दिनभर की थकान के बाद हर किसी के लिए सुकूनभरी और अच्छी नींद बेहद जरूरी होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ कितने घंटे सोते हैं। यही नहीं आप किस पोजीशन में सोते हैं, इसका भी आपकी सेहत पर बड़ा असर हो सकता है। खासतौर हार्टबर्न और डाइजेशन जैसी समस्याओं में सोने की पोजीशन बेहद अहम भूमिका निभाती है। कई लोग रात में खाना खाने के बाद खट्टी डकार, सीने में जलन, एसिडिटी या पेट में भारीपन की शिकायत करते हैं।
अक्सर इसकी वजह अनियमित खानपान या मसालेदार खाने के माना जाता है। लेकिन कई बार गलत तरीके से सोना भी इन परेशानियों को बढ़ा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या सोने की पोजीशन से भी पाचन और सीने में जलन की समस्या हो सकती है।
सोने की पोजीशन से भी पाचन और सीने में जलन की समस्या
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक भोजन के फौरन बाद ही पीठ के बल सीधे लेट जाना या फिर पूरी तरह से सपाट सोने से पेट का एसिड भोजन नली की तरफ वापस आने लगता है। जिस कारण खट्टी डकार, सीने में जलन और गले में जलन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। खासकर उन लोगों को जिनको पहले से गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज है। उनमें यह समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती है।
कई बार पेट के बल सोने से भी पेट पर ज्यादा दबाव पड़ता है, जिस कारण पाचन संबंधी असुविधा बढ़ सकती है। इस कारण देर रात भारी खाना खाने के फौरन बाद लेटना सही आदत नहीं मानी जाती है।
पाचन के लिए सोने की सबसे अच्छी पोजीशन
पाचन और हार्टबर्न दोनों के लिए बाईं करवट लेकर सोना फायदेमंद माना जाता है। बाएं ओर करवट लेकर सोने से गुरुत्वाकर्षण की वजह से पेट का एसिड भोजन नली में वापस जाने की संभावना कम होती है। इससे एसिड रिफ्लक्स और सीने की जलन की समस्या नहीं होती है। वहीं कुछ लोगों के लिए सिर और कंधों को थोड़ा ऊंचा रखकर सोना भी फायदेमंद होता है।
ऐसा करने से पेट का एसिड ऊपर की ओर नहीं आता है और फिर रात में हार्टबर्न की शिकायत भी कम हो सकती है। लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है। इसलिए यदि किसी को लगातार समस्या बनी रहती है, तो उसको फौरन डॉक्टर की सलाह जरूर लेना चाहिए।
वहीं बाएं ओर करवट लेकर रात में सोने से एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। इससे हार्टबर्न और खट्टी डकार जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं। इससे नींद और क्वालिटी बेहतर होती है। लेकिन अगर बार-बार एसिड रिफ्लक्स की समस्या होती है, तो सिर्फ सोने की पोजीशन को चेंज करने पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिएष बल्कि डॉक्टर की सलाह और इलाज भी जरूरी है।
हार्टबर्न से कैसे करें बचाव
रात को सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले भोजन कर लेना चाहिए। जिससे कि भोजन को पचने का समय मिल सके। राज में ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और ज्यादा तेल वाले खाने से परहेज करना चाहिए। वहीं शराब, कैफीन और धूम्रपान जैसी आदतों की वजह से भी एसिड रिफ्लैक्स को बढ़ा सकती है। अगर वेट ज्यादा है, तो उसको भी कंट्रोल करें। क्योंकि मोटापा पेट पर दबाव बढ़ाकर हार्टबर्न की समस्या को बढ़ा सकता है।
Continue reading on the app
आजकल कॉर्पोरट लाइफस्टाइल और डेस्क जॉब में घंटों तक लैपटॉप के सामने बैठे रहना सामान्य नहीं होता है। करीब 7 और 8 घंटे एक ही जगह बैठकर काम करना लोग अपनी आदत बना रहे हैं। आप भी ऑफिस में लगातार 8 घंटे तक लैपटॉप पर वर्क करते होंगे।
अक्सर होता है कि लगातार ऐसे बैठे रहने से न सिर्फ पीठ दर्द और गर्जन में खिंचाव आता है, बल्कि दिमाग भी थक जाता है और कई शारीरिक समस्याएं होने लगती हैं। सुबह के दौरान माइड फ्रेश रहता है, जिससे वर्क भी अच्छे से होता है, लेकिन दोपहर के समय ध्यान भटकने लगता है और आपको थकान महसूस जरुर होती होगी। इन सभी दिक्कतों से बचने के लिए आप 2 मिनट वाला माइक्रो ब्रेक ट्रेंड आजमा सकती हैं। वैसे आजकल वर्किंग लोगों के बीच यह काफी लोकप्रिय है।
2 मिनट वाला 'माइक्रो ब्रेक' ट्रेंड
अब आप भी सोचे रहे होंगे कि क्या है, यह ट्रेंड। दो मिनट की हल्की बॉक या बॉडी स्ट्रैचिंग की यह आसान ट्रिक आपके दिमाग को तुरंत रीफ्रेश कर सकती है। आइए आपको इस ट्रेंड के बारे में जानकारी देते हैं।
क्या है माइक्रो ब्रेक ट्रेंड?
दरअसल, माइक्रो ब्रेक का मतलब है काम के बीच में लिया जाने वाला एक छोटा सा ब्रेक। अगर कोई व्यक्ति ऑफिस में लगतार 30 से 45 मिनट या 1 घंटे तक कार्य करता है, तो इस ट्रेंड के तहत वह बीच-बीच में उठकर 2 मिनट के लिए टहलने लगता है या हल्की मूवमेंट करता है। इसलिए इस एक्टिविटी को माइक्रो ब्रेक कहा जाता है। इसमें आपको घंटों का लंबा ब्रेक लेने की जरुरत नहीं है, आप बस 2 मिनट में ही थोड़ा बहुत घूमकर वापस आकर अपनी सीट पर वर्क कर सकते हैं।
सिटिंग जॉब में कैसे मदद करता है यह ट्रेंड?
बता दें कि, यूके की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा और नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार जब आप हर आधे या एक घंटे में 2 मिनट वाला यह ट्रेंड करते हैं, तो इससे काम का तनाव कम हो जाता है। इस तरह की आदत आपकी आंखों को भी डिजिटल स्क्रीन से कुछ समय के लिए आराम दे सकती है। वहीं, इन छोटे ब्रेक की मदद से आंखों में जलन और सिरदर्द की शिकायत भी कम हो जाती है। असल में यह ट्रेंड उन लोगों के लिए बेहद खास है, जिनको वर्कलोड की वजह से सिर में दर्द बना रहता है।
वर्कप्लेस पर 2 मिनट का माइक्रो ब्रेक कैसे लें?
- जब आप ऑफिस में काम करें, तो हर समय एक घंटे के लिए अलार्म या रिमाइंडर सेट करें।
- फोन पर अलार्म बजते ही अपनी डेस्क से उठें और 2 मिनट के लिए हाथों और कंधों की हल्की स्ट्रैचिंग करें।
- इसके अलावा, आप ऑफिस में थोड़ा बहुत चल-फिर चल सकते हैं, जैसे सीट से उठकर पानी पीने या कैंटीन तक जा सकते हैं।
Continue reading on the app