी, टाटा सिएरा और कर्व ईवी से मुकाबला
JSW MG मोटर इंडिया आज भारत बाजार में अपनी कार लॉन्च करने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये 3-रो इलेक्ट्रिक SUV होगी, जो फुल चार्ज में 530km चलेगी। यह कार इंटरनेशनल मार्केट में बिकने वाली वुलिंग स्टारलाइट 560 पर बेस्ड है, लेकिन भारतीय बाजार को ध्यान में रखते हुए इसके डिजाइन और फीचर्स में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। 15 से 25 लाख रुपए के बीच हो सकती है कीमत हेक्टर हॉक की एक्स-शोरूम कीमत 15 से 25 लाख रुपए के बीच हो सकती है। हाइब्रिड मॉडल का मुकाबला टोयोटा अर्बन क्रूजर हाइराइडर, मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा, और मारुति सुजुकी विक्टोरिस से होगा। वहीं, हेक्टर हॉक EV का सीधा मुकाबला टाटा हैरियर EV और महिंद्रा XEV 9S जैसी इलेक्ट्रिक SUV से रहेगा। एक्सटीरियर डिजाइन: नया ग्रिल और स्पोर्टी अलॉय व्हील्स हेक्टर हॉक ईवी का बाहर से लुक अंतरराष्ट्रीय मॉडल से काफी अलग और ज्यादा अग्रेसिव है। फ्रंट प्रोफाइल: कार के सामने बिल्कुल नई डिजाइन नर्ल्ड टेक्सचर वाली ग्रिल और नया बंपर दिया गया है। इसकी हेडलाइट्स के नीचे खास कट्स दिए गए हैं, जिससे यह काफी मजबूत और मस्कुलर यानी भारी-भरकम दिखती है। साइड प्रोफाइल: साइड से यह एक बड़ी और बॉक्सी SUV जैसी लगती है। इसकी छत को 'फ्लोटिंग रूफ' का लुक देने के लिए दरवाजों के बीच के A,B और C पिलर्स को पूरी तरह ब्लैक रखा गया है। साथ ही स्पोर्टी लुक के लिए रेड ब्रेक कैलिपर्स और 5-स्पोक डुअल टोन अलॉय व्हील्स दिए गए हैं। रियर प्रोफाइल: कार के पिछले हिस्से में बड़े आकार की चौकोर LED टेललाइट्स मिलेंगी। बंपर पर एक पतली लाल रंग की पट्टी दी गई है, जो इसे और स्पोर्टी बनाती है। इसके इलेक्ट्रिक (EV) वर्जन का डिजाइन दूसरी गाड़ियों से थोड़ा अलग रखने के लिए पीछे के हिस्से में हल्का बदलाव किया जा सकता है। इंटीरियर डिजाइन: 3-रो सिटिंग और प्रीमियम बेज अपहोल्स्ट्री यह कार एक थ्री-रो SUV होगी, जो बड़ी फैमिलीज के लिए एक बढ़िया ऑप्शन हो सकती है। फीचर्स: 12.8 इंच इंफोटेनमेंट और पैनोरमिक सनरूफ कंपनी ने फिलहाल कार के फीचर रिवील नहीं किए हैं, लेकिन ग्लोबल वर्जन के आधार पर इसमें 12.8 इंच का बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, 8.8 इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, पैनोरमिक सनरूफ, वायरलेस फोन चार्जर, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, पावर्ड व वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स और पावर्ड टेलगेट जैसे फीचर मिलने की उम्मीद है। परफॉरमेंस: 530km की रेंज और 3 पावरट्रेन ऑप्शन MG हेक्टर हॉक को कंपनी के नए एडवांस्ड डायनामिक आर्किटेक्चर फॉर प्लग-इन एंड ट्रांसमिशन प्लेटफॉर्म (ADAPT) पर तैयार किया गया है। यह प्लेटफॉर्म ICE, हाइब्रिड और EV सभी पावरट्रेन को सपोर्ट करता है। सेफ्टी फीचर्स: लेवल-2 ADAS और 360-डिग्री डिस्क ब्रेक सुरक्षा के लिहाज से MG हेक्टर हॉक को काफी मजबूत बनाया गया है। इसमें लेवल-2 एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS), मल्टीपल एयरबैग्स, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, चारों पहियों पर डिस्क ब्रेक, हिल होल्ड असिस्ट और फ्रंट व रियर पार्किंग सेंसर्स जैसे सेफ्टी फीचर्स मिलेंगे।
दुनिया का सबसे बड़ा रॉकेट लॉन्च कॉम्प्लेक्स बनाएंगे मस्क:ये मैनहट्टन शहर से 8 गुना बड़ी जमीन पर बनेगा, हर साल हजारों स्टारशिप रॉकेट लॉन्च होंगे
इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अमेरिका के दक्षिणी लुइसियाना में दुनिया का सबसे बड़ा रॉकेट लॉन्च कॉम्प्लेक्स बना रही है। इस प्रोजेक्ट पर कंपनी 100 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹9.50 लाख करोड़ का निवेश करेगी। 'स्टारबेस, लुइसियाना' स्पेसएक्स का दूसरा 'स्टारबेस' कैंपस होगा। यह नया स्पेसपोर्ट लुइसियाना के पिकान आइलैंड पर 1.25 लाख एकड़ में फैला होगा, जो कि न्यूयॉर्क के मैनहट्टन शहर से भी आठ गुना बड़ा है। यहां से स्पेसएक्स के नेक्स्ट-जनरेशन रॉकेट 'स्टारशिप' और AI बेस्ड सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। कंस्ट्रक्शन साल 2029 से शुरू होने की उम्मीद है। 3,000 नई नौकरियां मिलेंगी, औसत सैलरी ₹88 लाख सालाना होगी लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री ने इसे राज्य की इकोनॉमी के लिए बड़ा कदम बताया है। लैंड्री के मुताबिक, इस स्पेसपोर्ट से क्षेत्र में कम से कम 3 हजार से ज्यादा डायरेक्ट नौकरियां पैदा होंगी। यहां काम करने वाले कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी 92,600 डॉलर यानी करीब 88 लाख रुपए होगी, जो वर्मिलियन पैरिश की मौजूदा औसत इनकम से लगभग दोगुनी है। गवर्नर ने कहा, "यह प्रोजेक्ट रोजगार, समुदायों के लिए प्रगति और हमारे तटीय इलाकों के लिए सुरक्षा लेकर आएगा।" 'सेल्फ-सस्टेनिंग' होगा कैंपस, खुद बनाएगा ईंधन और बिजली स्पेसएक्स की प्रेसिडेंट ग्विन शॉटवेल ने बताया कि यह कैंपस पूरी तरह 'सेल्फ-सस्टेनिंग' होगा। खुद का ईंधन और बिजली: कॉम्प्लेक्स के भीतर ही रॉकेट प्रोपेलेंट के लिए मीथेन गैस का उत्पादन होगा और इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन फैसिलिटी लगाई जाएगी। शिपिंग और ट्रांसपोर्ट: स्टारशिप रॉकेट्स को लाने-ले जाने के लिए डीप-वॉटर शिपिंग पोर्ट और व्हीकल प्रोसेसिंग यूनिट्स बनाई जाएंगी। एक डेडिकेटेड एयरपोर्ट भी बनाया जा सकता है। शॉटवेल ने कहा कि इस फैसिलिटी का लक्ष्य हर साल स्टारशिप के हजारों उड़ानों को सपोर्ट करना है, हालांकि यह इंजीनियरिंग और रेग्युलेटरी अप्रूवल पर निर्भर करेगा। रॉकेट मैन्युफैक्चरिंग नहीं सिर्फ लॉन्चिंग होगी यह लुइसियाना कैंपस स्पेसएक्स के टेक्सास स्थित 'स्टारबेस' से काफी अलग होगा। टेक्सास में रॉकेट्स का निर्माण और असेंबली की जाती है, जबकि लुइसियाना फैसिलिटी में रॉकेट की मैन्युफैक्चरिंग नहीं होगी। इसका मुख्य फोकस केवल हाई-फ्रीक्वेंसी यानी तेज गति से लॉन्चिंग पर रहेगा। पिकान आइलैंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां से रॉकेट्स को सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में आसानी से भेजा जा सकता है। यह ऑर्बिट सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स के लिए सबसे मुफीद मानी जाती है। लुइसियाना स्पेसपोर्ट के जरिए मस्क दो बड़े लक्ष्य… नॉलेज पार्ट: क्या होता है 'सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट'? यह पृथ्वी का एक ऐसा ऑर्बिटहै जिसमें सैटेलाइट हमेशा सूर्य के एक ही कोण के साथ यात्रा करती है। यानी सैटेलाइट जिस जगह से भी गुजरती है, वहां हमेशा धूप होती है। सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स और अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स के लिए यह ऑर्बिट सबसे बेस्ट मानी जाती है।
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