Rohingya refugees ने Bangladesh में निकाली रैली, सुरक्षित म्यांमा वापसी की मांग की
म्यांमा से विस्थापित होकर बांग्लादेश के दर्जनों शिविरों में रह रहे हजारों रोहिंग्या शरणार्थियों ने सुरक्षित वापसी की मांग करते हुए मंगलवार को रैली निकाली। उन्हें सरकारी कार्रवाई के कारण अपना घर छोड़े नौ साल हो चुके हैं। प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से म्यांमा के रखाइन प्रांत में सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
उन्होंने इस दिन को ‘‘रोहिंग्या नरसंहार दिवस की नौवीं बरसी’’ के रूप में मनाया। म्यांमा के रोहिंग्या समुदाय के 10 लाख से अधिक शरणार्थी अब दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश के कॉक्स बाजार जिले के आसपास शिविरों में रह रहे हैं। इनमें से ज्यादातर लोग 2017 में उस समय बड़ी संख्या में सीमा पार कर बांग्लादेश पहुंचे थे, जब बौद्ध बहुल म्यांमा ने रोहिंग्या मुस्लिम विद्रोही समूह के हमले के बाद रखाइन में सैन्य कार्रवाई शुरू की थी।
बांग्लादेश सरकार ने कम से कम दो बार शरणार्थियों की स्वदेश वापसी का प्रयास किया, लेकिन कोई भी शरणार्थी सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए वापस जाने को तैयार नहीं हुआ। बांग्लादेश का कहना है कि वह किसी को जबरन वापस नहीं भेजेगा। जनवरी में अंतरराष्ट्रीय अदालत ने 2017 में रखाइन प्रांत में रोहिंग्याओं के खिलाफ नरसंहार के आरोपों से जुड़े मामले में सुनवाई की थी।
तीन सप्ताह चली सुनवाई के दौरान अदालत ने सामूहिक हत्याओं, यौन हिंसा और गांवों को नष्ट किए जाने से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्यों, विशेषज्ञों की गवाही और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान की समीक्षा की। संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसे जातीय सफाए और नरसंहार का मामला बताया था। म्यांमा ने अदालत से कहा कि रोहिंग्याओं के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई वैध आतंकवाद रोधी अभियान थी और इसे नरसंहार नहीं कहा जा सकता।
वर्ष 2017 की कार्रवाई के बाद हजारों रोहिंग्या मुस्लिम म्यांमा के रखाइन से गोलाबारी, अंधाधुंध हत्याओं और हिंसा के बीच पैदल और नावों के जरिए पड़ोसी बांग्लादेश पहुंच गए थे। म्यांमा की सरकारी सेना से लड़ रहे विद्रोही संगठन अराकान आर्मी ने रखाइन पर कब्जा कर लिया था। बांग्लादेश सरकार ने अपनी सीमा खोल दी थी और अंततः 7 लाख से अधिक शरणार्थियों को मुस्लिम बहुल देश में शरण मिली।
यह संख्या उन 3 लाख से अधिक शरणार्थियों के अतिरिक्त थी, जो म्यांमा की सेना और अन्य बलों की हिंसा के कारण दशकों से बांग्लादेश में रह रहे थे। हाल के वर्षों में रखाइन प्रांत में सुरक्षा की स्थिति और अधिक अस्थिर हुई है। रोहिंग्या शरणार्थी नेता सैयद उल्लाह ने मंगलवार को कहा, ‘‘चाहे अराकान आर्मी हो या म्यांमा की सेना, जब तक वे यह दोहरा खेल जारी रखेंगे, अराकान या रखाइन में स्थिति सुरक्षित नहीं होगी।
क्या इसका मतलब यह है कि हमें यहां और 50 साल रहना होगा? हम 50 साल तक यहां नहीं रह सकते।
Monsoon Skin Care: मानसून में पिंपल्स ने बिगाड़ दी चेहरे की रंगत? इन स्किन केयर टिप्स से पाएं साफ और हेल्दी त्वचा
Monsoon Skin Care: मानसून की बारिश जहां गर्मी से राहत देती है, वहीं बढ़ी हुई नमी त्वचा के लिए कई तरह की परेशानियां लेकर आ सकती है। उमस के कारण चेहरे पर पसीना और अतिरिक्त ऑयल जमा होने लगता है, जिससे त्वचा चिपचिपी महसूस होती है। धूल-मिट्टी और प्रदूषण के संपर्क में आने पर रोमछिद्र बंद हो सकते हैं और पिंपल्स या छोटे-छोटे दाने ज्यादा नजर आने लगते हैं। ऐसे में मौसम बदलते ही स्किन केयर रूटीन में भी थोड़ा बदलाव करना जरूरी हो जाता है।
बार-बार चेहरा धोना या पिंपल्स को दबाना समस्या को और बढ़ा सकता है। मानसून में त्वचा को साफ रखने के साथ उसका नमी संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। बहुत ज्यादा प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने के बजाय एक आसान और नियमित स्किन केयर रूटीन अपनाना बेहतर विकल्प हो सकता है। आइए जानते हैं मानसून में पिंपल्स से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
दिन में दो बार चेहरे को करें साफ
मानसून में पसीना और ऑयल अधिक महसूस हो सकता है। ऐसे में सुबह और रात चेहरे को हल्के, त्वचा के अनुकूल क्लींजर से साफ करें। इससे त्वचा की सतह पर जमा अतिरिक्त तेल और गंदगी हटाने में मदद मिल सकती है। बहुत ज्यादा स्क्रब करने या बार-बार फेस वॉश करने से त्वचा में जलन और रूखापन हो सकता है, इसलिए सफाई में संतुलन जरूरी है।
हल्का मॉइश्चराइजर लगाना न भूलें
पिंपल्स होने पर कई लोग मॉइश्चराइजर पूरी तरह बंद कर देते हैं, लेकिन यह सही तरीका नहीं है। त्वचा को हाइड्रेट रखना जरूरी है। मानसून में हल्का, नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइजर चुना जा सकता है, जो त्वचा को भारी या बहुत तैलीय महसूस न कराए। अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार प्रोडक्ट चुनना बेहतर रहेगा।
सनस्क्रीन को रूटीन में रखें
बादल छाए रहने के बावजूद यूवी किरणों का असर हो सकता है। इसलिए दिन के समय घर से बाहर निकलते हुए सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। ऐसा सनस्क्रीन चुनें जो आपकी त्वचा के अनुकूल हो और रोजाना इस्तेमाल किया जा सके। बाहर अधिक समय बिताने पर प्रोडक्ट के निर्देशों के अनुसार इसे दोबारा लगाने की जरूरत पड़ सकती है।
पिंपल्स को बार-बार न छुएं
चेहरे पर हाथ लगाने की आदत पिंपल्स को परेशान कर सकती है। पिंपल्स को दबाने, फोड़ने या नाखून से छेड़ने से त्वचा में सूजन बढ़ सकती है और बाद में दाग पड़ने का जोखिम भी रहता है। कोशिश करें कि चेहरे को बिना जरूरत न छुएं। मोबाइल फोन, तकिए के कवर और मेकअप टूल्स जैसी चीजों की सफाई का भी ध्यान रखें।
मेकअप और हेयर प्रोडक्ट्स का रखें ध्यान
मानसून में भारी मेकअप त्वचा पर अतिरिक्त परत बना सकता है, खासकर अगर लंबे समय तक लगा रहे। जरूरत के मुताबिक हल्के और नॉन-कॉमेडोजेनिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें और रात को सोने से पहले मेकअप अच्छी तरह साफ करें। अगर बालों में ज्यादा ऑयल या हेयर प्रोडक्ट्स लगाए जाते हैं, तो उन्हें चेहरे की त्वचा के संपर्क में आने से बचाएं।
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लेखक: (कीर्ति)
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