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Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन कब है? भाई न हो तो किसे बांधे राखी? जानें सही मंत्र

Raksha Bandhan Kab Hai: रक्षाबंधन हिंदू धर्म में पवित्र पर्व है. इस दिन बहनें अपने भाई के हाथों में रक्षासूत्र बांधती है और भाई उन्हें उपहार देते हैं. ज्योतिषाचार्य हरीगोपाल शर्मा बताते हैं कि इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा. इस साल राखी की खासियत यह है कि रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा. सूर्योदय से पूर्व ही भद्रा समाप्त हो जाएगी. ऐसे में बहनें पूरे दिन भाई के हाथों में राखी बांध सकेंगी. राखी बांधते समय हमें अपने देवी-देवताओं को याद कर भाई की लंबी आयु की कामना करनी चाहिए. मगर राखी बांधते हुए एक खास मंत्र का जाप भी किया जा सकता है ताकि नकारात्मकता दूर रहे. 

इस साल रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण भी लग रहा है लेकिन भारत में दृश्यमान न होने की वजह से इसका सूतक नहीं लगेगा. इसलिए, सभी प्रकार के धार्मिक कार्य पूर्णिमा के दिन किए जा सकते हैं. आइए इस आर्टिकल में जानते हैं राखी बांधने का सही मुहूर्त व तिथि और मंत्र. 

रक्षाबंधन का महत्व

रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व माना जाता है. इस पर्व की पवित्रता इतनी है कि भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन जीवनभर के लिए लेता है. इस दिन बहन-भाई के इस त्योहार पर परिवार के सभी सदस्यों के बीच आपसी प्रेम बढ़ता है और रिश्तों में मिठास बढ़ती है. यह पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा पर मनाय जाता है. इसलिए, रक्षाबंधन के दिन वेदों को पाठ भी करना चाहिए.

ये भी पढ़ें- Raksha Bandhan Katha: राखी क्यों बांधी जाती है? कृष्ण-द्रौपदी से लेकर इंद्राणी तक... जानें रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथाएं 

रक्षाबंधन कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 27 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर हो रहा है. वहीं, पूर्णिमा तिथि का समापन 28 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाई जाएगी.

रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

हालांकि, 28 अगस्त को शुक्रवार को पूरे दिन राखी बांधी जाएगी. मगर राखी बांधमे का उत्तम मुहूर्त सुबह 05:57 बजे से सुबह 09:48 बजे तक रहेगा.

रक्षाबंधन 2026 पंचांग

  • ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:25 से सुबह 05 बजकर 11 मिनट तक
  • अभिजित मुहूर्त- दोपहर 11:50 से दोपहर 12:40 तक
  • गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:33 से शाम 06 बजकर 56 मिनट तक
  • अमृत काल- शाम 07:44 से रात 09:23 तक

भाई न हो तो राखी किसे बांधे?

ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि जिन बहनों या महिलाओं के भाई नही हैं, वे रक्षाबंधन पर अपने ईष्टदेवता को राखी बांध सकती हैं. रक्षाबंधन के दिन भगवान गणेश, हनुमान जी, भगवान शिव, लड्डू गोपाल या फिर भगवान राम को राखी बांध सकते हैं. आप जिन्हें भी आराध्य मानती हैं, उन्हें राखी बांधकर अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकती हैं और त्योहार मना सकती हैं. इष्टदेवो को रक्षासूत्र की जगह शुद्ध रेशम का धागा बांधना शुभ माना जाता है.

भाइयों को भी बहने राखी या रक्षासूत्र ने होने पर रेशम का धागा बांध सकती है. 

राखी बांधते समय कौन सा मंत्र बोले?

रक्षासूत्र या राखी का पहली कथा राजा बलि और माता लक्ष्मी से जुड़ी हुई है. राजा बली को रक्षासूत्र बांधते हुए माता लक्ष्मी ने एक मंत्र बोला था. वह मंत्र हैं-"येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।". इस मंत्र का अर्थ है जिस तरह शक्तिशाली असुरराज राजा बलि को रक्षासूत्र से बांधा गया था, उस प्रकार यह रक्षासूत्र भी सुरक्षा और शुभता का प्रतीक बनेगा. बहनें अपने भाई की कलाई पर इस रक्षा धागे को बांधते हुए उसके सुखी, स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की कामना करती है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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स्पाइन को रखना है सीधा तो करें ताड़ासन, पोस्चर सुधारने के साथ बढ़ता है आत्मविश्वास

नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय योग संस्कृति में ताड़ासन को सभी आसनों का आधार माना जाता है। इस आसन में शरीर को ताड़ के वृक्ष की तरह सीधा और संतुलित रखा जाता है। नियमित अभ्यास से शरीर में स्फूर्ति आती है और सही ढंग से खड़े होने की आदत विकसित होती है।

ताड़ासन का अर्थ पेड़ से है और आसन का अर्थ योग से होता है। यानी कि शरीर को ताड़ के पेड़ की तरह लम्बा बनाने में मदद करता है। वैसे संस्कृत में ताड़ को पर्वत का पर्यायवाची भी कहा जाता है,जो लम्बाई का प्रतिक होता है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को लेकर अपनी राय दी है। उनका कहना है कि ताड़ासन को नियमित रूप से अपने जीवनशैली में अपनाना चाहिए। उनके अनुसार, ताड़ासन एक आसान योगासन है जिसे खड़े होकर किया जाता है। इसे करने से शरीर में स्थिरता आती है और बैलेंस बेहतर होता है।

योग एक्सपर्ट का मानना है कि ताड़ासन के नियमित अभ्यास से शरीर के पोस्चर में सुधार, स्थिरता बनाना और स्पाइनल अलाइनमेंट को सपोर्ट करना एक आसान स्टैंडिंग पोज से शुरू किया जा सकता है। यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत और सीधा रखता है, कंधों और गर्दन की जकड़न कम करता है, शरीर के संतुलन और स्थिरता को बढ़ाता है। आत्मविश्वास बढ़ाता है और मन को एकाग्र करता है और पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार करता है।

ताड़ासन को रोजाना आसानी से किया जा सकता है, जिसके लिए साधक सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं। इसके बाद दोनों पैरों को जोड़कर रखें और वजन समान रूप से दोनों पैरों पर बांटें। फिर घुटनों को सीधा रखते हुए जांघों को थोड़ा अंदर की ओर खींचते हुए पेट को हल्का अंदर की ओर रखें और छाती को आगे की ओर करें और कंधों को पीछे व नीचे की ओर रखें ताकि रीढ़ सीधी रहे। इस दौरान गर्दन सीधी रखें और आंखों को आगे किसी बिंदु पर केंद्रित करें व हाथों को शरीर के दोनों ओर सीधा रखें या फिर दोनों हाथों की हथेलियों को जोड़कर नमस्कार मुद्रा में छाती के सामने रखें। अभ्यास के दौरान गहरी सांस लेते और छोड़ते रहें। इस मुद्रा में 30 से 60 सेकंड तक रहें।

लो बीपी या चक्कर आने की समस्या वाले लोगों को पंजों पर संतुलन बनाते समय सतर्क रहना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को यह आसन किसी योग प्रशिक्षक की देखरेख में करना चाहिए।

--आईएएनएस

एनएस/पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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