कनाडा के नानकसर गुरुद्वारे में बेअदबी:जेल से छूटकर आया अपराधी घुसा, गुरु साहिब का रूमाला उतारा, पेंचकस मारकर 2 घायल किए
कनाडा के एडमंटन स्थित गुरुद्वारा नानकसर साहिब में बेअदबी की घटना हुई है। 27 साल का एक व्यक्ति पेंचकस लेकर गुरुद्वारे के अंदर घुस गया। अंदर आते ही बिछाई साहब पर चढ़ गया और गुरु साहब का रूमाला उतार लिया। इससे पहले कि वह गुरु ग्रंथ साहिब को नुकसान पहुंचाता संगत ने उसे पकड़ लिया। प्रधान जोरा सिंह ने बताया कि 21 अगस्त की सुबह करीब 5 बजे एक स्थानीय युवक अंदर आया तो उत्पाद मचाने लगा। जैसे ही वह गुरु ग्रंथ साहिब की तरफ बढ़ा तो सिंहों ने उसे रोक लिया। इस पर उसने 2 सिंहों को पेंचकस माकर घायल कर लिया। नीली टी-शर्ट पहने युवक को संगत ने पकड़ लिया। इसके बाद गुरुदारे की एक लड़की ने पुलिस को फोन कर लिया। पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को अरेस्ट कर लिया। वहीं, पुलिस ने बताया कि घायलों को अस्पताल भर्ती करवाया गया। एक को छुट्टी मिल गई है, जबकि दूसरे का इलाज चल रहा है। आरोपी की पहले से वांटेड था। पुलिस ने बताया कि आरोपी मेंटली डिस्टर्ब है। उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जानें प्रधान जोरा सिंह ने क्या बताया… संगत ने उठाए सवाल- हर बार आरोपी मेंटली डिस्टर्ब क्यों? इस घटना के बाद स्थानीय सिख समुदाय में भारी रोष है। लोगों ने सवाल उठाया है कि चाहे भारत हो या विदेश, धार्मिक स्थलों पर होने वाले हमलों के बाद आरोपियों को मानसिक रूप से बीमार बताकर जांच की दिशा क्यों बदल दी जाती है? सिख संगत ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की गहराई से जांच की जाए और आरोपी को सख्त से सख्त सजा दी जाए। फिलहाल, गुरुद्वारा साहिब को संगत के लिए दोबारा पूरी तरह से खोल दिया गया है। जेल से रिहाई के कुछ घंटे बाद ही हमला पुलिस की प्राथमिक जांच और CBC न्यूज के अनुसार, 27 वर्षीय आरोपी कोई आम राहगीर नहीं, बल्कि एक पुराना हिंसक अपराधी है। वह घटना से ठीक एक दिन पहले ही एक गंभीर हमले और पुलिस अधिकारी पर हमला करने के जुर्म में जेल की सजा काटकर रिहा हुआ था। रिहाई के बाद उसे तय रिहाइश हाफवे हाउस जाना था, लेकिन वह वहां नहीं पहुंचा और गायब हो गया। पुलिस ने अभी घायलों और आरोपी की पहचान नहीं बताई है। पुलिस का कहना है कि मामले के निपटारे के बाद पहचान उजागर की जाएगी। ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… कनाडा में 2 गुरुद्वारों को गिराने की धमकी:एक ही नंबर से 2 बार धमकी भरी कॉल आई, कैलगरी पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई कनाडा के कैलगरी स्थित प्रमुख सिख धार्मिक स्थल दशमेश कल्चर सेंटर को अज्ञात लोगों ने इमारत गिराने की धमकी दी है। लगातार आ रहे इन नस्ली और धमकी भरे फोन कॉल्स के बाद गुरुद्वारा प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की चिंता बढ़ गई है। पढ़ें पूरी खबर…
पाकिस्तान ने पत्रकार को आतंकी लिस्ट में डाला:PoK प्रदर्शन कवर करने वाले दानिश इरशाद पर बिना मुकदमे कार्रवाई, बैंक अकाउंट सीज-यात्रा पर रोक
पाकिस्तान ने PoK में हो रहे प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार और रिसर्चर दानिश इरशाद का नाम आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची यानी फोर्थ शेड्यूल में डाल दिया है। खास बात यह है कि सरकार ने उनके खिलाफ न तो किसी आतंकी गतिविधि का आरोप बताया है और न ही किसी अदालत का फैसला सामने आया है। दानिश इरशाद पिछले करीब 10 साल से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान की राजनीति और वहां के हालात पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने PoK में सुरक्षा बलों की कार्रवाई से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों की लगातार रिपोर्टिंग की थी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दानिश इरशाद ने ऐसा क्या किया, जिसके आधार पर उनका नाम फोर्थ शेड्यूल में डाला गया? उपलब्ध सरकारी आदेश में इसका कोई साफ जवाब नहीं मिलता। 10 साल से पत्रकारिता कर रहे दानिश इरशाद दानिश इरशाद रावलपिंडी के रहने वाले हैं। उन्होंने 2015 में इस्लामाबाद से पत्रकारिता शुरू की थी। वे लाहौर स्थित नियो न्यूज के साथ काम करते हैं और जम्मू से प्रकाशित कश्मीर टाइम्स में कॉलम भी लिखते हैं। वे 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर के इतिहास पर एक किताब भी लिख चुके हैं। कश्मीर टाइम्स के मुताबिक, PoK के 24 वॉन्टेड लोगों की सूची में इरशाद का नाम 12वें नंबर पर है। इसी आदेश में JAAC से जुड़े कार्यकर्ताओं का भी जिक्र है। पाकिस्तान सरकार ने जून में JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया था। इरशाद के मुताबिक, उन्हें न तो किसी मामले में अदालत में पेश किया गया और न ही किसी अपराध में दोषी ठहराया गया। सरकार ने भी उन्हें सीधे यह नहीं बताया कि उनका नाम सूची में क्यों डाला गया। उन्हें 18 अगस्त को सोशल मीडिया के जरिए इस कार्रवाई का पता चला। इसके बाद उन्होंने PoK के गृह विभाग के एक सूत्र से इसकी पुष्टि की। फोर्थ शेड्यूल क्या है? पाकिस्तान में फोर्थ शेड्यूल आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची है। इसमें उन लोगों को रखा जा सकता है, जिन्हें सरकार आतंकवाद या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ा मानती है। इस सूची में नाम आने के बाद उस व्यक्ति पर कई तरह की पाबंदियां लग सकती हैं। यानी वह आसानी से विदेश नहीं जा सकता, उसके बैंक खाते या पैसों से जुड़े कामों में दिक्कत आ सकती है और उस पर सरकारी निगरानी भी बढ़ सकती है। इसलिए किसी पत्रकार का नाम इस सूची में आना काफी गंभीर कार्रवाई मानी जाती है। PoK में क्या चल रहा है? इरशाद के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब PoK में लंबे समय से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। इनका नेतृत्व JAAC कर रही है। प्रदर्शनकारी राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सब्सिडी और शासन व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे उठा रहे हैं। उनकी मांगों में PoK विधानसभा में पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना भी शामिल है। पाकिस्तान सरकार ने 5 जून को JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव बढ़ गया। इस दौरान इंटरनेट बंद करने और मीडिया पर पाबंदियां लगाने जैसी कार्रवाई भी हुई। JAAC का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 80 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं। इसी दौरान इरशाद ने प्रदर्शनों, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की स्थिति को लगातार कवर किया। पाकिस्तानी पत्रकारों ने क्या कहा? दानिश इरशाद को फोर्थ शेड्यूल में डाले जाने की पाकिस्तान के कुछ पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने भी आलोचना की है। पाकिस्तानी पत्रकार सालेह सफीर अब्बासी ने इसे प्रेस की आजादी पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि असहमति रखना अपराध नहीं, बल्कि एक अधिकार है। ब्रिटेन में रहने वाले पाकिस्तानी कार्यकर्ता अजहर अहमद ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी पत्रकार के खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है। इससे उन पत्रकारों में डर पैदा हो सकता है, जो विरोध प्रदर्शनों, सरकारी कार्रवाई और मानवाधिकारों की स्थिति पर रिपोर्टिंग करते हैं। न्यूयॉर्क की पाकिस्तानी खोजी पत्रकार अरीबा फातिमा ने भी सवाल उठाया कि इरशाद के खिलाफ न कोई मुकदमा है और न अदालत का आदेश, फिर उन्हें आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची में किस आधार पर डाला गया। ------------------------------- यह खबर भी पढ़ें… शांत रहने वाला PoK पाकिस्तान के लिए परेशानी कैसे बना:12 रिजर्व सीटें क्यों खत्म कराना चाहते हैं प्रदर्शनकारी, मांगें क्यों नहीं मान रही सरकार PoK में महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल चुका है। इसे कई वर्षों में पाकिस्तान सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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